Skip to content Skip to navigation

GST : 'सेवा कर की दरें तय नहीं होना चिंताजनक'

नई दिल्ली: वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) को एक जुलाई से लागू करने की तैयारी हो रही है, लेकिन नए अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के तहत अभी तक सेवा कर की दरों पर कोई स्पष्टता नहीं है। एक ऑडिटर फर्म ने शुक्रवार को यह बात कही। ऑडिट फर्म डेलॉइट हास्किंस एंड सेल्स के भागीदार प्रशांत देशपांडे ने बीटीवीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "जीएसटी पर पूरी चर्चा माल से जुड़ी है, सेवाओं पर कोई चर्चा नहीं है। हमें पता नहीं है कि सेवा दर एक समान होगी या नहीं।"

उन्होंने कहा, "वस्तुओं के विपरीत सेवाएं थोड़ी अलग होती हैं, अगर हम कई स्थानों से सेवा प्रदान कर रहे हैं, तो हमारी जीएसटी दर क्या होगी? इस पर कानून की स्पष्टता की आवश्यकता है, ताकि बाद में कोई मुकदमेबाजी न हो।"

उन्होंने पूछा, "यदि किसी व्यापारी की कई राज्यों में उपस्थिति है, तो क्या वह कुछ स्थानों पर राज्य के हिसाब से कर चुकाएगी और अन्य स्थानों पर केंद्र सरकार के मुताबिक कर चुकाएगी?"

केंद्र और राज्यों के बीच बनी समझ के मुताबिक 1.5 करोड़ से अधिक के कारोबार करनेवाली कंपनियों से राज्य सरकार कर लेगी, जिसके तहत करीब 90 फीसदी कंपनियां आएंगी, जबकि 10 फीसदी कंपनियों के कर का आकलन केंद्र सरकार करेगी। जहां तक 1.5 करोड़ रुपये से ऊपर का कारोबार है, तो केंद्र और राज्यों के बीच 50:50 के आधार पर उसका मूल्यांकन किया जाएगा।

देशपांडे ने यह भी कहा कि विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कर दरों को जल्द ही घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि व्यापारियों को उस हिसाब से अपनी योजना बनाने के लिए कम से कम तीन महीने चाहिए होंगे।

देशपांडे ने कहा, "हमें कम से कम तीन महीने पहले लगनेवाले करों की दरों को जानने की जरूरत है। ताकि उस हिसाब से कई चीजों में बदलाव लाया जा सके। इसलिए इसकी घोषणा पहले ही करनी चाहिए न कि जीएसटी लागू करने के एक हफ्ते पहले।"

Top Story
Share
loading...