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नई दिल्ली: आखिरकार यूपीए ने राष्ट्रपति पद के लिए केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी को अपने उम्मीदवार के तौर पर घोषणा कर दी। इस घोषणा के महज घंटे भर के भीतर उत्तर प्रदेश के दो विरोधी दलों समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने प्रणब को समर्थन देने की घोषणा कर डाली।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी और सहयोगी दलों की एक बैठक के बाद औपचारिक रूप से यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुखर्जी का पांच दशकों का लंबा और शानदार सार्वजनिक सेवा का रिकॉर्ड है। सोनिया ने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए उनके पक्ष में व्यापक समर्थन है। यूपीए ने सभी राजनीतिक दलों, सांसदों और विधानसभाओं के सदस्यों से भी मुखर्जी की उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील की।
प्रणब की उम्मीदवारी की घोषणा के कुछ ही देर बाद प्रधनमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को फोन कर इसकी जानकारी दी और उनसे समर्थन मांगा। सुषमा ने कहा कि वह इस पर विचार करेंगी। सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव को भी फोन किया है और उनसे प्रणब की उम्मीदवारी का समर्थन करने की गुजारिश की है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राष्ट्रपति पद के यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को बधाई दी, लेकिन कहा कि उन्हें समर्थन देने का फैसला अन्य वाम दलों के साथ विमर्श के बाद लिया जाएगा। माकपा नेता वृंदा करात ने कहा कि बधाई देना हमारे शिष्टाचार में शामिल है। जहां तक समर्थन देने की बात है, इसके लिए हमें अन्य वाम दलों से विमर्श करना होगा।
उधर बसपा अध्यक्ष मायावती ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति पद के संप्रग के उम्मीदवार का समर्थन करेगी। सपा महासचिव और वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने घोषणा की, कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन करेगी। यादव ने कहा कि सपा उनका समर्थन करेगी। हम उनकी जीत की कामना करेंगे। एक दिन पहले तक तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के साथ मिलकर संप्रग के विरोध में उम्मीदवार उतारने को कटिबद्ध दिख रही सपा ने अपना रुख बदल कर ममता बनर्जी से किनारा कर लिया।
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