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श्रम शक्ति झारखंड की सबसे बड़ी पूंजी: रघुवर दास

रांचीः झारखण्ड को इसके समृद्ध खनिज भण्डार एवं स्टील तथा ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए पहचाना जाता है लेकिन मेरे विचार से यहां की श्रम शक्ति इस प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी है। उक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहीं। श्री दास बृहस्पतिवार को खेलगांव में आयोजित ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट 2017 में उपस्थित अति विशिष्ट अतिथियों को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा कि झारखण्ड की कुल जनसंख्या का 60 प्रतिशत श्रम योग्य आयु वर्ग का है, यहां की कुल जनसंख्या का 60 फीसदी 15 से 59 साल आयुवर्ग का है। झारखण्ड के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर कंसटेंट प्राइज पर 12.1 प्रतिशत है और प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि की दर 11.1 प्रतिशत है, जो हमारी तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था की पहचान है।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सदियों से हमारी संस्कृति को संभालकर रखने वाले, आजादी की लड़ाई में बलिदान देने वाले भगवान् बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू एवं वीर सपूतों की धरती पर आयोजित प्रथम मोमेंटम झारखण्ड वैश्विक निवेशक सम्मलेन के अवसर पर इस विशाल एवं वैश्विक जनसमूह का स्वागत करते हुए उन्होंने सहयोगी व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों का आभार जताया। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार प्रकट करता हूं जिनके द्वारा दिए गए मन्त्र “मेक इन इंडिया“ से प्रेरणा लेकर हमने “मेक इन झारखण्ड“ अभियान शुरू किया।‘
उन्होंने कहा किझारखण्ड तेजी से उभरता हुआ युवा प्रदेश है जो लगातार भारत का सर्वाधिक विकसित और संपन्न राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है। यह प्रदेश संभावनाओं से भरा हुआ है, प्रकृति ने इस प्रदेश को दोनों हाथों से बेशुमार समृद्धि प्रदान की है। खनिज संपदा की दृष्टि से झारखण्ड दुनिया का सर्वाधिक संपन्न राज्य है, यहां भारत के कुल खनिज भण्डार का 40 प्रतिशत मौजूद है।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, स्मृति जुबिन ईरानी, पीयूष गोयल, सुदर्शन भगत, जयंत सिन्हा भी मौजूद थे। विशिष्ट अतिथियों में रतन टाटा, कुमार मंगलम बिड़ला, गौतम अडानी, नौशाद फोर्ब्स, अनिल अग्रवाल, पवन मुंजाल, शशि रुईया, सतीश पाई एवं नवीन जिंदल, महेन्द्र सिंह धोनी शामिल थे।
हाथी का उड़ना असामान्य नहीं
हमारा राजकीय पशु हाथी उड़ रहा है। यह उड़ान असामान्य नहीं है। विपरीत परिस्थतियों को अवसर में बदलने का माद्दा है। यह हमारे सपनों की उड़ान है। यह उड़ान है सवा तीन करोड़ लोगों के सपनों की। हमारे उड़ते हाथी को पंख लगे हैं। वो भी हरे। हरा रंग प्रतीक है प्राकृतिक सम्पदाओं को सुरक्षित रखते हुए विकास के निरंतर प्रयास का। इसके नीले कान प्रदेश की शांति और सुंरक्षा के प्रतीक हैं। हाथी का लाल रंग समग्र विकास के प्रति हमारे जुनून को दिखाता है - क्रांति को दिखाता है, जहां सभी के सपनों में पंख लगे हों।

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