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थोक महंगाई दर बढ़ी

नई दिल्ली: थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित देश की महंगाई दर में पिछले महीने वृद्धि दर्ज की गई और यह दिसंबर 2016 के 3.39 फीसदी से बढ़कर 5.25 फीसदी हो गई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के मुताबिक, जनवरी 2016 में सालाना मुद्रास्फीति दर नकारात्मक 1.07 फीसदी रही थी।

समीक्षाधीन माह में खाद्य पदार्थो का थोक मूल्य सूचकांक नकारात्मक 0.56 फीसदी रही, जबकि दिसंबर में यह 0.70 फीसदी थी तथा जनवरी 2016 में यह 6.46 फीसदी थी।

हालांकि, प्राथमिक वस्तुओं पर खर्च, जिसकी डब्ल्यूपीआई में सर्वाधिक 20.12 फीसदी हिस्सेदारी है, में जनवरी के दौरान 1.27 फीसदी वृद्धि हुई।

सालाना आधार पर प्याज की थोक मुद्रास्फीति दर में नकारात्मक 28.86 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि आलू की महंगाई दर नकारात्मक 20 फीसदी पर बरकरार है। सभी सब्जियों की कीमतों में नकारात्मक 32.32 फीसदी गिरावट हुई है।

इसके विपरीत जनवरी से जनवरी के आधार पर दालों की महंगाई दर 6.21 फीसदी रही, जबकि गेंहू 9.49 फीसदी महंगा हुआ और प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, मांस और मछली की कीमतों में 3.59 फीसदी वृद्धि हुई।

थोक मूल्य सूचकांक में लगभग 65 फीसदी हिस्सेदारी वाले विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में लगातार 10वें महीने वृद्धि हुई, और पिछले महीने इन उत्पादों की वृद्धि दर 3.99 फीसदी रही। दिसंबर 2016 में यह 3.67 फीसदी थी।

विनिर्मित खाद्य उत्पादों के उपवर्ग, जिसमें चीनी और खाद्य तेल आदि शामिल हैं, की महंगाई दर में जनवरी में 10.07 फीसदी वृद्धि रही।

इसका मुख्य कारण चीनी की कीमतों में आई उछाल है, जिसकी कीमत में उत्पादन में कमी के कारण 22.83 फीसदी की वृद्धि हुई। खाद्य तेलों की कीमतों में 6.25 फीसदी वृद्धि हुई।

इसी तरह ईंधन और बिजली की कीमतों भी जनवरी में बढ़ीं। जनवरी में बिजली और ईंधन की कीमतों में दिसंबर 2016 के 8.65 प्रतिशत के मुकाबले 18.14 फीसदी वृद्धि हुई। पिछले साल जनवरी में इसकी वृद्धि दर नकारात्मक 9.89 फीसदी रही थी।

केद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने सोमवार को सालाना खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए थे, जिसमें यह जनवरी में 3.17 फीसदी रही, जबकि दिसंबर में यह 3.41 फीसदी थी और पिछले साल जनवरी में यह 5.69 फीसदी थी।

इस आंकड़ों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय कारोबारी जगत ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों तथा कुछेक कमोडिटी जैसे बेसिक मेटल अलॉय आदि की कीमतों में आई वैश्विक स्तर पर तेजी है।

फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन नेवतिया ने एक बयान में कहा, "खाद्य कीमतों में हालांकि नरमी जारी है, जोकि एक सकारात्मक विकास है। वास्तव में, कल जारी किए गए सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े में भी खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी का संकेत था। बैंकों द्वारा उधार दरों में और कमी करने की जरूरत है।"

नेवतिया ने कहा कि खुदरा ऋण को किफायती मूल्य पर मुहैया कराने से खपत को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र को सहारा के लिए आसान वित्त की समान जरूरत है।

वहीं, एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने कहा है कि जनवरी 2017 डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों में वृद्धि नोटबंदी के बाद मांग गिरने की उद्योग के उम्मीदों के विपरीत है।

एसोचैम के अध्यक्ष संदीप जाजोदिया ने कहा, "हालांकि सब्जियों और प्याज की कीमतों में नीतिगत उपायों से कमी आई है, जो सराहनीय है। इसी तरह से नीति निमार्ताओं को उन उत्पादों की कीमतों पर लगाम लगानी चाहिए जो राष्ट्रीय हित के हैं जैसे गेहूं, क्योंकि इसकी कीमतों से गिरावट का सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) पर कुछ सकारात्मक प्रभाव हो सकता है।"

उन्होंने कहा, "कृषि क्षेत्र में थोक स्तर पर मूल्य स्थिति अभी भी किसान समुदाय के बीच चिंता का विषय है। क्योंकि प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में 2016 के नंबवर और दिसंबर रूप में तेज गिरावट देखी गई। हालांकि जनवरी में बैंकों द्वारा नकदी की आपूर्ति बढ़ाई गई, इससे इसमें कुछ सुधार दिख रहा है।"

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