किसी को नहीं पता किसकी हैं जयपाल सिंह स्टेडियम की जमीन, सांसद ने उठाया था सवाल, नगर आयुक्त ने झाड़ा पल्ला

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 05/18/2018 - 19:07

Nitesh Ojha

Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची के बीच में बने जयपाल सिंह स्टेडियम की जमीन पर बन रहे वेंडर मार्केट और नगर निगम के नए कार्यालय भवन की भूमि का स्वामित्व आखिर किसके पास है, इस पर संशय की स्थिति अभी बनी हुई है. राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार द्वारा नगर निगम बोर्ड की बैठक में उठाए गए इस सवाल पर भले ही नगर आयुक्त ने गंभीरता नहीं दिखाई हो या इसपर जवाब देने से बचते रहे हों, लेकिन इससे यह सवाल जरूर उभरता है कि आखिर जयपाल सिंह स्टेडियम की जमीन है किसकी ? क्या यह जमीन रांची नगर निगम की है, या रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) की?

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सांसद ने उठाए थे सवाल

मालूम हो कि हाल में हुई बोर्ड की बैठक में राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि किसी मकान के स्वामित्व का मामला अगर विवादित हो तो उस आम आदमी का नक्शा पास नहीं होता. लेकिन जहां तक उनकी जानकारी है, जयपाल सिंह स्टेडियम में बन रहे वेंडर मार्केट और नगर निगम के नए कार्यालय भवन की भूमि का स्वामित्व भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी निश्चित जानकारी है कि स्टेडियम की जमीन का मालिक नगर निगम नहीं है. ना ही नगर निगम को इस जमीन का हस्तांतरण किया गया है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि निगम द्वारा आखिर इस जमीन पर भवन का निर्माण हुआ कैसे ? साथ ही कैसे इस भवन का नक्शा पास हुआ ? बोर्ड की बैठक में उक्त जमीन हस्तांतरण की किसी घटना का जिक्र करते हुए महेश पोद्दार ने कहा था कि यह जमीन रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार की भी नहीं है. ऐसे में यह जमीन किसकी है, यह एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है.

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जयपाल स्टेडियम की जमीन पर बना वेंडर मार्केट

आरआरडीए को भी नहीं है जानकारी

मामले को लेकर जब न्यूज विंग के संवाददाता ने रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के सचिव रैंक के अधिकारी सह कार्यपालक रमेश कुमार से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि पूर्व में जयपाल सिंह स्टेडियम की जमीन आरआरडीए की थी. ऐसे में यह जमीन सरकारी तो थी, लेकिन उनके मुताबिक पूर्ववर्ती किसी सरकार ने यह निर्देश दिया था कि शहरी क्षेत्र में जितनी भी जमीन होगी वह रांची नगर निगम को दी जाएगी. उसी के तहत निगम ने स्टेडियम की जमीन को अपने स्वामित्व में कर लिया था.

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जमीन हस्तांतरण को लेकर लिखा गया था पत्र

आरआरडीए के संबंधित अधिकारी ने संवाददाता को बताया कि उक्त जमीन को आरआरडीए के नाम से हस्तांतरित करने के लिए सरकार से पत्राचार भी किया गया था. चिट्ठी में लिखा गया था कि चूकिं यह जमीन आरआरडीए के नियंत्रण में है, आरआरडीए ने इसपर पहले से कई कार्य किये हैं. इसलिए जमीन विभाग को दे दी जाए. सरकार की तरफ से क्या कोई कार्रवाई हुई, के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मामले को लेकर रिकॉर्ड देखना होगा. जब न्यूज विंग के संवाददाता ने रिकॉर्ड दिखाने की बात कही तो उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड रखने वाले कर्मचारी अभी छुट्टी पर गए हैं, ऐसे में उन्होंने संवाददाता को किसी और दिन आने की बात कही. उन्होंने यह जरुर कहा कि उन्हें यह पूरी जानकारी है कि सरकार की तरफ से कोई जमीन आरआरडीए को हस्तांतरित नहीं की गई है. आखिर में संबंधित अधिकारी यह बात कह टाल गये कि अगर कोई चिट्ठी विभाग के पास आई भी हो तो रिकॉर्ड देखना होगा.    

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