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#JharkhandElection: जानें BJP के उन उम्मीदवारों के प्रोफाइल, जिन्हें सीटिंग MLA का टिकट काट बनाया गया प्रत्याशी

Akshay/Pravin

Ranchi : 2019 के लोकसभा चुनाव से बीजेपी ने झारखंड में एक नयी परिपाटी की शुरुआत की है. लोकसभा चुनाव में पार्टी ने दो हार्डकोर भाजपाई और सीटिंग एमपी का टिकट काट दिया और ऐसे उम्मीदवार को दे दिया गया जो बीजेपी के नहीं थे.

गिरिडीह सीट गठबंधन के तहत आजसू के खाते में गयी तो कोडरमा की सीट राजद से बीजेपी में आयी अन्नपूर्णा देवी को दे दी गयी.

विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बीजेपी ऐसे ही प्रयोग कर रही है. फिलवक्त बीजेपी की तरफ से 52 सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा हुई है. इनमें दस सीटिंग एमएलए का टिकट बीजेपी ने काट दिया है.

सीटिंग विधायक सकते में हैं. इस बारे में छतरपुर के विधायक राधा कृष्ण किशोर का कहना है कि बीजेपी बताये कि आखिर किस ग्राउंड पर उनके टिकट को काटा गया.

उन्होंने कहा कि वो दावे के साथ कह सकते हैं कि इस सवाल का जवाब बीजेपी के पास नहीं होगा.

तो सवाल है कि सीटिंग विधायकों का टिकट काटने वाले उम्मीदवार क्या इतने डायनमिक हैं, कि उनको टिकट सौंप दिया जाये. इस सवाल का जवाब तो चुनाव नतीजों के बाद सामने आयेगा.

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जानते हैं उन सभी दस उम्मीदवारों का पॉलिटिकल प्रोफाइल :

सिमरिया

#JharkhandElection: जानें BJP के उन उम्मीदवारों के प्रोफाइल, जिन्हें सीटिंग MLA का टिकट काट बनाया गया प्रत्याशीकिशुन कुमार दास को सिमरिया के सीटिंग विधायक गणेश गंझू की जगह बीजेपी ने टिकट दिया है. दास सिमरिया विधानसभा के टंडवा प्रखंड के रहने वाले हैं.

1995 में वे माले को अलविदा कह कर बीजेपी में शामिल हुए. अभी बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं. पार्टी ने पहली बार इन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया है. दास को इससे पहले चुनाव लड़ने का तजुर्बा नहीं हैं.

छतरपुर

#JharkhandElection: जानें BJP के उन उम्मीदवारों के प्रोफाइल, जिन्हें सीटिंग MLA का टिकट काट बनाया गया प्रत्याशीछतरपुर विधानसभा से सीटिंग विधायक राधा कृष्ण किशोर का टिकट कट जाना काफी चर्चा का विषय रहा. किशोर विधानसभा में बीजेपी की तरफ से पांच साल मुख्य सचेतक की भूमिका निभा चुके हैं. यहां तक कि इन्हें मंत्री पद का दावेदार माना जाता रहा है.

लेकिन पार्टी ने इनका टिकट काट कर पुष्पा देवी को टिकट दे दिया है. ये वही पुष्पा देवी हैं जिन्हें 2005 के चुनाव में किशोर हराकर विधानसभा पहुंचे थे. उस वक्त पुष्पा देवी राजद में थीं.

पुष्पा देवी पूर्व सांसद मनोज भुइयां की पत्नी हैं. टिकट बंटवारे से करीब दो महीने पहले पुष्पा देवी बीजेपी में शामिल हुईं. पुष्पा देवी पाटन प्रखंड की सुगना पंचायत की रहने वाली हैं.

बोरियो

बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष ताला मरांडी का टिकट काट कर पार्टी ने सूर्या हांसदा पर भरोसा जताया है. सूर्या हांसदा बीजेपी के कोई पुराने कार्यकर्ता नहीं हैं, उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी ज्वाइन की थी.

अपने क्षेत्र में युवा नेता के तौर पर जाना-जाने वाले सूर्या दो बार चुनाव हार चुके हैं. दोनों बार इन्होंने जेवीएम से किस्मत आजमाया. लेकिन दोनों ही बार वो तीसरे नंबर पर रहे.

पहले और दूसरे नंबर पर ताला मरांडी और लोबिन हेम्ब्रम ही थे. देखने वाली बात होगी कि सूर्या हांसदा 2019 के चुनाव में तीसरे नंबर से पहले नंबर पर आते हैं या वहीं बने रहते हैं.

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सिंदरी

दो बार का विधायक रहे फूलचंद मंडल का टिकट काट कर इस बार बीजेपी ने इंद्रजीत महतो को चुनाव लड़ने की अनुमति दी है. इंद्रजीत महतो काफी दिनों से बीजेपी से जुड़े हुए हैं.

कहा जा रहा है कि करीब 15 साल से वे पार्टी में हैं. पार्टी में रहने के साथ वो 20 सूत्री के उपाध्यक्ष भी हैं. विधानसभा का पहला चुनावी अनुभव होगा.

घाटशिला

बीजेपी ने लक्ष्मण टुड्डू का टिकट काट कर इस बार लाखन मार्डी पर भरोसा जताया है. लाखन मार्डी इससे पहले आदिवासी छात्र संघ से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं.

ऐसा कहा जाता है कि इनकी पहुंच संघ तक है. पार्टी में अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं. साथ ही प्रदेश 20सूत्री क्रियान्वयन समिति के सदस्य भी हैं.

 

गुमला

सीटिंग एमएलए शिवशंकर उरांव का टिकट काटकर पार्टी ने मिसिर कुजूर पर भरोसा जताया है. मिसिर कुजूर 1999 में एबीवीपी से जुड़े. 2001 से 2006 तक गुमला नगर मंत्री के पद पर रहे.

2006 से 08 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के  प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में कार्य किया. 2009 से 2011 के बीच यूथ अगेंस्ट करप्शन के जिला संयोजक के पद पर रहे. 2011 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की.

2012 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति में शामिल हुए. इन्हें सदस्य के तौर पर सिमडेगा और लोहरदगा जिला का प्रभारी बनाया गया. 2017 में युवा मोर्चा गुमला के जिला अध्यक्ष रहे.

मिसिर कुजूर विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ भी जुड़े रहे. मिसिर कुजूर पहली बार विधानसभा में चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

मनिका

हरेकृष्ण सिंह का टिकट काट कर बीजेपी ने इस बार बिलकुल नये चेहरे पर प्रयोग किया है. रघुपाल सिंह को पार्टी ने टिकट दिया है. रघुपाल पोलिंग एजेंट के तौर पर बीजेपी में 1998 में जुड़े. वहीं से राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई.

2000 में पार्टी ने इन्हें पल्हैया पंचायत का अध्यक्ष बनाया. इसी साल ये पार्टी से आजीवन सहयोगी सदस्य बने. 2005 में इन्हें मनिका मंडल के उपाध्यक्ष का दायित्व मिला. 2009 से अब तक अब लातेहार जिला बीजेपी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष के पद पर बने हुए हैं.

इन्होंने प्रखंड स्तर पर सांसद प्रतिनिधि के तौर पर भी काम किया गया है. 2014 के विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रभारी थे और इस बार वो अपने लिए काम करेंगे.

सिमडेगा

विमला प्रधान की जगह उस बार पार्टी ने पूर्व विधायक निर्मल बेसरा के पुत्र सदानंद बेसरा पर भरोसा जताया है. जनसंघ के जमाने में इनके पिता तीन बार विधायक रहे हैं.

सदानंद क्षेत्र में चार सालों से सक्रिय हैं. इससे पहले किसी चुनाव में इन्होंने उम्मीदवारी नहीं की है. बीजेपी में एसटी मोर्चा के जिला महामंत्री हैं. लगातार दो बार विधायक रही विमला प्रधान की जगह इन्हें बीजेपी की तरफ से टिकट दिया गया है.

चतरा

जय प्रकाश भोक्ता का टिकट काट कर पार्टी ने जनार्दन पासवान पर भरोसा जताया है. जनार्दन पासवान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल से की. पहली बार 1995 में जनता दल के टिकट पर विधायक बने.

2000 और 2005 का चुनाव वो हार गये. 2009 में राजद से उन्होंने जीत हासिल की. 2014 में भी उन्होंने राजद से चुनाव लड़ा. लेकिन तीसरे स्थान पर रहे. 2014 में इन्हें जय प्रकाश भोक्ता ने ही करीब 31000 वोटों से हराया.

लेकिन इस बार टिकट के गेम में जनार्दन पासवान ने जय प्रकाश भोक्ता को हरा दिया. लोकसभा चुनाव से पहले अन्नपूर्णा देवी के साथ इन्होंने बीजेपी की सदस्यता ली थी.

झरिया

झरिया सीट बीजेपी के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती है. कुंती देवी के बाद 2014 में संजीव सिंह ने वहां से बाजी मारी.

लेकिन अपने चचेरे भाई की हत्या के आरोप में वो फिलहाल जेल में बंद है. बीजेपी ने संजीव की पत्नी रागिनी सिंह को चुनाव लड़ने के लिए झरिया से टिकट दिया है. लोकसभा चुनाव के दौरान इन्होंने पार्टी की सदस्यता ली.

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