पलामू की तत्कालीन डीसी पूजा सिंघल ने वर्ष 2002 के बदले 1999 के नियम का किया उल्लेख, इसी आधार पर निगरानी ने तैयार की रिपोर्ट और मुख्यमंत्री ने मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी को दी क्लीन चिट

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 03/31/2018 - 11:55

Kumar Gaurav
Ranchi:
भ्रष्टाचार के आरोपी मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी को जिस पुराने नियम का हवाला देकर बचाया गया, जिस नियम के कारण निगरानी ब्यूरो (अब एंटी करप्शन ब्यूरो) ने चंद्रवंशी पर लगे आरोप को गलत बताया, उसका उल्लेख सबसे पहले पलामू के तत्कालीन उपायुक्त ने किया. पलामू के तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल ने ही अपनी रिपोर्ट में बिहार सरकार के नियम का उल्लेख किया. जबकि वर्ष 2002 में बने नये नियम की कॉपी पलामू डीसी कार्यालय में उपलब्ध थी. निगरानी ब्यूरो ने पलामू के डीसी से विधायक फंड के इस्तेमाल के संबंध में नियम की कॉपी मांगी थी. तब पूजा सिंघल ने पलामू के पत्रांक 1025 दिनांक 5.09.2011 के द्वारा विधानमंडल सदस्यों की अनुशंसा पर ली जाने वाली विकास योजनाओं के कार्यान्वयन हेतू बिहार सरकार के पत्रांक 1212 दिनांक 1.02.99 के मार्गदर्शिका की छाया प्रति निगरानी ब्यूरो को उपलब्ध कराई थी. जबकि झारखंड गठन के बाद ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन सचिव उदय प्रताप सिंह ने नई मार्गदर्शिका पत्रांक दिनांक 18.11.2002 जारी की थी.

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पलामू की तत्कालीन डीसी पूजा सिंघल की रिपोर्ट के आधार पर निगरानी ने तैयार की रिपोर्ट

तत्कालीन पलामू डीसी रहते हुए जिस पुराने नियम का उल्लेख अपनी रिर्पोट में पूजा सिंघल ने किया, उसी को आधार बना कर पहले निगरानी ब्यूरो ने और बाद में संबंधित सभी विभागों को सचिवों ने अपनी रिपोर्ट जारी किए.  जिसके बाद आरोप को निराधार बताकर मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी को क्लीन चिट दे दी गई. अगर पलामू के डीसी रहते हुए पूजा सिंघल ने 1999 के बजाय 2002 की मार्गदर्शिका का उल्लेख किया होता, तो मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी को क्लीन चिट नहीं मिलती. और मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी पर पूर्व विधायक चंद्रशेखर दूबे द्वारा लगाए गए सभी आरोप सही साबित होते. इस तरह सरकार के अफसरों ने पुराने नियम का उल्लेख कर स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी को निगरानी जांच (पीई-44/2010) से क्लीन चिट दिलवायी है. गौरतलब है कि पूरा मामला रामचंद्र चंद्रवंशी पर निजी जमीन पर विधायक मद से 1.97 करोड़ की लागत से सड़क निर्माण का है.

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वर्ष 2002 में झारखंड सरकार ने जो नियम बनाये थे, पूजा सिंघल ने उस नियम का नहीं किया उल्लेख

मंत्री को क्लीन चिट दिलाने के लिए अफसरों (पलामू की तत्कालीन डीसी से लेकर विभाग के तत्कालीन सचिव तक) ने एकीकृत बिहार के समय विधायक योजना और मुख्यमंत्री विकास योजना की मार्गदर्शिका पत्रांक-1212 ( दिनांक - 01.02.1999) की कंडिका-5.10 का उल्लेख किया. हालांकि राज्य अलग होने के बाद ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन सचिव उदय प्रताप सिंह ने नयी मार्गदर्शिका (पत्रांक-7897 दिनांक 18.11.2002) जारी की थी. इसकी प्रति भी सभी डीसी को भेजी गयी थी. लेकिन अफसरों ने पुरानी मार्गदर्शिका का उल्लेख करते हुए विधायक मद से कराये गये कामों को नियमानुसार बता दिया. ज्ञात हो कि जून 2010 में तत्कालीन विधायक चंद्रशेखर दुबे ने शिकायत की थी कि रामचंद्र चंद्रवंशी ने निजी जमीन पर विधायक मद से 1.97 करोड़ से सड़क निर्माण कराया. कल्याण विभाग और कला-संस्कृति एवं युवा कार्य विभाग के करीब 23 करोड़ रुपये से निजी संस्थान आरसीआइटी कॉलेज में काम कराया.

पूर्व विधायक चंद्रशेखर दुबे ने की थी शिकायत    

पूर्व विधायक चंद्रशेखर दुबे की शिकायत पर सरकार ने इसकी निगरानी जांच शुरू करायी थी. जांच में पाया गया कि निजी संस्थान व जमीन पर सरकारी राशि का इस्तेमाल हुआ है,  लेकिन इसमें कुछ भी गलत नहीं है. क्योंकि पलामू के डीसी पूजा सिंघल ने जो मार्गदर्शिका  (विधानमंडल सदस्यों के फंड के इस्तेमाल को लेकर 1999 में जारी हुआ था) उपलब्ध करायी है, उसमें इसका प्रावधान है.  निगरानी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पलामू के तत्कालीन उपायुक्त की रिपोर्ट (पत्रांक-1025 दिनांक 05.09.2011) का उल्लेख किया था. इसमें उपायुक्त ने विधायक की अनुशंसा पर ली जानेवाली योजनाओं के लिए एकीकृत बिहार के समय जारी मार्गदर्शिका का उल्लेख किया था. निगरानी की रिपोर्ट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिखा था कि जांच से यह तो स्पष्ट है कि सरकारी राशि का इस्तेमाल निजी संस्थान में किया गया है. इसलिए संबंधित विभाग से इस बारे में पूछा जाये कि ऐसा नियम के अनुसार हुआ है या नहीं. इसके बाद भी ग्रामीण विकास विभाग ने एकीकृत बिहार के समय जारी मार्गदर्शिका का उल्लेख करते हुए काम को नियमानुसार बताया.

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