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#Jamshedpur : टाटा के फैसलों से छिनती गयी हजारों की रोजी-रोटी, मौन बने रहे सीएम रघुवर दास  

Abinash Mishra

Jamshedpur : 2014 में रघुवर दास ने सत्ता की बागडोर संभाली. तब से टाटा प्रबंधन ने अनेक अलोकप्रिय निर्णय लिये हैं लेकिन रघुवर दास मौन रहे हैं.

रघुवर के गृह नगर जमशेदपुर में टाटा प्रबंधन अपनी कंपनियां बंद कर रहा है, बेच रहा है या फिर दूसरे राज्यों में शिफ्ट कर रहा है. शहर के हजारों लोगों पर इसका असर पड़ा है. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 11,000 लोगों का रोजगार छिन गया है. कई बेघर हो गये हैं सो अलग.

मंदी के दौर में इन बेरोजगार कर्मचारियों के सामने भीख मांगने की नौबत है. लेकिन सीएम हों, विभागीय मंत्री हों या विपक्ष, सब चुप-चाप तमाशा देख रहे हैं.

जमशेदपुर के मीडिया ने भी इन खबरों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

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बिक गयी नैटस्टील

टाटा स्टील ने होल्डिंग कंपनी नैटस्टील को बेच दिया है. वियतनाम की एक ट्रेडिंग कंपनी के साथ टाटा प्रबंधन का सौदा हो गया है.

वियतनाम की थाई हंग ज्वाइंट स्टॉक कंपनी 36 करोड़ रुपये में नैटस्टील को खरीद लिया है. उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते के आखिर तक नैटस्टील का मालिकाना हक वियतनाम की कंपनी के नाम ट्रांसफर भी हो जायेगा.

प्रंबधन कागजी प्रक्रिया को जल्द पूरा करने में जुटा है. वियतनाम की कंपनी के अनुसार नैटस्टील के सारे ऑपरेशन बंद कर कंपनी को वियतनाम ले जाने की योजना है.

बंद पड़ी है टाटा टायो

2016 से बंद पड़ी टायो रोल्स तो सीएम के विधानसभा क्षेत्र में ही आती है. टायो कर्मचारी संघ टायो के लिए हाइकोर्ट में टाटा प्रबंधन से लड़ रहा है.

केस की सुनवाई के दौरान झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या सरकार टायो का अधिग्रहण कर सकती है. सरकार ने जवाब नहीं सौपा है.

कर्मचारी संघ ने झारखंड हाइकोर्ट से अपील की है रि टायो रोल्स को किसी ऐसी कंपनी को दिया जाये जो इसे चला सके.

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शिफ्ट हो गयी टाटा हिताची

बीते एक साल से धीरे-धीरे टाटा हिताची खड़गपुर शिफ्ट हो रही है. पहले डिवीजन और विभागवार अपने 5000 से अधिक कर्मचारियों को शिफ्ट किया. कर्मचारियों के बाद अब मशीनरी भी शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है जो 2020 के पहली छमाही तक पूरी कर ली जायेगी.

सवाल यही है कि एक तरफ उद्योगों को निवेश के लिए आकर्षित करने के लिए सरकार बड़े से बड़ा आयोजन करती है लेकिन दूसरी तरफ राज्य में चल रहे उद्योग शिफ्ट हो रहे हैं.

क्या कर सकती थी सरकार

आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि ये निजी कंपनी का निजी फैसला है. इसमें सरकार क्या कर सकती है? पर ऐसा नहीं है.

सरकार चाहे तो बंद कंपनियों का अधिग्रहण कर सकती है. अपने राज्य के बड़े उद्योगपतियों के सामने कंपनी को पीपीपी मोड पर चलाने की पेशकश रख सकती है.

कर्ज और राहत पैकेज जैसे कई और उपाय हैं जिसके जरिये सरकार बंद कंपनी को फिर से शुरू करने में सहयोग कर सकती है.

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