पाकुड़ मनरेगा घोटालाः डीसी के आदेश के बाद भी बीडीओ और दूसरे अधिकारियों पर नहीं हुई कार्रवाई, कमजोरों पर ही चला प्रशासन का डंडा

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/06/2018 - 17:16

Akshay Kumar Jha

Ranchi/Pakur: मनरेगा का नाम महात्मा गांधी के नाम से जोड़ा गया है. लेकिन  हकीकत ये है कि ये योजना घोटाला और घोटाले के बाद कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की रह गयी है. हमेशा की तरह इस योजना के घोटाले में भी गला कमजोरों का ही घोंटा जाता है. पाकुर के अमड़ापाड़ा प्रखंड में कुछ ऐसा हो रहा है, जिससे मनरेगा एक्ट पर ही सवाल उठ रहे हैं. पहुंच और पैरवी हो तो घोटाला करो सब मैनेज हो जायेगा, और अगर पहुंच और पैरवी नहीं है तो कोप का भाजन बनने के लिए तैयार रहो.

डीसी ने दिया कार्रवाई का आदेश डीडीसी ने दबायी फाइल

वित्त वर्ष 2009-10 में पाकुड़ के अमड़ापाड़ा प्रखंड में 12 मनरेगा योजनाओं में फर्जीवाड़े की खबर आम हुई. जांच के दौरान कई अधिकारी और कर्मी दोषी साबित हुए. लेकिन कार्रवाई सिर्फ तीन लोगों पर ही हुई. क्योंकि मामले में तीन बीडीओ समेत दूसरे अधिकारी भी फंस रहे हैं. मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पंचायत सचिव जाकिर हुसैन को निलंबित कर दिया वहीं रोजगार सेवक सतेंद्र कुमार और बीपीओ गोपाल गौतम के संविदा को रद्द कर दिया. तत्कालीन डीडीसी अजीत शंकर ने 23 अगस्त 2017 को डीसी को बीपीओ गोपाल गौतम की संचिका रद्द करने की संचिका बढ़ाई, जिसके बाद डीसी दिलीप कुमार झा ने संचिका रदद् करने का निर्देश दिया. जिस संचिका में बीपीओ गोपाल गौतम पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था, उसी संचिका में डीसी ने डीडीसी को इस मामले में सभी दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई ना करने की वजह का कारण भी पूछा. बात पांच महीने पुरानी है. लेकिन किसी तरह की कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हो पायी है.

इसे भी पढ़ें - सीएस राजबाला वर्मा और एपी सिंह पर पूजा सिंघल को बचाने के आरोप के बाद पीएमओ ने कार्रवाई के लिए लिखी झारखंड सरकार को चिट्ठी

जिस पर हुई कार्रवाई उसी ने मामला पहुंचाया हाईकोर्ट और पीएमओ में

मामले पर कार्रवाई के लिए पीएमओ में शिकायत दर्ज करायी गयी है. वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट में भी मामला लंबित है. शिकायत दर्ज कराने वाला और हाईकोर्ट जाने वाला और कोई नहीं बल्कि वो ही बीपीओ है, जिसपर कार्रवाई हुई है. बीपीओ गोपाल गौतम ने पीएमओ में शिकायत दर्ज की है. शिकायत में कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी लोगों पर कार्रवाई हो. दरअसल जिस योजना में श्री गौतम पर कार्रवाई हुई है, उस योजना के शुरूआत के वक्त वो पाकुड़ के अमड़ापाड़ा में पदस्थापित थे ही नहीं. योजना की शुरूआत एक जनवरी 2011 को हुई. श्री गौतम ने योगदान मार्च 2013 को दिया. जब उन्होंने योगदान दिया तब तक योजना के लिए करीब 8.5 लाख रुपए निकाले जा चुके थे. इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट में पीआईएल किया है. सुनवाई लंबित हैं.

इसे भी पढ़ें - कौन है रवि केजरीवाल ? क्यों लेते हैं सब इसका नाम ? कितनी और कैसी कंपनियों का है वह मालिक ? जानिए केजरीवाल एसोसिएट्स की पूरी कहानी

तीन बीडीओ पर गिर सकती है गाज

मामले में तीन बीडीओ के फंसने की बात है. जिस बीपीओ गोपाल गौतम पर कार्रवाई हुई है, वो योजना के शुरुआत के वक्त पाकुड़ में कार्यरत था ही नहीं. फिर भी जांच में उसे दोषी पाया गया और उस पर कार्रवाई हुई. इस योजना के वक्त तीन-तीन बीडीओ ने अपनी सेवा अमड़ापाड़ा प्रखंड में दी. डीसी ने इन सभी बीडीओ पर भी कार्रवाई के लिए लिखा है. योजना के शुरू होने वक्त वहां के बीडीओ रोशन शाह थे, जो अभी पाकुड़ के बीडीओ हैं. इसके बाद कुछ दिनों के लिए वहां राम उरांव बीडीओ बन कर आये. इनके बाद ज्ञानेंद्र कुमार ने बीडीओ का कार्यभार संभाला, जो अभी दुमका जिले के रानेश्वर प्रखंड के बीडीओ हैं. डीसी ने डीडीसी को लिखे पत्र में इन सभी पर भी कार्रवाई करने को लिखा है. लेकिन अभी तक किसी तरह की कोई कार्रवाई इनपर नहीं हुई है.

इसे भी पढ़ें - हमें नहीं चाहिए नया भारत, लौटा दो मेरा पुराना भारत, जहां लोगों में डर व खौफ न हो : गुलाम नबी आजाद

सीएम जनसंवाद में शिकायतकर्ता से बिना बात किए बंद कर दी गयी शिकायत

पाकुड़ जिला के मामले में देवघर निवासी गोपाल गौतम ने मनरेगा योजना में हुई गड़बड़ियों को लेकर मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत करना चाहते थे. पहली बार उन्होंने अपनी शिकायत हिंदी भाषा में की. लेकिन उन्होंने इसकी टाइपिंग अंग्रेजी में कर दी. इसपर जनसंवाद से इनके पास फोन आया और मामले को हिंदी में टाइप कर भेजने को कहा गया. वहीं कहा गया कि उन्होंने शिकायत के एवज में किसी तरह के कोई साक्ष्य नहीं लगाये हैं. जबकि साक्ष्य के रूप में आरटीआई से निकाले गये कई दस्तावेज अपलोड किए गए थे. फिर भी इन दोनों को आधार बनाते हुए शिकायत बंद कर दी गयी. दूसरी बार गोपाल ने फिर से शिकायत दर्ज करायी. इस बार शिकायत हिंदी में टाइप कर की गयी. साक्ष्य भी लगाये गये. दूसरी बार किसी तरह का कोई कॉल गोपाल के पास नहीं आया. लेकिन एक्शन टेकन बाय अफसर वाले कॉलम में लिखा गया कि शिकायतकर्ता से बात होने के बाद शिकायत बंद की जा रही है. तीसरी बार फिर से मनरेगा में हुई गड़बड़ को लेकर गोपाल ने शिकायकत की. सारे साक्ष्य भी लगाये गये. लेकिन तीसरी बार भी एक्शन टेकन बाय अफसर वाले कॉलम में लिखा गया कि शिकायतकर्ता से बात होने के बाद शिकायत बंद की जा रही है और शिकायत बंद कर दी गयी.   

 इसे भी पढ़ें - मोदी की रैली स्थान पर छात्रों ने स्कॉलर गाउन पहनकर बेचा पकौड़ा

क्या की थी गोपाल ने शिकायत

झारखंड के पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड में वित्तवर्ष 2009-10 और 2010-11 में मनरेगा के तहत 12 योजनाओं में जांच के बाद कार्रवाई लंबित है. पाकुड़ के एक पत्रकार कार्तिक रजक प्रशासन और समाज में अपने अखबार के माध्यम से गलत भ्रम फैला रहे हैं. क्योंकि उपायुक्त पाकुड़ ने कार्रवाई से संबंधित संचिका में प्रखंड विकास पदाधिकारी रोशन शाह से लेकर रोजगार सेवक तक अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई है, डीडीसी पाकुड़ से पूछा है. जिसका खुलासा एक आरटीआई से हुआ है. इस मामले में सभी दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये. साथ ही समाज और प्रशासन में गलत खबर फैलाने वाले पत्रकार को भी दंडित किया जाये.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

7ocean

 

international public school

 

TOP STORY

भूमि अधिग्रहण पर आजसू का झामुमो पर बड़ा हमला, मांगा पांच सवालों का जवाब

सूचना आयोग में अब वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी सुनवाई, मोबाइल ऐप से पेश कर सकते हैं दस्तावेज

झारखंड को उद्योगपतियों के हाथों में गिरवी रखने की कोशिश है संशोधित बिल  :  हेमंत सोरेन

जम्मू-कश्मीर : रविवार से आतंकियों व अलगाववादियों के खिलाफ शुरु हो सकता है बड़ा अभियान

उरीमारी रोजगार कमिटी की दबंगई, महिला के साथ की मारपीट व छेड़खानी, पांच हजार नगद भी ले गए

विपक्ष सहित छोटे राजनीतिक दलों को समाप्त करना चाहती है केंद्र सरकार : आप

बॉडी गार्ड की चाहत में जिप अध्यक्ष ने खुद पर करवायी फायरिंग, पकड़े गए अपराधियों ने किया खुलासा

गोड्डा मॉब लिंचिंग : सांसद निशिकांत ने कहा प्रशासन ने सही किया या गलत पता नहीं, लेकिन केस लड़ने के लिए आरोपियों की करेंगे मदद

समय पर बिजली बिल नहीं मिला तो लगेगा 420 वोल्ट का झटका, जेबीवीएनएल को नहीं कोई फिकर

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन पर मानवाधिकार परिषद लेगी फैसला : यूएन 

शुजात बुखारी को उनके पैतृक गांव में दफनाया गया, जनाजा में बड़ी संख्या में उमड़ी थी भीड़