बिजली टैरिफ की दर तय करने में की जा रही है नियमों की अनदेखी

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/06/2018 - 18:04

Ranchi : झारखंड में लगातार बिजली की दरें बढ़ती जा रही हैं. एक बार फिर राज्‍य में लोगों को जोरों का झटका देने की तैयारी की जा रही है. बिजली कंपनियों का कहना है कि उन्‍हें बिजली महंगी दर में खरीदना पड़ रहा है, इसलिए अब बिजली की टैरिफ में बढ़ोतरी की जायेगी. वहीं दूसरी ओर सोलर पावर से जुड़ी झारखंड सरकार का उपक्रम जेरेडा नियमों की अनदेखी कर सस्‍ती बिजली खरीदने के प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया है और खास कंपनियों को लाभ पहुंचाने के मकसद से महंगी बिजली दर देने वाली कंपनियों को मंजूरी दे दी. इसमें झारखंड सरकार के आला अधिकारियों की बड़ी भूमिका भी रही.

राज्‍य में बिजली की दरों को नियंत्रित करने के लिए ही झारखंड राज्‍य विद्युत नियामक आयोग बनी हुई है. इसके लिए आयोग ने इलेक्ट्रिसिटी एक्‍ट 2003 के मुताबिक विद्युत नियामक आयोग ने पॉलिसी भी बनाया है. लेकिन बिजली की दर तय करने में कभी इसका पालन नहीं किया गया. पॉलिसी के सेक्‍शन 62 और 63 के मुताबिक बिजली के तीन भागों में दर तय होता है, पहला उत्‍पादन, दूसरा संचारन और तीसरा वितरण में.

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सस्‍ती बिजली का प्रस्‍ताव ठुकरा कर महंगी में खरीदी जा रही है बिजली

एनटीपीसी ने जेवीएनल को पत्र लिखा था कि हम आपको सोलर एनर्जी 3 रुपये प्रति यूनिट देने को तैयार हैं. लेकिन जेरेडा ने कुछ खास कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर में 4.95 के रेट को फाइनल कर दिया. इस रेट के अप्रूवल के लिए सीधे कैबिनेट में भेज दिया गया और कैबिनेट में इसे तब आनन-फानन में पास कर दिया. लेकिन कानून में ऐसा कहीं भी प्रावधान नहीं है कि कोई भी रेट तय करे. बिजली दरों को तय करने के लिए बने दिशा-निर्देश के दस्‍तावेजों में यह स्‍पष्‍ट है कि नियामक आयोग को बिजली की दर तय करनी है.

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साल के शुरू में ही कोई भी लाइसेंसधारी कंपनी 30 नवंबर के पहले नियामक आयोग को एक आवनेदन देता है. इस आवेदन में वह बताता है कि किस दर पर कितनी बिजली वह खरीदेगा. उत्‍पादक का भी दर नियामक आयोग तय करता है. इसी तरह संचारन कंपनी नियामक आयोग के पास आते हैं. संचारन कंपनियां भी नियामक आयोग तय करती हैं. नियामक आयोग यह देखता है कि सबसे सस्‍ती बिजली कहां है. वह मेरिट ऑर्डर डिस्‍पैच के तहत चयन होता है. लेकिन साल 2017 से पहले झारखंड में कभी इन नियमों का पालन नहीं किया गया. आवेदक कंपनियां इस पर कभी गंभीर नहीं दिखीं. यह प्रक्रिया सेक्‍शन 62 के अंतर्गत होती है. सेक्‍शन 63 में बिडिंग प्रोसेस से बिजली दर तय होती है. इसमें बोली लगाई जाती है, जिस कंपनी की बोली सबसे कम वाले को दिया जाता है.

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