हजारीबाग के बड़कागांव में हुए 3000 करोड़ के मुआवजा घोटाले की सीबीआई जांच शुरु

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 02/08/2018 - 15:00

 सीबीआई, रांची ने एनटीपीसी के अफसरों के खिलाफ पीई (preliminary enquiry) दर्ज कर शुरु कर दी है जांच
रिटायर आईएएस देवाशीष गुप्ता की रिपोर्ट पर रघुवर सरकार ने नहीं की थी कोई कार्रवाई.
Surjit singh
Ranchi :
हजारीबाग के बड़कागांव की पकरी-बरवाडीह कोयला खनन परियोजना के लिए हुए 3000 एकड़ जमीन मुआवजा घोटाले की सीबीआई जांच शुरु हो गयी है. आरोप है कि सरकार और एनटीपीसी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने फर्जी जमाबंदी के आधार पर 300 करोड़ का मुआवजा बांट दिया. मामले की शिकायत मिलने पर रघुवर सरकार ने रिटायर आईएएस देवाशीष गुप्ता से जांच करायी थी. जांच में उन्होंने आशंका जतायी थी कि बड़कागांव का मुआवजा घोटाला 3000 करोड़ रुपये से अधिक का है. इस मामले में रांची सीबीआई ने पीई दर्ज करते हुए जांच शुरु की है. सूत्रों के मुताबिक अभी नेशनल पावर थर्मल कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) के अधिकारियों के खिलाफ पीई दर्ज की गयी है, लेकिन जांच का दायरा राज्य सरकार के सीनियर आईएएस अफसरों से लेकर हजारीबाग के बड़कागांव अंचल के कर्मचारी तक पहुंचने की आशंका है.     

फर्जी कब्जा दिखा कर कर दिया 300 करोड़ का भुगतान
जानकारी के मुताबिक हजारीबाग के पकरी-बरवाडीह में 3000 एकड़ सरकारी जमीन पर अलग-अलग लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपना कब्जा दिखा दिया था. जिसके आधार पर 300 करोड़ रुपये के मुआवजा का भुगतान कर दिया गया. मुआवजा के भुगतान में फर्जीवाड़ा की भनक लगने के बाद हजारीबाग के तत्कालीन डीसी मुकेश कुमार ने 13 फरवरी 2016 को पकरी-बरवाडीह में अवैध जमाबंदी कर दखल कब्जा दिखाने की शिकायत सरकार से की थी. डीसी ने पूरे मामले की जांच एसीबी या एसआइटी से कराने की अनुशंसा की थी. इसके बाद सरकार ने 24 फरवरी 2016 को सेवानिवृत्त आईएएस देवाशीष गुप्ता को मामले की जांच की जिम्मेदारी दी.

राज्य सरकार ने राजस्व नियमों के विपरित जारी किए आदेश
देवाशीष गुप्ता ने सरकार को जो रिपोर्ट दी, उसमें कहा गया है कि 3000 एकड़ सरकारी जमीन पर अलग-अलग लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर कब्जा दिखाकर मुआवजा लिया. इसके साथ ही देवाशीष गुप्ता ने सरकार से अनुशंसा की थी कि सरकार उन आदेशों को वापस ले, जो राजस्व नियमों के विपरित जारी किये गये थे. रिपोर्ट के मुताबिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि घने जंगल के बीच में स्थित खासमहल की जमीन को भी बंदोबस्त दिखा दिया गया है.

जांच में पता चला कुछ परिवारों के पास सिर्फ 20 स्क्वायर फीट जमीन

 जमीन अधिग्रहण के कागजात के विश्लेषण से यह भी खुलासा हुआ था कि 112 लोगों के पास औसतन 1.75 एकड़ जमीन थी. 163 लोगों के पास औसतन .50 से 1.00 एकड़ जमीन थी. 2000 लोगों के पास कुल 40.06 एकड़ जमीन थी. इस तरह 2000 लोगों में हर व्यक्ति के पास औसतन दो डिसमिल जमीन थी. यह किसी परिवार के लिए किसी भी कीमत पर पर्याप्त नहीं है. देवाशीष गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की आशंका जतायी थी कि पहले चरण के भुगतान के बाद यह नये आंकड़े उभर कर सामने आये हैं. जांच में कुछ किसान ऐसे भी मिले, जिनके पास महज 20 स्क्वायर फीट जमीन थी. इस तरह यह मामला पूरी तरह संदेहास्पद है.  

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एसआईटी ने मुआवजा घोटाले में जो गड़बड़ी पकड़ी थीः-
-    फर्जी दस्तावेज के सहारे 3000 एकड़ जमीन की जमाबंदी करा कर मुआवजा दिया गया.
-    सरकार ने जमीन अधिग्रहण की दर 10 लाख रुपये प्रति एकड़ तय की थी.
-    सरकार के स्तर पर कोई आदमी इस स्थिति में नहीं है, जो यह बता सके कि जमीन के संबंध में रजिस्टर में जो इंट्री की गयी है, वह सही है या नहीं.
-    रजिस्टर- दो में सिर्फ जमींदारी के सामान्य कागजात के आधार पर नाम की इंट्री कर ली गयी. बहुत सारी जमीन, जो खतियान में जंगल-झाड़ी के रुप में दर्ज है, उसे भी लोगों ने अपने नाम पर दिखा दिया.
-    बिना सक्षम पदाधिकारी के स्थानीय स्तर की बैठक में भी गैर रैयतों को सहायता देने का फैसला लिया गया, जो नियमविरुद्ध है.
-    जंगल में खास महल की जमीन की बंदोबस्ती संदेहास्पद है.
-    सरकार के स्तर पर नियमों का उल्लंघन करते हुए कई कार्यपालक आदेश जारी किये गये.
-    इस बात का कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है कि अगर वित्तीय गड़बड़ी हुई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा.
-    क्षेत्र में आम धारणा है कि एनटीपीसी ने पकरी-बरवाडीह के मामले में नियम-कानून को छोड़कर हर चीज पैसे के सहारे हासिल करने की कोशिश की.

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हजारीबाग के तत्कालीन डीसी मुकेश कुमार की रिपोर्ट के अंशः-
-    पकरी-बरवाडीह कोयला खनन परियोजना के लिये अधिग्रहित गैर मजरुआ जमीन का मुआवजा प्राप्त करने के लिये अवैध जमाबंदी कर दखल-कब्जा दिखाया गया.
-    ग्राम लंगातु में सक्षम पदाधिकारी की जांच के बिना जमाबंदी कायम कर रसीद निर्गत की गयी, जबकि भूमि पर उन व्यक्तियों का दखल-कब्जा था, जोत-कब्जा नहीं था.
-    जांच के दौरान लंगातु गांव के ग्रामीणों ने टंडवा के व्यक्तियों के नाम जमाबंदी कायम कर दखल-कब्जा दिखाने को गलत बताया है.
-    जिन गैर मजरुआ जमीन के अधिग्रहण का मुआवजा लिया गया, भौतिक सत्यापन के दौरान उसमें से ज्यादातर मामले में संबंधित व्यक्तियों का कोई दखल-कब्जा या जोत-आबाद नहीं पाया गया.

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