झारखंड की वो पहली लेडी मुखिया जिसे बीजेपी ज्वाइन करते ही मिला बॉडीगार्ड

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/20/2018 - 13:33

Akshay Kumar Jha

Ranchi: डीपीएस फरक्का से स्कूलिंग, रांची के कैरैली स्कूल से प्लस टू, संत जेवियर स्कूल से बायो-टेक में ग्रेजुएशन, दिल्ली के जामिया मीलिया युनिवर्सिटी से बायो-टेकनॉलिजी में पीजी और इसके बाद एम्स में सेलेक्शन. एम्स में महीनों कैंसर पर रिसर्च करने के बाद वापस हमेशा के लिए झारखंड लौट जाना. वो भी पाकुड़ जैसे जिले में, जो विकास के हर पायदान पर नीचे से अव्वल है. यहां आने के बाद पंचायत चुनाव में मुखिया के लिए उम्मीदवार बनने का फैसला करना. चुनाव जीत जाना. चुनाव जीत जाने के बाद बीजेपी में शामिल होना. बीजेपी में शामिल होते ही एक मुखिया को बॉडीगार्ड मिल जाना. है ना एक बेहतरीन सोच और शुरुआत. कम समय में इन्होंने इतनी ख्याती पायी है, कि सभा में इन्हें देखने और सुनने के लिये भीड़ जमा हो जाती है. सालों से राजनीति कर रहे नेताओं की पाकुड़ में अगर किसी ने नींद हराम कर दी है, तो वो हैं इलामी पंचायत की मुखिया मिसफिका.

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जनता चाहती है कि मैं सुरक्षित रहूं, इसलिए प्रशासन ने दिया बॉडीगार्ड

मुखिया मिसफिका
मुखिया मिसफिका

पाकुड़ जिले की इलामी पंचायत की मुखिया मिसफिका ने न्यूज विंग से बात की. उन्होंने कहा कि मैं जब यहां की मुखिया चुनकर आयी तो यहां के दो वार्ड में आजादी के बाद से बिजली तक नहीं आयी थी. मेरे प्रयास से दोनों वार्डों में बिजली आयी. कहा आज भी यहां पिछड़ापन हद से ज्यादा है. शिक्षा और जागरुकता की कमी है. तोड़ाई नदी से हर साल बाढ़ आ जाता है. मैंने यहां बाढ़ से बचने के उपायों पर काम किया है. गार्डवॉल बनाकर नदी और तट दोनों को सुरक्षित करने का काम किया. सिंचाई व्यवस्था पर काम कर रही हूं. जहां जाती हूं, जनता का बेशुमार प्यार मिलता है. 2017 अप्रैल महीने में बीजेपी ज्वाइन करने के बाद तो और भी प्यार मिल रहा है. जनता चाहती है कि मैं सुरक्षित रहूं. इसलिए प्रशासन की तरफ से बॉडीगार्ड दिया गया है.

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मुखिया मिसफिका
मुखिया मिसफिका
एक महीने के लिए ही दिया गया था बॉडीगार्ड: एसपी

पाकुड़ एसपी शैलेंद्र कुमार बर्णवाल ने कहाः दरअसल उनकी सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन की तरफ से उन्हें बॉडीगार्ड मुहैया कराया गया था. महिला मुखिया क्षेत्र में काफी सक्रिय रहती हैं. पूरा इलाका पीएफआई का है. कुछ एक्टिविटी थी, उसके मद्देनजर उन्हें बॉडीगार्ड मुहैया कराया गया था. इसे और किसी तरह से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

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21 जनवरी 2015 को प्रभात खबर के पहले पन्ने पर छपी खबर
21 जनवरी 2015 को प्रभात खबर के पहले पन्ने पर छपी खबर

मुख्यमंत्री बनने के बाद रघुवर दास ने कहा था चिरकुट नेताओं को  कैसे मिल जाता है बॉडीगार्ड

सूबे की कमान संभालते ही झारखंड के मुखिया रघुवर दास ने 20 जनवरी 2015 को एक समीक्षा बैठक की थी. बैठक में सभी जिले से एसपी और डीसी को ऑनलाइन जोड़ा गया था. बैठक को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा था कि थानों की अधिसूचना क्यों नहीं हो पायी. चिरकुट नेताओं को बॉडीगार्ड कैसे मिल जाता है. इसकी समीक्षा करें. जिसका सीएम या डीजीपी से संबंध होता है, उसे बॉडीगार्ड मिल जाता है. लोग बॉडीगार्ड लेकर दबंगई करते हैं. ऐसा हरगिज नहीं होना चाहिए. इस बात का ख्याल प्रशासनिक अधिकारियों को रखना है.

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मुखिया मिसफिका
मुखिया मिसफिका

अधिकारी ही बताएं क्या सोच कर दिया बॉडीगार्डः विधायक

पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक आलमगीर आलम ने कहा कि एक पंचायत के मुखिया को क्या सोच कर अंगरक्षक दिया गया है, यह समझ के परे है. किसे बॉडीगार्ड मिले और किसे नहीं, ये सोचना पुलिस प्रशासन का काम है. ऐसे में अधिकारियों को जवाब देना चाहिए कि आखिर मुखिया पर किस तरह का खतरा है. पाकुड़ ना तो नक्सल प्रभावित क्षेत्र है और ना ही कोई ऐसा हादसा यहां हुआ है, जिसके बाद मुखिया को बॉडीगार्ड मिलने लगे. इसके पीछे बीजेपी की साजिश है. वो ऐसा करके अल्पसंख्यकों के वोट को लुभाना चाहती है.        

 

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चंद सवाल

मुखिया मिसफिका
मुखिया मिसफिका

पाकुड़ जिले के इलामी पंचायत की मुखिया मिशफिका क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं. पढ़े-लिखे होने का क्षेत्र को उनसे काफी फायदा हो रहा है. क्षेत्र में काफी लोकप्रिय भी हैं. लेकिन सवाल यह कि क्या राज्य में कोई और मुखिया है ही नहीं, जो अच्छा काम कर रहा हो. नक्सल क्षेत्र के जिलों के किसी भी मुखिया को बॉडीगार्ड नहीं मिला है. ऐसे में सवाल यह कि किसी ऐसी पार्टी से जुड़ जाने का फायदा मिशफिका को मिला जो सत्ता में हो. मामले पर न्यूज विंग ने कई मुखिया से प्रतिक्रिया ली, किसी ने एक मुखिया को बॉडीगार्ड देना जायज नहीं ठहराया.

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सुनिए कैसे जनता सुनती है लेडी मुखिया मिसफिका को

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