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नक्‍सली सभा में पाकिस्‍तानी आतंकी, सुरक्षा एजेंसियों में हडकंप

रायपुर. बस्तर की सीमा से लगे उड़ीसा के तुलसीडोंगरी इलाके में हुई नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी की बैठक में पाकिस्तान समर्थित उग्रवादी संगठन लश्करे तैयबा के दो सदस्यों के शामिल होने की सूचना से खलबली मची हुई है। राज्य पुलिस से लेकर आईबी तक इस गठजोड़ का पता लगाने में जुट गई है।

अबूझमाड़ के बाद तुलसीडोंगरी नक्सलियों के नए बेस के रूप में सामने आया है। वहां नक्सलियों ने स्थायी ट्रेनिंग कैंप भी शुरू कर दिया है। सेंट्रल कमेटी नक्सलियों की नीति निर्धारक इकाई होती है। फिलीपींस, नेपाल, लैटिन अमरीकी देशों के प्रतिनिधि भी इस तरह की बैठकों में शामिल होते रहे हैं। सीपीआई माओवादी के महासचिव गणपति के अलावा बैठक में सेंट्रल कमेटी के देशभर से आए 24 से ज्यादा सदस्य शामिल हुए। खुफिया एजेंसियां अब तक यह पता नहीं लगा पाई हैं कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई। लश्कर के दो सदस्यों की मौजूदगी की वजह भी पता नहीं चल पा रही है।

नेपाल में हुए दो ट्रेनिंग कैंप

इस बैठक के कुछ दिनों बाद ही नेपाल में सक्रिय माओवादियों की मिलिटरी विंग नेपाली पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भारत-नेपाल सीमा पर एक ट्रेनिंग कैंप आयोजित किया था। इसमें भी लश्कर के दो सदस्यों को प्रशिक्षक के रूप में बुलाया गया था। यह पता लगाया जा रहा है कि तुलसीडोंगरी की बैठक में आए लश्कर के लोग ही तो कहीं नेपाल में ट्रेनिंग देने नहीं गए थे। छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा के करीब 200 नक्सली नेता इसमें शामिल हुए थे।

तुलसीडोंगरी क्यों

अबूझमाड़ की तुलना में तुलसीडोंगरी नक्सलियों के लिए कहीं ज्यादा उपयुक्त है। अबूझमाड़ में अंदर तक जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना होता था। आने-जाने वाले लोग कम होते हैं, इसलिए पहचाने या पकड़े जाने का खतरा भी ज्यादा हो गया था। इसके उलट उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में स्थित तुलसीडोंगरी इलाका नेशनल हाईवे समेत कई सड़कों से ज्यादा दूर नहीं है। जंगल के रास्तों से होते हुए इन पहाड़ियों पर जाना कठिन नहीं है। छोटे ग्रुप में नक्सलियों के नेताओं को यहां आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होती।

पुलिस के पास थी सूचना

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने गत चार मई को राज्य पुलिस को लिखित सूचना दी थी कि 1027 मीटर ऊंची तुलसीडोंगरी पहाड़ी पर 70 से ज्यादा नक्सलियों ने मोर्चेबंदी कर ली है। पहाड़ी की तरफ जाने वाले तीनों रास्तों में जगह-जगह बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें बिछा दी गई हैं, ताकि पुलिस या सुरक्षा बलों के जवान अचानक उन पर हमला नहीं कर पाएं।

नक्सलियों का विदेशी लिंक

-नेपाल के माओवादियों को शुरुआत में बिहार में सक्रिय नक्सली संगठन एमसीसी (माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर) के सदस्यों ने प्रशिक्षण दिया था। -बिना हथियारों के लड़ाई की ट्रेनिंग देने फिलीपींस से माओवादियों को बस्तर बुलाया गया था। -बारूदी सुरंगों को तैयार करने की ट्रेनिंग नक्सलियों ने श्रीलंका के उग्रवादी संगठन लिट्टे से ली है। -म्यांमार, बंगलादेश के अलावा उत्तर-पूर्वी राज्यों के उग्रवादी संगठनों से हथियार, गोलियां लेने की कोशिश कर रहे नक्सली।

‘सूचना मिली है’

तुलसीडोंगरी में हुई सेंट्रल कमेटी की मीटिंग में लश्कर के दो सदस्यों के शामिल होने की सूचना है। नक्सलियों के साथ उनका गठजोड़ क्या है, पता नहीं चला है। इस तरह की बैठकों में विदेशी माओवादी पहले भी आते रहे हैं। - विश्वरंजन, डीजीपी छत्तीसगढ़

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