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सोरेन होटल से आती है सौहार्द की सौंधी सुगंध

Md. Asghar Khan

Ranchi, 18 September: धर्म-जाती के घोर जंजाल में फंसा समाज अक्सर भूल जाता है कि धार्मिक उन्माद भगवान ने नहीं, हमलोगों ने बनाया है. भय का भयानक महौल ऐसा बनता है कि लोग अपने पूर्वजों से मिली वर्षों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब को पल भर में भूला बैठते हैं. वहां मत बसो, उस स्थान पर करोबार मत करना या वह मुस्लिम इलाका है, वहां हिंदू आबादी है..., धर्म के नाम पर समाज को बांटने वाली ऐसी ढेरों आवाजें सुनाई देने लगती हैं.

मस्जिद के बगल में 40 सालों से सुरेंद्र चला रहें हैं होटल

 मशहुर शायर ‘मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम, वतन है हिंदुस्तान हमारा’ की इस पांक्ति को जाफरिया मस्जिद के बगल में बसे सोरेन होटल की दिवारों पर चस्पी तस्वीरें चार्रितार्थ करती हैं. और होटल मालिक सुरेंद्र की सोच इस तस्वीर को बल देती है. 1975 से रांची के विक्रांत चौक पर स्थित जाफरिया मस्जिद से सटे सुरेंद्र प्रसाद गुप्ता चहु ओर मुस्लिम बहुल्य इलाके में बिना किसी भय के होटल चला रहे हैं.

सोरेन होटल की दिवारों पर चस्पी हैं सभी धर्मों के ईष्ट की तस्वीरें

40 सालों से सोरेन होटल समाज में सौहार्द की सौंधी सुगंध फैला रहा है, जहां अफवाहों पर लोग उग्र हो बैठते हैं, वहां जहां असमाजिक तत्व के लोग खुन-खराबे पर उतारू हो जाते हों. लेकिन वहीं एक अनोखी तस्वीर सभी धर्मों के विश्वास को जीवंत  कर देती है. सोरेने होटल की दिवार पर एक साथ शंकर भगवान, काबा शरीफ, इसा मसीह और गुरुगोविंद के चित्र चस्पा हैं. यही वजह है कि होटल में बिकने वाली मिठाईयां सर्वधर्म कौमी एकता की मिठास देती है. सुरेंद्र बताते हैं कि उनका सभी धर्मों के प्रति एक समान अस्था और विश्वास है. इसलिए सुबह भोलेनाथ, अल्लाह, वाहे गुरु, यीशु के नाम से ही दुकान खोलता हूं.

दुकान चलाने का फंडा तो नहीं!

यह पूछने पर कि क्यों नहीं इसे दुकान चलाने का एक फंडा समझा जाए?, सुरेंद जवाब देते हैं कि ऐसा ही करना होता तो राजनीतिक दल में होता. और अगर भय होता तो यहां से कब का भाग गया होता. वह कहते हैं 40 वर्षों में कई बार माहौल खराब होते देखा, लेकिन डटा रहा 60 वर्षीय सुरेंद्र बहुत ही बोल्ड होकर कहते हैं कि चार दशक में सांप्रदायिक सहौर्द को कई बार बिगड़ते देखा है. लोगों को उत्पात मचाते भी देखा, लेकिन यहां से मैं कभी नहीं भागा. बल्कि भगवान पर पूरी आस्था के साथ डटा रहा. आज मेरी दुकान पर सभी समुदायों के लोग मिठाई, सिंघाड़ा खाने और चाय पीने आते हैं. जिनमें सबसे अधिक मुस्लिम भाई होते हैं.      

सोरेने होटल हिंदु-मुस्लिम भाईचारगी का प्रतीक है: मौलाना तहजीबुल

विक्रांत चौक पर स्थित मस्जिद-ए- जाफरिया के खतीब मौलाना सैयद तहजीबुल हसन रिजवी होटल के बारे में बताते हैं कि अक्सर मस्जिदों के पास पाये जाने वाले होटल की पहचान धर्म के अधार पर होती है. होटलों के अंदर धार्मिक पोस्टर लगाकर दुकानदार साबित भी करता देता है कि यह मुस्लिम होटल है. लेकिन सोरेन होटल ने इस मान्यता को बदल कर दिखाया है. इस होटल ने रांची शहर ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए सौहार्द की एक मिसाल कायम की है. यहां सभी धर्मों के भगवान की तस्वीर ही नहीं लगी हुई है बल्कि होटल मालिक सुरेंद्र ने हमेशा इनके प्रति अपनी आस्था को भी दर्शाया है कि वह सभी धर्मों के प्रति एक समान विश्वास रखते हैं.

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