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खूंटी: फरमान न मानने वाले मुखिया की PLFI ने कर दी थी हत्या, अब मुआवजे के लिए भटक रहे परिजन

News Wing

Khunti, 14 September: खूंटी में नक्सली हिंसा के शिकार लोगों के परिजनों की सुध न तो जिला प्रशासन ले रहा है और न ही राज्य सरकार! यही नहीं सरकार और आम लोगों के बीच संबंध स्थापित करने वाली कड़ी बनने का दावा करने वाले पंचायतों के प्रतिनिधि भी आंख मुंह बद कर बैठे हैं. हम बात कर रहे हैं रनिया प्रखंड के खटखुरा पंचायत के मुखिया के परिजनों से जुड़े एक मामले की....

 

पीएलएफआई के फरमान को मानने से इंकार किया तो मार डाला

गोद में बच्चा रनिया प्रखंड के खटखुरा पंचायत के मुखिया रह चुके जॉन लुगुन की पत्नी, लगभग ढाई महीने पहले अपने पति को नक्सली हिंसा में खो चुकी हैं. 25 जून की रात पीएलएफआई उग्रवादियों ने मुखिया की उनके घर में ही गोली मारकर हत्या कर दी थी क्योंकि उन्होने विकास कार्यों को नहीं करने के पीएलएफआई के फरमान को मानने से इंकार कर दिया था.

मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर परिजन

घटना को ढाई महीने बीत चुके हैं लेकिन परिजन अभी भी मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. महज आठ महीने की बेटी के साथ-साथ अपने बूढ़े सास-ससुर की देखभाल करना मुखिया की पत्नी के लिए भारी पड़ रहा है.

जिला मुखिया संघ ने मामले को लेकर आंदोलन करने की भी धमकी दी

परिजनों की इस हालत को लेकर अन्य जनप्रतिनिधि भी बेहद दुखी हैं और सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. वहीं जिला मुखिया संघ ने तो इस मामले को लेकर आंदोलन करने की भी धमकी दी है.

विकास योजनाओं के लिए जान की बाजी लगानेवालों के प्रति इतनी लापरवाह क्यों है प्रशासन

पंचायती राज व्यवस्था के तहत मुखिया सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उसे जमीन पर उतारने की कवायद की धुरी माने जाते हैं क्योंकि वर्तमान समय में अधिकांश योजनाएं अब पंचायतों के जरिए ही संचालित होने लगी हैं. ऐसे में नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास योजनाओं को लागू करने की दिशा में अपनी जान जोखिम में डालने वाले मुखिया एवं उनके परिजनों के प्रति सरकार ध्यान नहीं दे पाती है तो इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं.

 

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