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गौरी लंकेश की हत्या पर फिल्म निर्देशक अविनाश दास का बड़ा बयान, कहा-जब देश के मुखिया पर खून के छींटे हों तो...(देखें वीडियो)

न्यूज विंग से खास बातचीत

Md. Asghar Khan

Ranchi: पत्रकार गौरी लंकेश की अपराधियों द्वारा गोली मार कर हत्या कर दिये जाने पर बयानों का दौर जारी है. देश भर में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और पत्रकार समूहों ने इस हत्या कांड की निंदा की. कैंडल मार्च और विरोध मार्च निकाला गया. सोसल साइटों पर लोगों ने इस घटना का लेकर खुल कर अपने मतव्य दिये. आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चला. इस बीच अनारकली ऑफ आरा के फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने भी मामले में एक विवादित बयान दिया है. गौरी लंकेश हत्याकांड पर एक बयान में फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने कहा कि जिस देश के मुखिया पर गुजरात दंगे के खून के छींटे हों उनके फॉलोवर्स से अच्छे बरताव की उम्मीद कैसे की जा सकती है. अविनाश दास द्वारा देश के प्रधानमंत्री पर दिये गये ऐसे कमेंटस के बाद न्यूज विंग ने उनसे मामले में बात की. बातचीत में उन्होंने कहा, सोशल साइटों पर लंकेश के लिए जो लोग अभद्र टिप्पणियां कर रहे हैं, वे भी एक तरह के कातिल हैं. यहां हालात ये है कि जिसे जब मौका मिले छुरा भोंक दे. देश की कमान ऐसे लोगों के हाथ में है जिनके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता. एक पत्रकार से फिल्म डायरेक्टर बने अविनाश ने पत्रकारिता पर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता अब नहीं हो रही है. लोग डर गये हैं. उनके लिए शायर फैज की पांक्तियों का उल्लेख करते हुए वह कहते हैं बोल कि तेरे लब आजाद हैं...



अभी भी गनिमत है कि लोग समर्थन में हैं.

अविनाश दास ने कहा कि भारत में भाईचारगी का ट्रेडिशन रहा है. लोग खुद भूखे रहकर दूसरों को रोटी खिलाने पर विश्वास करते थे. लेकिन आज आलम यह है कि समाज में एक-दूसरे के लिए प्रेम नहीं सिर्फ जहर फैल रहा है. लोग एक-दूसरे को मरने मारने पर तूले हैं. गौरी लंकेश की हत्या पर संगीतकार एआर रहमान के बयानों का भी समर्थन करते हुए डायरेक्टर अविनाश ने कहा कि गनिमत है कि देश में अभी भी ऐसे बयानों का समर्थन किया जा रहा है. पत्रकारों की आवाज जितनी दबाई जाएगी, उतनी चिंगारी बनकर फैलेगी. बोलने की आजादी आपका हथियार है. गौरतलब है गौरी लंकेश की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया पक्ष-विपक्ष में आनी शुरु हो गई थी.



स्कूल से ही फिल्म बनाने का जुनून जागा

हाल में आई अविनाश दास की डेब्यु फिल्म ‘आनारकली ऑफ आरा’ ने खूब सुर्खियां बटोरी. नाच गाना कर अपना पेट पालनेवाली महिलाओं को लेकर बिहार की पृष्ठभूमि पर अधारित आनारकली ऑफ आरा में अभिनेत्री स्वरा भास्कर की एक्टिंग जबरदस्त थी. लोगों ने फिल्म को खूब सराहा. इस फिल्म ने समाज के कई आम और गंभीर मुद्दों पर लोगों का ध्यान खींचा. अविनाश दास ने अपने फिल्मी करियर पर बात करते हुए कहा कि फिल्म बनाने का जुनून स्कूल टाइम से सवार था, इस जुनून को पत्रकारिता करते हुए भी जगाए रखा. इपटा से जुड़कर थियेटर में कई प्ले किया. दिल्ली में ‘रेणु के रंग’ ने मुझमें उर्जा भर दिया. अविनाश दास ने यह भी बताया कि मीडिया से जुड़े होने का मुझे बहुत लाभ भी मिला. आप जहां जाना चाहते हैं, वहां के लोगों की संगत मिल जाए तो आपके अंदर एक अलग आत्मविश्वास जागता है. मीडिया में रहकर मनोज वाजपाई, अनुराग कश्यप, सुधीर मिश्रा, सुभाष कपूर जैसे बड़े निर्देशकों और कलाकारों से हुई दोस्ती को मैं इसी कड़ी में देखता हूं.



आदिवासी समाज पर भी फिल्म बनाऊंगा

झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले अविनाश दास ने झारखंड के आदिवासी समाज पर फिल्म बनाने की बात कही. उन्होंने अगली फिल्म प्लान के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहते हुए सिर्फ इतना बताया कि बिहार-झारखंड की पृष्ठभूमि पर आगे भी फिल्म बनाने की योजना है. आदिवासी समाज आज भी हाशिए पर है. उनका उत्थान अबतक क्यों नहीं हो पाया, इसपर कहानी लिख रहां हूं. उन्होंने कहा कि इसे लेकर अश्वनि पंकज की कहानी पर फिल्म ‘पेनाल्टी कॉर्नर’ बनाने को लेकर मैं काफी उत्सुक हूं. बता दें कि रांची के विकास विद्यालय से स्कूलिंग कर चुके अविनाश दास अपनी फिल्म के सिलसिले में रांची आये हुए थे.

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Comments

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Ho sakta hai aap sahi kah rahen ho jab aap ko vishwas hai to aaise patrakarita se kya faida Jo sahi tarah se court ko samjha bhi na sake. Suprim court jaiye tha chief justice ko samjhaiya yadi na samjhe to unke samne he kah Dena ki ham patrakar hai aap ham se jyada nahi jante. Lekin mai ek bat aapse poochna chahta hu ki jaba Punjab jal raha tab aapne kucha nahi kaha.

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