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हर भारतीय पर कम से कम 32 हजार कर्ज

दिल्‍ली: देश में अर्थव्‍यवस्‍था के सरकारी आंकडे कितने विरोधाभासी हैं यह स्‍वयं केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय ही साबित कर रहा है. मौजूदा आंकडा: भारत की अर्थव्‍यवस्‍था 8.7 फीसदी की दर से विकास कर रही है और अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां की अर्थव्यवस्था जल्दी ही 9 फीसदी की दर से विकास करेगी।


अब एक ताजा आंकडा: वित्त राज्य मंत्री नमोनारायण मीणा ने लोकसभा में लिखित जवाब देकर बताया कि बजट अनुमान 2010-11 में देश पर कुल आंतरिक कर्ज 27,36,754 करोड़ रुपये है जबकि विदेशी कर्ज 1,62,045 करोड़ रुपये और अन्य देनदारी 10,45,799 करोड़ रुपये हैं। इस तरह कुल कर्ज 39,44,598 करोड़ रुपये का बनता है। और मजूदा समय में देश की आबादी करीब 1.2 अरब है। ऐसे में आबादी के हिसाब से प्रति व्यक्ति कर्ज 32,871.65 रुपये बनता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि अब देश में प्रति व्यक्ति आमदनी बढ़कर 44 हजार रुपये को पार कर गई है। और जानकारों की राय में ये जल्दी ही 46 हजार के स्तर पर पहुंचने वाली है।

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