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झारखंड में शिक्षा व्यवस्था बेहाल, 30 छात्रों पर होने चाहिए एक शिक्षक, लेकिन 63 छात्रों पर हैं एक

Kumar Gaurav

Ranchi, 04 December: झारखंड और बिहार शिक्षा के मामले मे आज भी फिसड्डी हैं. इसका प्रमुख वजह है शिक्षकों की कमी. हालांकि बीते दिनों कई बहालियां हुई है. अभी भी बहाली हो रही है, लेकिन झारखंड में जितने शिक्षकों की जरूरत है वह वर्तमान बहालियां हो जाने के बाद भी पूरी नहीं हो पाएगी. बहाली का जो अनुपात तय किया गया है उससे हम काफी पीछे चल रहे हैं, लेकिन अच्छा संकेत यह है कि सरकार शिक्षा के स्तर को उपर उठाने पर ध्यान दे रही है. आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को अनेकों लाभकारी अवसर मिलने वाले हैं. क्योंकि झारखंड और बिहार को अबी दो लाख शिक्षकों की जरूरत है.

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कहां कितने पद रिक्त

झारखंड में करीब 55,000 शिक्षकों की जरुरत है, जिनमें से तीस हजार शिक्षकों की जरुरत प्राइमरी स्कूल, मिडिल स्कूल, कस्तूरबा गांधी विद्यालय और मॉडल स्कूलों को है, वहीं 25 हजार शिक्षक हाई स्कूल और प्लस टू स्कूलों के लिए चाहिए. उधर बिहार में एक लाख तीस हजार प्राथमिक स्कूल शिक्षकों की जरुरत है. 19500 हाईस्कूलों के शिक्षकों और 5000 प्लस टू शिक्षकों की जरुरत है.

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छात्र के अनुपात में शिक्षक के मामले में दोनों राज्य हैं काफी पीछे

बिहार में शिक्षकों की संख्या कुल जरुरत के तीस प्रतिशत की है, तो झारखंड में करीब 55 हजार शिक्षकों की जरुरत है. इस हिसाब से छात्र और शिक्षक अनुपात बहुत कम है. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के अनुसार प्राइमरी स्तर पर 30 छात्रों में एक शिक्षक, अपर प्राइमरी में 35 पर एक शिक्षक की जरुरत होती है. इस मामले में झारखंड और बिहार काफी पीछे है. बिहार में इस मुकाबले 63 छात्रों पर एक शिक्षक हैं वहीं झारखंड में 49 छात्रों पर एक शिक्षक हैं. इस मामले में यूपी और एमपी भी दूसरे राज्यों से काफी पीछे हैं.

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