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चतरा में जल्द शुरु होगी तीन कोल परियोजनाएं, सालाना 40 मिलियन टन कोयला का उत्पादन होगा

NEWS WING

Ranchi, 13 September : चतरा जिला में जल्द ही तीन नई कोल परियोजना शुरु होगी. जिसमें 40 मिलियन टन कोयले का उत्पादन प्रति वर्ष होने की उम्मीद है. इन कोल परियोजनाअों के शुरु होने के बाद चतरा जिला कोल हब बन जायेगा. जिला के विकास के लिए और ज्यादा राशि जिला प्रशासन को मिलने की उम्मीद है. अभी जो कोल परियोजनाएं चल रही है, उससे जिला को करीब 100 करोड़ रुपया प्रति वर्ष विकास के लिए मिलता है. यह राशि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट में जमा होता है. इस राशि को कोल परियोजना क्षेत्र में पानी, बिजली, शिक्षा, सड़क व स्वास्थ्य  पर खर्च किया जाता है. जिला प्रशासन को उम्मीद है कि तीन अन्य कोल परियोजनाएं शुरु होने के बाद परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए ट्रस्ट को प्रति वर्ष 600 करोड़ रुपये मिलेंगे.

अभी टंडवा में चल रही है दो कोल परियोजना

चतरा के टंडवा में अभी दो कोल परियोजना चल रही है. अाम्रपाली कोल परियोजना अौर मगध कोल परियोजना. मगध कोल परियोजना से अाठ मिलियन टन अौर अाम्रपाली कोल परियोजना से 12 मिलियन टन कोयला का उत्पादन होता है.

ये परियोजनाएं शुरु होगी

संघमित्रा-20 मिलियन टन

चंद्रगुप्त-15 मिलियन टन

सिसई व व्रिंदा-पांच मिलियन टन

भूमि अधिग्रहण का काम जारी

जानकारी के मुताबिक सभी कोल परियोजनाअों के लिए भूमि अधिग्रहण का काम जारी है. संघमित्रा कोल परियोजना के लिए अब तक 1240 हेक्टेयर अौर चंद्रगुप्त कोल परियोजना के लिए 1348 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है. चंद्रगुप्त कोल परियोजना के लिए टंडवा के साथ-साथ हजारीबाग जिला के केरेडारी प्रखंड के कई गांवों में भी भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है. इसी तरह संघमित्रा कोल परियोजना के लिए चतरा के साथ-साथ लातेहार जिला के बालूमाथ प्रखंड में भी भूमि अधिग्रहण का काम किया जा रहा है. 

मगध से सात गुणा बड़ी है संघमित्रा कोल परियोजना

संघ मित्रा कोल परियोजना टंडवा में चल रहा मगध कोल परियोजना से सात गुणा बड़ी कोल परियोजना है. मगध कोल परियोजना से प्रति वर्ष तीन मिलियन टन कोयला का उत्पादन होता है. जबकि संघमित्रा कोल परियोजना से प्रति वर्ष 20 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है. 

सिसई-वृंदा का काम अंतिम चरण में

सिसई-वृंदा कोल परियोजना का काम अंतिम चरण में है. यह परियोजना उषा मार्टिंन ग्रूप की है. परियोजना की गैर मजरुवा व वन भूमि में शुरु होगा. संबंधित भूमि के लिए एनअोसी देने का प्रक्रिया अंतिम चरण में है. सिसई-वृंदा कोल परियोजना पहले अभिजीत ग्रूप के पास थी. अभिजीत ग्रूप ने वहां रैयती जमीन का अधिग्रहण भी किया था. 

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