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राज्य में आयुष चिकित्सकों की भारी कमी, झारखंड बनने के बाद एक भी नियुक्ति नहीं

News Wing

Ranchi, 13 September: झारखंड सरकार स्वास्थ्य के प्रति कितनी सजग है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड निर्माण के बाद अभी तक एक भी आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की जा सकी है. हां घोषणा हर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने अपने कार्यकाल में जरूर किया.

राज्य में आयुष चिकित्सकों की भारी कमी

राज्य में आयुष चिकित्सा के अंतर्गत कुल 662 चिकित्सकों के स्वीकृत पद हैं, लेकिन सिर्फ 95 चिकित्सक ही कार्यरत हैं यानि आयुष चिकित्सकों के 567 पद रिक्त हैं. दुर्भाग्यवश झारखंड निर्माण के 17 सालों के बाद अभी तक एक भी आयुष चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की जा सकी है. आयुष के अंतगर्त ग्रुप सी और ग्रुप डी के 645 पद भी रिक्त हैं. आयुष के अंतगर्त होमियोपैथी, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति आते हैं.

जानें कुछ खास बातें……

-चिकित्सकों की भारी कमी, भगवान भरोसे चल रहा है

-आयुष महाविद्यालय की कुल संख्या - 3

-राज्य में आयुष अस्पतालों ( आयुर्वेद / होमियोपैथ /यूनानी) की कुल संख्या - 232

-जिला संयुक्त आयुष चिकित्सालय की कुल संख्या - 24

-पीएमसी की कुल संख्या - 150

-सभी मिलाकर राज्य में आयुष चिकित्सकों के कुल पदों की संख्या 662 है. लेकिन मात्र 95 चिकित्सकों के भरोसे पूरा राज्य चल रहा है.

-567 रिक्त पदों पर भर्ती करने की कोई सुगबुगाहट भी नहीं है. पूरा मामला ठंडे बस्ते में है. आयुष ग्रुप सी और डी में भी कर्मचारियों की भारी कमी है.

-आयुष ग्रुप सी - स्वीकृत पद-443 कार्यरत -128 रिक्त -306

-आयुष ग्रुप डी स्वीकृत पद- 476 कार्यरत -137 रिक्त – 339

आयुष के तीन महाविद्यालय सभी का बुरा हाल

राज्य की कैबिनेट ने 2001 में निर्णय लिया कि राज्य में तीन आयुष महाविद्यालय खोले जायेंगे. चाईबासा, गोड्डा और गिरिडीह में आयुष महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया. लेकिन इस राज्य का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि दो महाविद्यालय आज तक शुरू नहीं हो पाये और एक शुरू तो हुआ लेकिन बुरे हालात से गुजर रहा है. चाईबासा में आयुर्वेद महाविद्यालय खोलने की बात थी, जो आज तक नहीं खुल पायी. गोड्डा में होमियोपैथ महाविद्यालय खोला गया. लेकिन प्रतिनियुक्ति के सहारे किसी तरह यहां काम किया जा रहा है. 60-60 बच्चों का दो बैच अपनी पढ़ाई पूरी कर पास आउट भी हो चुका है.

महाविद्यालय की मान्यता रद्द करने की केंद्र ने दी है चेतावनी

मैन पावर की कमी की वजह से केंद्र सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर रिक्त पदों पर दिसंबर 2017 तक बहाली नहीं हुई तो महाविद्यालय की मान्यता ही रद्द कर दी जायेगी. गिरिडीह में यूनानी महाविद्यालय खोला जाना था जो आजतक शुरू नहीं हो पाया. विभाग भगवान भरोसे चल रहा है.

आयुष स्वदेशी चिकित्सा पद्धति है

आयुष स्वदेशी चिकित्सा पद्धति है जो राज्य की गरीब जनता के लिए बहुत ही लाभकारी है. आयुष चिकित्सक स्थानीय संस्कृति से भली भांति परिचित हैं. गांवों में भी रहकर इलाज करना इनको रास आता है. जबकि इसके विपरित ऐलोपैथिक चिकित्सकों को गांव रास नहीं आते. गांवों के अस्पतालों में नियुक्ति के बावजूद वो कार्य नहीं करते. निजी प्रैक्टिस को प्राथमिकता देने वाले ऐसे चिकित्सक लोगों का अभी तक भला नहीं कर पा रहे हैं. सरकार का सभी को स्वास्थ्य लाभ देने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है.

आयुष चिकित्सकों के वेतनमान में भी असमानता

आयुष चिकित्सकों के वेतनमान में भी काफी असमानता है. राज्य की सत्ता पर काबिज सभी सरकारों ने उनके वेतनमान को बिहार के आयुष चिकित्सकों के वेतनमान के बराबर करने की घोषणा की थी. लेकिन अभी तक उनकी जायज मांगों पर अमल नहीं किया गया. पूरे भारत में आयुष चिकित्सकों का वेतनमान 15600-39100 है, बिहार में भी आयुष चिकित्सको का वेतनमान 15600-39100 है लेकिन झारखंड में उनका वेतनमान 9300-33800 है. झारखंड में कार्यरत एक कर्मचारी के समतुल्य आयुष चिकित्सकों का वेतनमान है. जबकि वे राज्य सेवा के रूप में कैबिनेट द्वारा घोषित हैं. ऐसे में उनका मनोबल भी गिर गया है.

सरकार की 1000 दिन की उपलब्धि

सरकार एक तरफ अपने कार्यकाल के 1000 दिन की उपलब्धियां गिना जश्न में डूबी है. इसको लेकर एक से बढ़कर एक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री भी अपने विभाग की 1000 दिन की उपलब्धि गिनाने में किसी से पीछे नहीं हैं, लेकिन राज्य की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है. ऐलोपैथी के साथ-साथ आयुष चिकित्सकों की भारी कमी का खामियाजा राज्य की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. चिकित्सकों के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया कब शुरू होगी किसी को पता नहीं.

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