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गेम नहीं एक खतरनाक झांसा है ब्लू व्हेल

अनीता तन्वी, News Wing

 टेक्नोलॉजी और इंटरनेट की दुनिया में आये दिन कुछ न कुछ नया होता ही रहता है. अभी महीने भर पहले तक ब्लू व्हेल का मतलब हम सब समंदर की एक मछली ही समझते थे लेकिन अब यह एक जानलेवा गेम के रूप में हमारे समाने है जिसने कई बच्चों को अपने झांसे में फंसा कर मौत को गले लगाने के लिए मजबूर कर दिया है. देश दूनिया के साथ ही यह गेम झारखंड तक पहुंच चुका है. जमशेदपुर के एक स्कूल डीएमबीएस के एक बच्चे ने सुसाइड कर लिया. इस बच्चे के सुसाइड का तार कहीं न कहीं ब्लू व्हेल गेम से जुड़ा माना जा रहा है.

पुलिस जारी कर चुकी है अलर्ट

बता दें कि इस गेम के कारण देश दुनिया में हो रहे सुसाइड की खबरों के बाद पुलिस ने पहले ही स्कूल मैनेजमेंट और बच्चों के घरवालों को अलर्ट किया हुआ है. परिवार वालों से अपील की गयी है कि यदि बच्चे इंटरनेट यूज करते हैं तो उसपर पूरी एहतियात के साथ नजर रखें. इस गेम का नाम ब्लू व्हेल इसलिए रखा गया क्योकि ब्लू व्हेल मछली अकसर ही समंदर के किनारे आ कर अपनी जान दे देती है.

सुसाइड की प्लानिंग कर रहा था बच्चा

झारखंड के स्टील सिटी जमशेदपुर के बच्चों के एक ग्रुप को जब ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल पर बात करते सुना गया तो इनके घर के परिजनों के बीच हड़कंप मच गया. परिजनों ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस और स्कूल मैनेजमेंट को दी. जानकारी के अनुसार यह बात भी सामने आयी है कि गेम ब्लू व्हेल पर बात कर रहे इन बच्चों के ग्रुप में से एक बच्चा सुसाइड की प्लानिंग भी कर रहा था. हालांकि इस बच्चे को बचा लिया गया है.

एक अंजान खौफ में जी रहे बच्चों के परिजन 

ब्लू व्हेल के खूनी कारनामों से खास तौर पर स्कूल जानेवाले बच्चों के परिजन एक अनदेखी अनकही खौफ में जी रहे हैं क्योंकि यह कोई गेम न होकर एक ऐसा खतरनाक झांसा है जो खासतौर पर बच्चों को अपना निशाना बना रहा है और इसमें फंसे बच्चे अपनी जान देने को मजबूर हो रहे हैं. देश विदेश में सैकड़ों बच्चों द्वारा इस गेम की चपेट में आ कर किये गये सुसाइड की खबरों के बाद सरकार ने इस पर बैन तो लगा दिया है लेकिन घर और बाहर बच्चों के स्वभाव पर उनके माता पिता को नजर रखनी जरूरी है. माता पिता ने तो अपने बच्चों को उनकी खबर लेने के लिए मोबाइल दे रखा है पर वह इसका किस तरह से यूज कर रहे हैं इसकी जानकारी रखने की जिम्मेदारी भी उनके परिजनों की ही है.

पिंक व्हेल या व्हाइट व्हेल के नाम से आ जाता है नया लिंक 

बता दें कि अबतक दुनिया भर में 150 से ज्यादा बच्चे इस गेम के कारण अपनी जान दे चुके हैं. गूगल सर्च के ट्रेंड डाटा के मुताबिक इंटरनेट पर ब्लू व्हेल को सर्च करने वाले दुनिया के टॉप 10 शहरों में 7 भारत के हैं. जबकि कोच्चि दुनिया में सबसे आगे है. साइबर क्राइम के जानकार साइबर पीस फाउंडेसन के प्रेसीडेंट विनीत कहते हैं यदि ब्लू व्हेल गेम को बंद भी कर देते हैं तो तुरंत ही कुछ सेकेंडों में पिंक व्हेल या व्हाइट व्हेल के नाम से नया लिंक आपके सामने आ जाता है. खासतौर पर बच्चे इसके टारगेट होते हैं क्योंकि बच्चे इनोसेंट होते हैं और आसानी से इसकी गिरफत में आ जाते हैं. ऐसी स्थिति में बच्चों को सही तरीके से इसकी जानकारी दी जाने की जरूरत है. पैरेंटस मोबाइल छीन कर फेंक दें या ऐसी कोई हरकत करें जिससे बच्चे पर गलत असर हो उससे अच्छा है कि वे अपने बच्चों को लेकर पहले से ही अलर्ट रहें. पैरेंटस के द्वारा सही पैरेंटिंग की जरूरत है. ब्लू व्हेल एक चैलेंजिग गेम है जिसमें स्टेप बाइ स्टेप कई चैलेंज दिये जाते हैं और इसका लास्ट चैलेंज होता है सुसाइड करना. कुछ लोग इसे अफवाह भी मान रहे हैं.

सुनिये क्या कहते हैं साइबर पीस फाउंडेशन के प्रेसीडेंट विनीत------

 

बच्चा ज्यादा समय ऑनलाइन बिताता है, तो यह एक गंभीर बात मनोचिकित्सक डॉ सिद्धार्थ सिन्हा कहते हैं अगर आपका बच्चा ज्यादा समय ऑनलाइन बिताता है, तो यह एक गंभीर बात है. हो सकता है कि आगे चलकर आपको इसके लिए विशेषज्ञ की सलाह लेनी पड़े. परैंटस का यह फर्ज है कि बच्चे को इंटरनेट का सकारात्मक यूज समझायें. वैसे गेम्स और ग्रुप जहां डिस्ट्रकटिव बातें होती हैं, वैसे माहौल से बच्चों को दूर रखें. कई बार कंस्ट्रकटिव गेमिंग बच्चों के कंसंट्रेशन को बढ़ाने में सहायक हैं जिसका हम इलाज में इस्तेमाल भी करते हैं. बच्चे किस तरह इंटरनेट यूज कर रहे हैं, इस बात की पेरेंट्स मॉनिटर करें.

सुनिये क्या कहते हैं मनोचिकित्सक-------

 

रातू जेके इंटरनेशनल स्कूल के एक शिक्षक कहते हैं कि वे जिस भी स्कूल में अबतक रहे वहां बच्चों के मोबाइल यूज के खिलाफ रहे हैं. हम लोग बच्चों के पैरेंटस को मोबाइल फोन न देने की अपील तो करते ही हैं. साथ ही बीच-बीच में सर्च अभियान भी चलाते हैं. यदि किसी बच्चे के पास मोबाइल मिलता है, तो उनसे मोबाइल ले लिया जाता है और उनके पैरेंटस को बुलाया जाता है. पैरेंटस यदि बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें मोबाइल देते हैं तो यह बता दें कि स्कूल में कॉल सुविधा तो होती ही है साथ ही स्कूल बसों में भी हर बस के ड्राइवर को मोबाइल दी जाती है जिनसे पैरेंटस अपने बच्चे की जानकारी ले सकते हैं.

सुनिये क्या कहते हैं शिक्षक-------------

पुलिस के अनुसार ब्लू व्हेल की मास्टर माइंड गिरफ्तार

पुलिस यह दावा कर रही है कि ब्लू व्हेल की मास्टर माइंड एक 17 वर्षीय रशियन लड़की है जिसे गिरफतार कर लिया गया है. इस लड़की के कमरे से अजीबो-गरीब चीजें बरामद हुई हैं जिसमें डरावनी फिल्में, डरावनी पेंटिंग, सुसाइड के लिए इंस्पायर करने वाले नोट, डीवीडी, विवादास्पद किताबें हैं. पुलिस के अनुसार यह लड़की ही गेम से जुड़े लोगों को धमकियां देकर और डर दिखाकर जान देने को मजबूर कर देती है. यदि गेम से जुड़ा व्यक्ति उसकी बात नहीं मानता तो उसके परिवार वालों की हत्या करने तक की धकमी दी जाती है. इस लड़की के कमरे से रशियन साइकॉलजी स्टूडेंट फिलिप ब्यूडेइकिन के फोटो और किताबें भी मिली. बता दें कि ब्यूडेइकिन को उसकी विवादित चुनौतियों की वजह से 3 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी.

जानें गेम से जुड़ी कुछ खास बातें

- मदुरै के एक लड़के विगेश ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि ब्लू व्हेल गेम नहीं, खतरा है. इसमें एक बार फंसा व्यक्ति निकल नहीं सकता. इस गेम के जाल में फंसे 19 वर्षीय स्टूडेंट विगेश ने फांसी लगा ली. विगेश बीकॉम सेकेंड ईयर का स्टूडेंट था. उसके हाथ पर ब्लू व्हेल की इमेज भी बनी थी.

- इस गेम से जुड़े पुड्डुचेरी यूनिवर्सिटी के छात्र ने पेड़ से लटक कर अपनी जान दे दी.

- इन दो मौतों के साथ ही भारत में इस गेम से अब तक हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर सात हो गया है.

- भारत में इस गेम पर बैन लगा दिया गया है. वावजूद इसके इस गेम का लिंक अभी भी एक्टिव है जो काफी चिंता का विषय है.

- इस गेम की पहचान के लिए कमेटी गठित किये जाने की भी बात चल रही है.

- बैन के बाद भी गेम के एक्टिव होने के कारणों का पता लगाने के लिए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने जांच के आदेश दिये हैं.

- ब्लू व्हेल सर्च करने में टॉप 10 शहरों में 7 भारत के हैं जिसमें तिरुवनंतपुरम, कोलकाता, बेंगलुरू, गुवाहाटी, मुंबई और दिल्ली हैं.

- अन्य देशों के तीन शहर सैन-ऐंटोनियो, नैरोबी और पेरिस हैं जहां यह गेम खूब सर्च किया जा रहा है. इस गेम को सर्च करने वाले टॉप देशों में भारत का स्थान चौथा है.

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