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सचिव से भी ज्यादा सैलरी विभाग के कंसल्टेंट्स को, मार्च तक का एडवांस वेतन भी ले चुकी है कंपनी, लेकिन विभाग के किसी काम के नहीं

Akshay Kr. Jha

Ranchi, 04 November: सरकारी विभागों में अच्छे से काम हो इसके लिए सरकार ने प्राइवेट कंसल्टेंट की मदद लेनी शुरू की. विचार किया कि एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट तैयार की जाए. ये यूनिट विभाग को डीटेल रिपोर्ट देने के अलावा सुझाव भी देने का काम करती है. फिलहाल ऐसे प्राइवेट यूनिट से चार विभाग मदद ले रहे हैं. लेकिन जब आप इनके मामूली काम के बदले इन्हें मिलने वाली सैलरी के बारे में जानेंगे तो आपके होंश उड़ जाएंगे. इन्हें जितनी सैलेरी मिलती है, उतनी सैलेरी सचिव स्तर के अधिकारी को भी नहीं मिल पाती. वहीं काम की बात करेंगे तो एक विभाग के अभी तक चार करोड़ रुपए सैलेरी पर खर्च करने के बाद भी यूनिट की तरफ से ऐसी एक भी रिपोर्ट नहीं मिली है, जिससे विभाग में किसी तरह का सुधार हुआ हो, या फिर किसी तरह की कोई मदद मिल सका हो.

जानें इस कंपनी के बारे में

NICSI में सूचीबद्ध (Impanel) तमाम कंपनियों में से एक कंपनी है PWC (Price Waterhouse Cooper). PWC  कंपनी पीएमयू (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) के तौर पर झारखंड सरकार के कल्याण विभाग, उच्च तकनीक, नगर विकास और श्रम विभाग में अपनी सेवा दे रही है. ये करीब दस लोगों की टीम है. विभाग में काम कर रहे दूसरे सरकारी कर्मचारियों को वेतन मिले ना मिले. यूनिट को मार्च 2018 तक का वेतन एडवांस में दिया जा चुका है. सिर्फ एक विभाग की बात करें तो छह महीने में यूनिट के कर्मियों को सैलेरी के तौर पर 3.48 करोड़ रुपए भुगतान किया जा चुका है. विभाग से पूछे जाने पर यूनिट की तरफ से किसी तरह की कोई उपलब्धि दर्ज नहीं करायी गयी.    

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सरकार का कितना हो रहा है खर्च

एक विभाग के लिए काम करने वाली PWC पीएमयू में दस लोग हैं. सबसे ज्यादा टीम लीडर को 2,79,591 लाख रुपए प्रति महीने सैलेरी दी जा रही है. जो कि किसी सचिव को मिलने वाली सैलेरी से काफी ज्यादा है. दूसरे नंबर पर तैनात अधिकारी को 2,47,330.50 लाख रुपए प्रति महीने दी जा रही है. इनकी संख्या पांच हैं. और तीसरे नंबर के अधिकारी को 1,72,056 लाख रुपए प्रति महीने दी जा रही है. इन सभी दसों कर्मियों का तीन महीने का वेतन 76,05,413 लाख रुपए है. इतना ही नहीं PWC कंपनी को एडवांस में मार्च तक की सैलेरी 2.72 करोड़ रुपए दी जा चुकी है.

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