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कांटाटोली फ्लाईअोवर : प्रशासन इन सुझावों पर गौर करे

कांटाटोली में फ्लाईअोवर बनाने को लेकर तैयारी शुरु हो गयी है. 26 अगस्त से ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए वैकल्पिक मार्ग के इस्तेमाल का ट्रायल शुरु हो रहा है. यह तय हो गया है कि कांटाटोली चौक पर अब जल्द ही फ्लाईअोवर निर्माण का काम शुरु होगा. निर्माण पुरा होने के बाद लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी. रांची की ट्रैफिक व्यवस्था पर लंबे समय तक काम करने वाले राजेश दास ने सरकार व प्रशासन को कुछ सुझाव दिए हैं. हम उसे यहां रख रहे हैं. ताकि प्रशासन इस पर काम करे अौर फ्लाईअोवर निर्माण के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी हो. 

सुझाव ः-

- फ्लाईओवर के बजाय सिस्टम को दुरुस्त करने की ज्यादा जरूरत है, तंग शहरों में ट्रैफिक सुधार के लिए फ्लाईओवर कोई विकल्प नहीं है. फिर भी अगर फ्लाईओवर बनाना बेहद जरूरी ही है तो कांटा टोली फ्लाईओवर निर्माण के दौरान इन तथ्यों पर ध्यान रखा जाना जरुरी है. 

- व्यस्त समय में ट्रेनों को रांची स्टेशन के बजाय हटिया, नामकुम और टाटीसिलवे से खोला जा सकता है, मगर रांची स्टेशन पर थोड़े समय के लिए ही सही, उनके पड़ाव जरूर होने चाहिए.

- शहर की सड़कों को अलग-अलग दिन को (दिनवार) और श्रेणीवार वेहिकल फ्री किया जा सकता है.  जैसे सोमवार को सरकारी गाड़ी फ्री डे, मंगलवार को ई रिक्शा फ्री डे, बुधवार को ऑटो रिक्शा फ्री डे, गुरुवार और रविवार को फ्री पब्लिक ट्रांसपोर्ट डे, शुक्रवार को कार फ्री डे, शनिवार को ढुलाई वाहन फ्री डे आदि से वर्तमान की ट्रैफिक समस्या का कुछ हल निकल सकता है. फ्री डे में अगर आप जरूरत पड़ने पर अपनी निजी गाड़ी लेकर सड़कों पर निकलते हैं तो उनके लिए एक शुल्क निर्धारित किया जा सकता है.

रांची शहर में प्रवेश करने वाली बसों को शहर के एकदम बाहर जैसे टाटा से आ रही गाड़ियों को नामकुम थाने के बगल के मैदान में, ओरमांझी से आ रही गाड़ियों को मेसरा सब्जी बाजार के पास दिन भर के पड़ाव की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है.

- ट्रैफिक दबाव के प्रबंधन के लिए व्यस्त चौकों और सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस के बड़े अधिकारियों को परियोजना सरीखी जिम्मेदारियां दी जा सकती है. जिनका समय-समय पर एक स्थानीय ट्रैफिक कमिटी के द्वारा मूल्यांकन करने से काफ़ी बदलाव महसूस किया जा सकता है.

- स्कूल बसों के समय, साइज और पड़ाव में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं. ताकि सड़कों पर जाम ना लगे. उसी प्रकार एम्बुलेंस और अकास्मिक वाहनों के लिए डेडिकेटेड निकास की व्यवस्था जरूर की जानी चाहिए.

- इस निर्माण कार्य का पर्यवेक्षण नगर विकास मंत्री सी. पी. सिंह अगर स्वयं कर सकें तो बहुत बढ़िया होगा. ताकि निर्माण कार्य समय पर पूर्ण भी हो सके और किसी भी प्रकार के दोषारोपण जैसी कोई बात भी ना रह जाय.

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