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शतरंज की बिसात पर बड़ों को मात दे रही है छह साल की याशिका

Mrityunjay Srivastava

Ranchi, 28 August: कहते हैं कि अगर आदमी का हौसला और सपना बड़ा हो तो उम्र की सीमा भी तकदीर के सवांरने की राह में बाधक नहीं बनती है. उम्र अगर महज छह साल की हो और सपने आसमान की बुलंदियों को छूने की तो तब मामला कुछ अलग और रोचक नजर आता है. रांची की रहने वाली छह साल की याशिका प्रेरणा डाडेल उस कहावत को सच करने की जद्दोजहद में है, जिसमें कहा जाता है कि खुदी को कर बुलंद इतना हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है. छह साल की छोटी सी उम्र में चैंपियन और वह भी ऐसे खेल का जिसे खेलने का नाम भर सुनने से बडे बडों के पसीने ही छूट जाये. शतरंज एक ऐसा खेल जिसे बच्चे अमूमन खेलना पसंद नहीं करते है, बड़ों के भी बस में यह खेल नहीं है. यह खेल दिमाग तौर पर सबसे पेचिदा खेल माना जाता है.

साढ़े चार साल की उम्र से ही खेलती है शतरंज

याशिका ने साढे चार साल की छोटी सी उम्र से ही शतरंज की बिसात पर अपने दिमागी घोडे दौड़ाने शुरू कर दिये थे. माता-पिता याशिका को माहिर शतरंज खिलाडी बनने में भरपूर मदद कर रहे हैं. जब इस उम्र के बच्चे अमूमन वीडीओ और मोबाईल गेम में दिलचस्पी दिखाते हैं. उस दौर में याशिका न केवल शतरंज खेलती है, बल्कि अपने से बड़े उम्र से खिलाडियों को झटके में मात दे देती है.

कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है याशिका

याशिका के पिता जार्ज कुमार डाडेल झारखंड सरकार में डिप्टी कलेक्टर है और मां अनुपमा दिव्या मिंज डीवीसी में अधिकार के तौर पर कार्यरत है. याशिका शतरंज के खेल में इस कदर माहिर हो चुकी है कि आज प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी न केवल भाग लेती हैं, बल्कि अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय देते हुए मेडल भी हासिल कर रही हैं. हालांकि राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में अपने से बडी सारा जैन से मात खा गयी.

31वीं राष्ट्रीय अंडर 7 ओपेन चेस चैंपियनशिप के लिए हुआ है चयन

याशिका का चयन 31वीं राष्ट्रीय अंडर 7 ओपेन चेस चैंपियनशिप के लिए हुआ है. 3-12 सितंबर तक आंध्रप्रदेश के विजयवाडा में होने वाले इस चैंपियनशिप में चैंपियन बनने के लिए याशिका पूरी तरह से तैयार है. याशिका नेशनल आरबीटर दीपक सिन्हा की देखरेख में शतरंज की चाल चल रही है. दीपक सिन्हा ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब पूरे देश में याशिका झारखंड का नाम रौशन करेगी.

याशिका प्रेरणा दूसरे बच्चों के लिए सचमुच है प्रेरणा

याशिका प्रेरणा डाडेल अपने नाम के अनुरूप दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा है. वह न सिर्फ शतरंज खेलने में ही माहिर खिलाडी है, बल्कि वह पढाई में भी टॉप रहती है. रांची के सेक्रेट हार्ट स्कूल की कक्षा एक की छात्रा याशिका पढाई में भी नाम कमा चुकी है. शतरंज में कुल तीन फॉरमेट होते है. रैपिड, ब्लिज और क्लासिकल. क्लासिकल चार घंटे का गेम होता है. जिसमें याशिका माहिर है.

इस छोटी सी उम्र में चाइनीज सामान से है नफरत

याशिक बडी होकर शतरंज चैंपियन नहीं बनना चाहती. वह साइंटिस्ट बनकर ऐसा काम करना चाहती है जिससे मेक इन इंडिया पूरी दुनिया में छा जाये. इस उम्र में वह चाईनिज सामानों से नफरत करती है. कहती है अपने देश के बने खिलौने से ही खेलूंगी.

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