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खुद हूं अपनी रोल मॉडल: ध्यानचंद अवार्ड विजेता सुमराय टेटे

अनीता तन्वी,  News Wing

 Ranchi, 29 August: भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और कोच रही सिमडेगा की बेटी सुमराय टेटे को खेल में दिये गये उनके बेहतरीन योगदान के लिए नेशनल स्पोर्टस डे पर आयोजित सम्मान समारोह में इस वर्ष ध्यानचंद पुरस्कार दिया गया.

दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा. यह लगातार दूसरा साल है, जब सिमडेगा के किसी हॉकी खिलाड़ी को ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. इस पुरस्कार से नवाजे जाने से एक दिन पहले दिल्ली में रिहर्सल के बीजी शिडयूल के बीच समय निकाल कर उन्होंने अपनी खुशी न्यूज विंग के साथ शेयर कीं. पढ़ें उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश

आपको ध्यानचंद अवार्ड मिला है. इस अवार्ड के लिए आपको बहुत-बहुत बधाईयां. अबतक के सफर में आपको किन खास लोगों का साथ मिला ?

आपका बहुत बहुत धन्यवाद. यहां तक पहुंचने के क्रम में सबसे पहले तो मेरे माता-पिता ने सहयोग दिया. गुरूजनों का साथ हमेशा मिला और साथ ही राज्य व देश के लोग जिन्होंने मुझे पसंद किया और हर कदम पर सराहा.

शुरूआती दिनों में आप हॉकी सीखने के लिए सिमडेगा से शंख नहीं पार कर बरियातू बालिका हॉकी केंद्र आती थीं. आपके बचपन के वे दिन कितने मुश्किल थे ?

जी हां! वे दिन बहुत मुश्किल भरे थे. परिवार की आर्थिक स्थित भी ठीक नहीं थी. उन दिनों मेरे पैरेंटस को मुझे हॉकी सिखाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा था. आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने के कारण बरियातु ट्रेनिंग सेंटर में सेलेक्शन होने के बाद भी पैरेंटस ट्रेनिंग के लिए रांची भेजने को तैयार नहीं थे लेकिन फिर उन्हें समझाने पर वे तैयार हो गये. बिल्कुल शुरूआती ट्रेनिंग कोच जागेश्वर मांझी से मिली थी. बरियातू ट्रेनिंग सेंटर में मैंने हमारे कोच नरेंद्र सिंह के अंडर ट्रेनिंग ली.

अभी झारखंड में ही नहीं देश में भी हॉकी का बढ़िया माहौल है. आप यहां के युवा खिलाड़ियों को क्या सलाह देना चाहेंगी?

युवा जहां भी हैं और जिस क्षेत्र से जुड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं, वहां अपने हेड द्वारा सिखायी जा रही बातों को ध्यान से सुनें और उसपर अमल करें. मेहनत के साथ प्रैक्टिस करें. समझ में न आये तो दुबारा पुछने में हिचकिचायें नहीं ताकि आपके ट्रेनर दुबारा से आपको और बेहतर तरीके से समझा सकें. टीवी नेट में अब बहुत सारे ट्रिक मिल जाते हैं. अपनी जरूरत के हिसाब से कोच से बात करें और अपनी कमजोरी पर पूरी मेहनत के साथ काम करें.

1980 मॉस्को ऑलंपिक में गोल्ड मैडल जीतने वाले और ध्यानचंद अवार्ड से भी सम्मानित किये गये सिलवानुस डुंगडुंग से आप ने कहा था कि जब तक अवार्ड नहीं मिल जाता आप खेलती रहेंगी. ऐसे जज्बे को सलाम! आप से पूछना चाहुंगी कि खुद को मोटिवेट करने के लिए आप क्या करती हैं?

हॉकी में मिला अचीवमेंट ही मुझे प्रेरित करता है कि मैं हॉकी से लगातार जुड़ी रहूं. मेरा अचीवमेंट ही मुझे बुस्टअप करता है. इसलिए जबतक मैं कर पाउंगी हॉकी खेलती रहुंगी. अपने देश के लिए हॉकी खेलते हुए मुझे जो सफलता मिली लोगों का साथ मिला मैं उससे बहुत प्रेरित हूं.

हर खिलाड़ी का कोई न कोई रोल मॉडल होता है, आप का रोल मॉडल कौन है?

इस प्रश्न पर ठहाके लगाकर हंसते हुए सुमराय कहती हैं कि मैंने खुद को अपना रोल मॉडल माना है. मेरा रोल मॉडल मैं खुद हूं. जो बच्चे किसी न किसी स्पोर्टस गेम में आगे हैं और स्पोर्टस में ही अपना करियर बनाना चाहते हैं उन्हें और उनके परिजनों से आप क्या कहना चाहेंगी ? जो भी बच्चे खेल में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं वे अपने खेल को पूरे जज्बे और लगन के साथ खेलें. अपने ट्रेनर की बातों को ध्यान से सुनें, सीखें और उसपर अमल करें. पूरी मेहनत करें. साथ ही अपने खेल पर विश्वास रखते हुए उस खेल से जुड़े महान खिलाड़ियों को याद करें और अपने खेल को सम्मान दें.

पैरेंटस से कहना चाहुंगी की अपने बच्चों का सपोर्ट करें क्योंकि परिवार वालों के सपोर्ट से बच्चे आधी गेम तो ऐसे ही जीत जाते हैं.

हॉकी महिला टीम की कप्तान के रूप में अपने सफर के बारे में आप क्या कहना चाहेंगी?

जब आप को टीम की कमान दी जाती है, तो खेल के साथ-साथ पूरी टीम की जिम्मेदारी आपके उपर आ जाती है. टीम को साथ लेकर चलना. ग्राउंड में खुद भी अच्छा परफॉम करना है और टीम भी बहुत अच्छा प्रदर्शन करे इसकी जिम्मेदारी कैप्टन की ही होती है. यह काम मैंने बखुबी किया. इस सफर में टीम का बहुत सपोर्ट रहा. कोच ने बहुत साथ दिया. वर्ष 2006 के मैच में ग्राउंड पर हम लोगों ने बहुत अच्छा खेला लेकिन दुर्भाग्य से हमें सिल्वर मैडल से ही संतोष करना पड़ा.

जानें सुमराय से जुड़ी कुछ खास बातें -

सुमराय टेटे भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी करनेवाली झारखंड की पहली महिला खिलाड़ी रही हैं. सुमराय ने लगभग एक दशक तक भारतीय महिला हॉकीटीम का प्रतिनिधित्व किया. 2002 कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतने समेत कई उपलब्धियों के साथ वह टीम का अभिन्न हिस्सा बनीं रहीं.

1- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुमराई झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनी. जिन्हें राष्ट्रीय टीम के नेतृत्व की कमान सौंपी गयी. 2013-14 में सुमराई ने भारतीय हॉकी टीम में सहायक प्रशिक्षक की भी भूमिका निभायी.

2- झारखंड हॉकी संघ के संयुक्त सचिव मनोज कोनबेगी ने बताया कि पुरस्कार चयन समिति द्वारा सुमराय टेटे का नाम चयन कर खेल मंत्रालय को भेजा गया था. पिछले वर्ष 1980 मॉस्को ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता सिलवानुस डुंगडुंग को भी इसी सम्मान से नवाजा गया था. तब पूरे सिमडेगा में जश्न का माहौल था.

3- मनोज कोनबेगी ने कहा कि मैं सुमराय टेटे, उनके सभी गुरुजनों और उनके सभी सहयोगियों को बधाई देता हूं. उन्होंने कहा कि मैं उस नाविक को भी बधाई देता हूं जो सुमराय टेटे को शंख नदीपार करवाया करते थे. शंख नदी पार कर सुमराय टेटे खेलने के लिए रांची जाया करती थीं.

4- आज उसी लगन के बल पर सुमराय ने खेल की दुनिया में इस मुकाम को हासिल किया है. उन्होंने कहा कि मैं सुमराय टेटे के प्रथम गुरु जागेश्वर मांझी को भी बधाई देता हूं. जिन्होंने सुमराय को गांव से उठाकर रांची पहुंचाया और खेल की दुनिया में आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया.

उपलब्धियों से भरा है सुमराय का खेल करियर

बरियातू बालिका हॉकी केंद्र रांची में प्रशिक्षण लेने वाली सुमराय टेटे का खेल जीवन उपलब्धियां से भरा पड़ा है.

- 2002 मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण

-2002 जोहांसबर्ग चौंपियंस ट्रॉफी कांस्य

-2002 बुसान एशियाड

-2003 सिंगापुर एमआइए हॉकी चौंपियनशिप स्वर्ण

-2003 हैदराबाद एफ्रो-एशियाई खेल में स्वर्ण

-2004 नयी दिल्ली एशिया कप में स्वर्ण

-2006 मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक अपने नाम किया.

एक कसक रह गयी

2006 में अभ्यास शिविर के दौरान घुटने में लगी चोट ने सुमराय टेटे के अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत कर दिया. सुमराय चाहती थी कि चोट के बावजूद उनके हॉकी कैरियर का अंत झारखंड में आयोजित होने वाले 34वें राष्ट्रीय खेलों के साथ हो. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. राष्ट्रीय खेलों का आयोजन टलता गया. फरवरी 2011 में जब खेल का आयोजन हुआ तब तक चोट के कारण सुमराय का खेलने का सपना टूट चुका था.

राज्य के इन खिलाड़ियों को मिले हैं अवार्ड

झारखंड के खिलाड़ियों में अब तक क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी, तीरंदाज दीपिका कुमारी, हॉकी ओलिंपियन सिलवानुस डुंगडुंग और फुटबॉलर दीपक मंडल को विभिन्न खेल पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. धौनी को 2009 में पद्मश्री अवॉर्ड, दीपिका को 2012 में और दीपक मंडल को 2010 में अर्जुन पुरस्कार, जबकि सिलवानुस डुंगडुंग को 2015 में ध्यानचंद लाइफटाइम अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है.

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