तीसरा वर्ल्ड वार धरती पर नहीं अंतरिक्ष में होगा, फिल्मी होगा 

Submitted by NEWSWING on Mon, 04/16/2018 - 21:50

NewDelhi : सीरिया पर अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के हमले के बाद दुनिया लगभग दो खेमों में बंट गयी है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इसे एक और शीत युद्ध करार दिया है. युद्ध के विशेषज्ञ अगर वार हुआ तो इसे नये चश़्मे से देख रहे हैं. युद्ध अंतरिक्ष में रोबोट की लड़ाई जैसा होगा. बिल्कुल फिल्मी हो सकता है. इसे कोरी कल्पना नहीं मानिए. विशेषज्ञों के अनुसार जमीनी लड़ाई में परमाणु संपन्न देशों की कोई दिलचस्पी नहीं है, इसीलिए दुनिया की महाशक्तियां स्पेस वार यानी अंतरिक्ष में जंग की तैयारी में जुट गयी है. वे जानते हैं कि आजकल किसी भी देश का पत्ता भी सेटेलाइट से हिलता डोलता है. ऐसे में अगर दुश़्मन देश के सेटेलाइट पर ही काबू पाया जाये या उसे नष़्ट कर दिया जाये तो वह सरेंडर कर देगा. बता दें कि छह मार्च, 2018 को अमेरिकी डिफेंस इंटेलीजेंस एजेंसी के निदेशक लेफ्टीनेंट जनरल रॉबर्ट पी एश्ले जूनियर ने अमेरिकी सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने कहा था कि रूस और चीन स्पेस वार में इस्तेमाल किये जा सकने वाले हथियार विकसित कर रहे हैं. जबकि अमेरिका खुद ऐसे हथियार बना रहा था. 

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अमेरिका, रूस और चीन अंतरिक्ष में मौजूद सेटेलाइट को धरती से मिसाइल दागकर गिरा सकते हैं

खबरों के अनुसार 1970 में कैलिफोर्निया की लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लैबोरेटरी ने एक्सकैलीबर परियोजना पर काम किया. इसका मकसद सीधे अंतरिक्ष में परमाणु विस्फोट करना बताया गया. लेजर और एक्सरेज से कई मिसाइलों को एक साथ गिराने सहित सेटेलाइट को भी निशाना बनाया जाना था. इसके अलावा पूर्व में 2007-2008 में सेटेलाइट हैकिंग के कई मामले सामने आये थे, लेकिन इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ. वैज्ञानिकों के अनुसार अगर नुकसान करने का इरादा हो तो फायर थ्रस्टर्स को चालू कर सेटेलाइट को कक्षा में घूमने पर विवश किया जा सकता है. बताया गया कि सेटेलाइटों को हैक होने से बचाने वाली क्वांटम इनक्रिप्शन तकनीक पर यूरोपीय स्पेस एजेंसी काम कर रही है. अमेरिकारूस और चीन अंतरिक्ष में मौजूद किसी भी सेटेलाइट को धरती से मिसाइल दागकर मार गिराने की तकनीक आजमा चुके हैं.

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रूसियों ने 1957 में अपना पहला सेटेलाइट स्पुतनिक 1 अंतरिक्ष में भेजा था

अमेरिका ने तो किसी यान को मार गिराने की रिसर्च तभी शुरू कर दी थी, जब रूसियों ने 1957 में अपना पहला सेटेलाइट स्पुतनिक 1 अंतरिक्ष में भेजा था. इसके बाद रूस ने 1960 में इस्त्रेबिटेल स्पुतनिक का परीक्षण किया. इसका डिजायन इस तरह किया गया था जिससे यह दूसरे उपग्रह के पास जाकर खुद में विस्फोट कर उड़ा दे और उसे भी तबाह कर दे.  2015 में रूस ने व 2007 में चीन ने एंटी सेटेलाइट मिसाइल का परीक्षण किया. प्रयोग के तौर पर अमेरिका ने अपने नष़्ट हो गये धरती की ओर गिर रहे जासूसी उपग्रह को मिसाइल से निशाना बनाया.

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