प्रतिमाह होती थी 20 हजार करोड़ करंसी की खपत, 12 दिनों में ही निकाल लिये गए 45 हजार करोड़ रुपये 

Submitted by NEWSWING on Tue, 04/17/2018 - 17:08

New Delhi : केंद्र सरकार कहती है कि देश के बैंक मालामाल हैं. अर्थव्यवस्था पटरी पर है. सब कुछ ऑल इज वेल है, मगर देश के कई राज्यों में खाली पड़े ढनढनाते एटीएम के पीछे कौन सा खेल है ? इस बात से सभी परेशान हैं कि जरूरत के वक्त उन्हें एटीएम से पैसे नहीं मिल रहे, जिसकी वजह से उनके कई जरूरी काम नहीं हो पा रहे. इस बीच देश के विभिन्न हिस्सों से कैश की कमी की खबर आने से सरकार भी हरकत में आ गई है, पूरा तंत्र डैमेज कंट्रोल में जुट गई है. सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के वित्त सचिव ने कहा है कि पिछले 15 दिनों में सामान्य से तीन गुणा ज्यादा नोटों की निकासी हुई है, जिससे ये समस्या सामने आई है. उन्होंने बताया कि 500 के नोटों की छपाई बेहद तेजी से हो रही है, जिसे आने वाले समय में 5 गुणा तेज करने के लिए कदम उठाया है. साथ ही उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में हम हर दिन 2,500 करोड़ रुपये मूल्य के 500 के नोटों की आपूर्ति करने लगेंगे. इस तरह एक महीने में हम 70,000 से 75,000 करोड़ रुपये मूल्य के 500 के नोटों की आपूर्ति करने लगेंगे.'

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12-13 दिन में निकाले गए 45 हजार करोड़ रुपये

गौरतलब है कि आम तौर पर प्रति माह 20 हजार करोड़ करंसी की खपत होती है, लेकिन इस महीने 12-13 दिनों में ही 45 हजार करोड़ के नोट निकाले जा चुके हैं. जो उम्मीद से काफी ज्यादा है. हालांकि वित्त सचिव ने नोटों की कोई कमी होने की बात से इन्कार किया है.
नोटों की अचानक बढ़ी मांग के कारणों का जिक्र करते हुए वित्त सचिव गर्ग ने कहा कि लोग अफवाह का शिकार होकर जल्दबाजी में पैसे निकाल रहे हैं कि आनेवाले दिनों में नोटों की कमी हो जाएगी. उन्होंने कहा, 'हम लोगों को भरोसा दिलाते हैं कि नोटों की कोई कमी नहीं है. नोटबंदी के वक्त 17.50 लाख करोड़ मूल्य के नोट सर्कुलेशन में थे, लेकिन अभी 18 लाख करोड़ के नोट हैं, यानी जरूरत से ज्यादा.

स्थानीय प्रबंधन के कारण उपजी समस्या

वित्त सचिव ने कुछ देश के कुछ हिस्सों में नोटों की कमी को कमोबेश स्थानीय प्रबंधन से उपजी समस्या करार दिया. उन्होंने बताया, 'देश में 4 हजार करंसी चेस्ट हैं. वहीं पैसे आते हैं, रखे जाते हैं और वहां से वितरित होते हैं. लिहाजा, हर चेस्ट की मॉनिटरिंग हो रही है. जिस चेस्ट में कैश की कमी हो रही होगी, वहां पर्याप्त कैश पहुंचाया जाएगा.

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आखिर कहां गायब हो रहे 2000 के नोट ? 
इन दिनों एक और सवाल आम लोगों के ज़हन में तैर रहा है, वो है 2000 के नोटों की कमी, जिसको लेकर वित्त सचिव ने कहा है कि अभी सिस्टम में 2000 रुपये के 6 लाख 70 हजार करोड़ रुपये मूल्य के नोट हैं. यह संख्या पर्याप्त से ज्यादा है. हमें भी पता है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में घटे हैं. इसकी कोई जांच तो नहीं कराई है, लेकिन अनुमान यह है कि बड़े नोट जमा करने में आसानी होती है. इसलिए लोग बचत की रकम 2000 रुपये के नोटों में ही जमा कर रहे हैं. हालांकि केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय की ओर से वर्तमान समस्या पर सफाई देने का दौर चल पड़ा है, मगर लोगों को कितनी जल्द करंसी की दिक्कत से राहत मिलेगी, इसका संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है.

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