कौशल विकास योजना : डेढ़ साल पहले सिटी मैनेजर ने अफसरों व मंत्री को दी थी टेंडर में गड़बड़ी की जानकारी

Submitted by NEWSWING on Sat, 01/13/2018 - 11:35

subhash shekhar

Ranchi: केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रायोजित राष्‍ट्रीय शहरी आजिविका मिशन (एनयूएलएम) के तहत कौशल विकास योजना को झारखंड में अमली जामा पहनाने के लिए नगर विकास और आवास निर्माण विभाग ने टेंडर जारी किया था. इसमें  एजेंसियों और कंपनियों के चयन में खूब गड़बडियां की गयी. विभाग में यह खेल कैसे हुआ इसका खुलासा न्‍यूज विंग  कर चुका है. कौशल विकास योजना के लिए निकाले गए टेंडर के नियमों को दरकिनार कर  मनचाहे कंपनियों को करोड़ों का काम दे दिया गया. एेसा नहीं है कि इन गड़बड़ियों की सूचना नगर विकास विभाग के मंत्री  और प्रधान सचिव को नहीं  थी. करीब डेढ़ साल पहले सिटी मैनेजर ने एक पत्र लिखकर नगर विकास विभाग के सभी अधिकारियों, आवास निर्माण विभाग के निदेशक और नगर विकास मंत्री सीपी सिंह को गड़बड़ियों की जानकारी दी थी. सिटी मैनेजर के पत्र की कॉपी न्यूज विंग के पास उपलब्ध है.  पर, गड़बड़ियों को रोकने के लिए किसी भी स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी. 

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अप्रैल 2016 में सिटी मैनेजर ने नगर विकास मंत्री और प्रधान सचिव को लिखा था पत्र

नगर विकास और आवास निर्माण विभाग के निदेशक, प्रधान सचिव और मंत्री को निविदा चयन समिति के ही एक सिटी मैनेजर राजा चंदन कुणाल ने पहली अप्रैल 2016 में पत्र लिखा था. पत्र में सिटी मैनेजर ने टेंडर में की जा रही गड़बडियों की जानकारी दी थी और बताया था कि किस तरह से टेंडर की  शर्तों को दरकिनार कर मनचाही कंपनियों को काम देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

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शर्तों को पूरा नहीं कर रही थी कंपनियां

सिटी मैनेजर ने नगर विकास मंत्री और विभाग के अधिकारियों को लिखे पत्र में आग्रह किया था कि फ्रंटलाइन ग्‍लोबल कंपनी निविदा के कई शर्तों को पूरा नहीं करती हैं. उन्‍होंने पत्र में कहा कि नियम के अनुसार आवेदन करने वाली कंपनी की उम्र पहली अप्रैल 2015 को कम से कम तीन साल होनी चाहिये, जबकि कंपनी  मात्र एक साल पुरानी है. एक और नियम के अनुसार टेंडर में शामिल कंपनी को तीन साल का संबंधित क्षेत्र में कार्य का अनुभव भी होना चाहिये, लेकिन फ्रंटलाइन कंपनी ने अपने डीड में एक साल का अनुभव बताया था.

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जिस सिटी मैनेजर ने आपत्ति की उसे निविदा चयन समिति से बाहर कर दिया

सिटी मैनेजर ने पत्र में कहा था कि वह निविदा चयन समिति का एक हिस्‍सा थे. उन्होंने उसकी स्‍क्रूटनी की थी और दस्‍तावेज के अनुसार उन्होंने उसमें अपनी प्रतिक्रिया भी लिख दी थी. साथ ही निविदा को स्‍वीकार करने से इनकार कर दिया. उसके बाद उन्हें निविदा चयन समिति से बाहर कर दिया गया. फिर उन्हें टीम से बाहर रखकर दूसरे सिटी मैनेजर विनय कुमार के नेतृत्‍व में छह दिनों के भीतर निविदा का पुर्नमूल्‍यांन कराया गया और टेंडर को अप्रूव कर दिया गया. उन्‍होंने अपने पत्र के जरिये कौशल विकास योजना के तह‍त कंपनियों और एजेंसियों को काम देने में हेराफेरी की जांच कराने की मांग की थी.  

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