रांची : सरकार ने नियमों को ताक पर रख अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी को दिया काम, प्रभातम कंपनी को अनुभवहीन कह हटाया

Submitted by NEWSWING on Tue, 02/13/2018 - 17:30


Ranchi : सरकार ने अपनी पसंदीदा कंपनी अर्नेस्ट एंड यंग को काम देने के लिए सभी नियमों को ताक पर रख दिया. इस कंपनी को जिस अनुभव पर काम दिया गया, उसी अनुभव के साथ पहले से काम कर रही प्रभातम को ये कहते हुए हटा दिया गया कि इसके पास पर्याप्त अनुभव नहीं है.

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सरकार ने नहीं समझी जांच की भी जरूरत
अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी ने सरकार को दिग्भ्रमित करते हुए यह कहा कि कंपनी के पास राज्य सरकार के ही माइंस, जियोलॉजी विभाग, उच्च शिक्षा और कौशल  विकास विभाग के लिए काम करने का अनुभव है, पर यह झूठ था. इसकी सरकार ने किसी प्रकार की कोई जांच नहीं की जो नियमतः जरुरी थी और काम अपनी पसंदीदा कंपनी को दे दी. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि कंपनी के लिए प्रारंभिक प्रक्रिया 22 जून को शुरु हुई और अगले दिन ही पूरे प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए भेज दिया गया. यह स्पष्ट भी किया गया है कि मनोनयन के माध्यम से 20.28 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट राज्य हित में नहीं है. 

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36 माह के लिए 14.48 करोड़ रुपये किये गये निर्धारित

कंसल्टेंसी चार्ज 36 माह के लिए 14.48 करोड़ रुपये निर्धारित किये गये, जो मासिक किस्तों में भुगतान का अनुमोदन किया गया था, जिसका निदेशालय  इंडियन रिपोर्टकार्ड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इकरारनामा पर हस्ताक्षर किया गया. 22 मई 2017 से प्रस्ताव की प्रारंभिक शुरुआत हुई एवं 23 मई 2017 को कैबिनेट ने नियम को शिथिल करते हुए संपूर्ण प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया. वित्त विभाग के जरिये तथा अन्य विभाग के जरिये इतने कम समय में कार्य क्यों किया गया यह स्पष्ट नहीं है. कंपनी ने 15 जून 2017 से कार्य भी शुरु कर दिया. 

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क्या है मामला

भारत के महालेखाकार द्वारा पाया गया कि झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा तीन कंसल्टेंट के साथ दिसंबर 2015 में कांट्रैक्ट साइन किया गया. बीडिंग प्रक्रिया के बाद विभाग द्वारा प्रभातम ने कंसल्टेंसी वर्क के लिए इच्छा जाहिर की, जिसके बाद सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक  ने दिसंबर 2015 में 42 माह के एकरारनामा पर भुगतान किया था, जिसकी कुल राशि 2.57 करोड़ थी. जुलाई 2016 में अर्नेस्ट एंड यंग का सरकार ने नियम के विरुद्ध जाकर मनोनयन कर लिया, क्योंकि राज्य सरकार को सात समिट करना था. और यह भी इसमें कहा गया कि प्रभातम को इस प्रकार की कोई एक्सपर्टिज नहीं है. उन्होंने ये भी कहा कि अर्नेस्ट एंड यंग झारखंड राज्य सरकार माइंस एंड जियोलॉजी विभाग के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा एवं कौशल  विकास विभाग के साथ काम कर रही है. 

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क्या कहता है नियम

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ नगर निगम की संख्या 10174 में स्पष्ट रुप से कहा है कि राज्य सरकारें कॉन्ट्रैक्ट  पब्लिक नोटिस के जरिये मांगी गयी निविदा के माध्यम से ही देगी. ऐसा इसलिए किया गया, ताकि पारदर्शिता  बनी रहे साथ ही भ्रष्टाचार आदि पर रोक लगी रही.
झारखंड फाइनेंसियल रुल 2005 का 181 बी के तहत 10 लाख से ऊपर किसी भी कार्य के लिए विज्ञापन के माध्यम से टेंडर किया जाना अनिवार्य है. इसी प्रकार झारखंड फाइनेंसियल रुल 176 दवारा सिंगल सोर्स का मनोनयन केवल विशेष  परिस्थिति में ही किया जा  सकता है. किसी प्रकार झारखंड फाइनेंसियल रुल 235 तथा वित्त विभाग का रेसोल्यूशन नंबर 221  3 फरवरी 2011 के जरिये यह बात स्पष्ट है कि 1.5 लाख से ऊपर के किसी भी प्रकार के कार्य के लिए निविदा की मांग की जायेगी.   

झारखंड फाइनेंसियल रुल के नियम 239 के तहत सभी प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट  में सिक्यूरिटी डिपोजिट रहना अनिवार्य है. यह सिक्यूरिटी डिपोजिट एनएससी बैंक गारंटी के तौर पर या दस प्रतिशत  घटा कर लिया जाता है,  जबकि इंडियन रिपोर्ट कार्ड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा निदेशक  सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक द्वारा हस्तांतरित एकरारनामा का कोई जिक्र नहीं है. इस कंपनी द्वारा थर्ड पार्टी द्वारा किसी भी प्रकार से नुकसान हेतु अपनी जिम्मेवारी रखता है. जहां सरकार द्वारा सरकार को सही घोषित किया गया, वहीं कंपनी को सिक्यूरिटी से हो रही घोषित का नुकसान होने का प्रावधान किया गया है.

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नेपाल हाउस के सरकारी कार्यालय में है अर्नेस्ट एंड यंग का ऑफिस

अर्नेस्ट एंड यंग झारखंड सरकार की नॉलेज पार्टनर है. दुनिया के सौ से ज्यादा देशों में कंपनी अपना कारोबार कर रही है. कंपनी के पास न ही पूंजी की कमी है और न ही झारखंड सरकार इसे कम पैसे दे रही है. बावजूद इसके कंपनी का कार्यालय नेपाल हाउस के उद्योग भवन में है. सिंगल विंडो सिस्टम के कार्यालय में इस कंपनी का कब्जा है. कंपनी का दावा है कि वे अभी सरकार के लिए निवेश  लाने और ऑनलाइन से जुड़े सारे काम कर रही है.

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