रघु मुंडा और फाल्गुनी देवी ऐसे हो गये मोहम्मद कामरान और खुशनुमा परवीन

Submitted by NEWSWING on Tue, 02/13/2018 - 19:26

Md. Asghar Khan

Ranchi: धर्मांतरण बिल को सूबे में लाने वाली झारखंड सरकार के कर्मी लोगों का धर्म परिवर्तन करने का काम कर रही हैं. हिंदू को मुस्लिम और मुस्लिम को हिंदू बनाने का काम कागजों पर हो रहा है. जिसका असर धर्मिक रूप से तो नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से लोगों पर पड़ रहा है. रांची के बरियातू पेट्रोल पम्प पर रघु सिंह मुंडा ठेले पर चाय और अंडे की दुकान लगाते हैं. गरीबी का दंश झेल रहे हैं तो चाहते हैं कि उनका राशन कार्ड बन जाए, ताकि सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके. पिछले कई महीनों से इसके लिए प्रयासरत भी हैं, पर अड़चन आधार कार्ड बना हुआ है. दरसअल रघु सिंह मुंडा और उनकी पत्नी फाल्गुणी देवी का आधार कार्ड तो है, लेकिन उसमें नाम मोहम्मद कामरान और उनकी पत्नी खुशनुमा परवीन दर्ज है.

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आधार कार्ड की वजह से नहीं बन रहा राशन कार्ड

रघु सिंह मुंडा बरियातू में रहते हैं और एक साल पहले उन्होंने अपने परिवार का आधार कार्ड बनवाया है. लेकिन जब राशन कार्ड बनवाने प्रज्ञा केंद्र पहुंचे तो पता चलता है कि उनके आधार नंबर पर मोहम्मद कामरान और उनकी पत्नी खुशनुमा परवीन का राशन कार्ड पहले ही बन चुका है. प्रज्ञा केंद्र वाले कहते हैं कि आपका राशन कार्ड नहीं बन सकता है, क्योंकि इस आधार नंबर से पहले ही किसी और राशन कार्ड बना हुआ है. मुंडा कहते हैं कि ये हमारी गलती तो है नहीं, फिर हम अपनी दुकान बंद करके इसे ठीक करवाने कहां-कहां जाएं. ये सब आधार कार्ड की वजह से हो रहा है. 

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रोज पहुंचती है आधार से जुड़ीं 200 शिकायतें

आधार में नाम, पता और नंबर गलत होना आम बात है. झारखंड में आधार कार्ड की त्रुटियां गरीब जनता की जान तक ले लेती है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रांची जिला आपूर्ति पदाधिकारी कार्यालय में रोजना आधार कार्ड से संबंधित दो सौ गड़बड़ियां पहुंचती है. जबकि जिला पदाधिकारी नरेंद्र गुप्ता कहते हैं कि इस तरह की शिकायत अब नहीं आती है. वहीं कार्यालय पहुंची 16 नंबर वार्ड की सबीना खातून की समस्या भी आधार कार्ड को लेकर ही है. उन्हें पिछले तीन माह से डीलर ने राशन नहीं दिया है. सबीना खातून, पति इम्तेयाज व उनके बच्चे का अंगूठा आधार कार्ड से मैच नहीं कर रहा है, जिसकी वजह डीलर उन्हें राशन नहीं दे रहा है. सबीना का कहना है कि पहले ऐसी कोई भी समास्या नहीं थी. 

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आधार से लिंक नहीं होने के कारण रद्द किये गये राशन कार्ड 

भोजन के अधिकार अभियान पर काम करने वाले धीरज कुमार कहते हैं सरकार ने जो 11 लाख 64 राशन कार्ड को फर्जी बताकर रद्द कर दिया. इसमें अधिकांश कार्ड सिर्फ इसलिए रद्द किये गये क्योंकि वे आधार कार्ड से लिंक नहीं हो पाए.

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