ATM खाली-लोग परेशान, जेटली ने कहा अचानक बढ़ गयी करेंसी की मांग, राज्यमंत्री ने कहा- कुछ राज्यों में कम, कुछ के पास ज्यादा करेंसी

Submitted by NEWSWING on Tue, 04/17/2018 - 13:46

NewDelhi: देश के कई राज्यों में करंसी संकट गहरा रहा है. कुछ इलाकों में तो नोटबंदी जैसे हालात हैं. कैश की किल्लत को लेकर उठते सवालों पर देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि देश में करंसी संकट नहीं है. उन्होंने ट्वीट कर खाली पड़े एटीएम को लेकर कहा कि कुछ इलाकों में नोटों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है. सरकार ने देश में करंसी के हालात की समीक्षा की है. वित्त मंत्री ने कहा कि देश में जरूरत से ज्यादा नोट सर्कुलेशन में हैं और बैंकों में भी पर्याप्त नोट उपलब्ध हैं.

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तीन दिनों में खत्म होगी समस्या: केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री 

वही वित्त मंत्री से पहले केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रसाद शुक्ल ने कहा है कि देश में कैश की किल्लत दो-तीन दिन में दूर हो जाएगी और देश में नकदी की कोई कमी नहीं है. शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि फिलहाल रिजर्व बैंक के पास 1,25,000 करोड़ रुपये नकद है. समस्या बस कुछ असमानता की हालत बन जाने की वजह से हुई है. दरअसल कुछ राज्यों में कम करेंसी है तो कुछ में ज्यादा. सरकार ने राज्यवार समितियां बनाई हैं और रिजर्व बैंक ने भी अपनी एक कमिटी बनाई है ताकि एक से दूसरे राज्य तक नकदी का ट्रांसफर हो सके.

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वित्त मंत्री का ट्वीट

RBI भी एक्टिव

एटीएम में कैश की किल्लत कम करने के लिए सरकार के साथ-साथ रिजर्व बैंक भी एक्टिव हो गया है. रिजर्व बैंक ने इन राज्यों में नकदी की आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए हैं और उम्मीद जताई है कि जल्दी ही हालात सामान्य हो जाएंगे. रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से यह संकट खड़ा हुआ है.

FRDI के खौफ से खाली हुए ATM !

भले ही आरबीआई और सरकार दावा करें कि देश में कैश की कमी नहीं है, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफिसर कन्फेडरेशन ने दावा किया है कि देश में 30 से 40 फीसदी कैश की कमी है और यह कमी रिजर्व बैंक द्वारा लगातार डिजिटल इकोनॉमी का दबाव बनाने से हुई है. आजतक को मिली जानकारी के अनुसार, अधिकारियों के इस संगठन ने दावा किया है कि देशभर में लोगों में केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित एफआरडीआई बिल का खौफ है, लिहाजा लोग बैंक में पैसा जमा करने की जगह कैश अपने पास रखने को तरजीह दे रहे हैं. इस संगठन के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया डिजिटल इकोनॉमी बनाने के लिए कैश की राशनिंग कर रहा है जिससे कई राज्यों में कैश का संकट देखने को मिल रहा है. सर्कुलेशन में 30 से 40 फीसदी करेंसी की कमी 2000 रुपये और 500 रुपये की करेंसी सर्कुलेशन से बाहर जाने के चलते पैदा हुई है.

क्या है FRDI बिल

प्रस्तावित एफआरडीआई बिल के जरिए केन्द्र सरकार सभी वित्तीय संस्थाओं जैसे बैंक,  इंश्योरेंस कंपनी और अन्य वित्तीय संगठनों का इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड के तहत उचित निराकरण करना चाह रही है. इस बिल को कानून बनाकर केन्द्र सरकार बीमार पड़ी वित्तीय कंपनियों को संकट से उबारने की कोशिश करेगी. इस बिल की जरूरत 2008 के वित्तीय संकट के बाद महसूस की गई जब कई हाई-प्रोफाइल बैंकरप्सी देखने को मिली थी.

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दरअसल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात समेत कई राज्यों में बीते कई सप्ताह से जारी कैश की किल्लत से उहापोह की स्थिति पैदा हो गई है. कैश की कमी की वजह से लोगों को खासी परेशानी हो रही है. रोजमर्रा के सामान और सब्जियां भी नहीं खरीद पा रहे हैं. 

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