बकोरिया कांडः प्राथमिकी में 11 बजे हुई मुठभेड़, तब के लातेहार एसपी अजय लिंडा ने अपनी गवाही में कहा रात 2.30 बजे तक एसपी पलामू को नहीं था पता

Submitted by NEWSWING on Tue, 02/06/2018 - 07:33

Ranchi: आठ जून 2015 की रात पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया के जिस कथित मुठभेड़ में नक्सली अनुराग और 11  निर्दोष लोग मारे गए थे, उस मामले में लातेहार के तत्कालीन एसपी अजय लिंडा ने अपनी गवाही दर्ज करा दी है. अजय लिंडा ने अपने लिखित बयान में कहा है कि आठ जून की रात 2.30 बजे तक पलामू एसपी को इस बात की कोई सूचना नहीं थी कि वहां पर मुठभेड़ हुआ था. उल्लेखनीय है कि घटना को लेकर दर्ज प्राथमिकी में मुठभेड़ का वक्त रात 11.00 बजे का बताया गया है. प्राथमिकी में इस बात का भी जिक्र है कि मुठभेड़ की सूचना तुरंत पलामू के एसपी कन्हैया मयूर पटेल को दी गयी थी. 

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अजय लिंडा ने अपने बयान में कहा है कि आठ जून की रात फोन ड्यूटी ने उन्हें जगाया था और मुख्यालय में बात करने के लिए कहा था. इसके कुछ देर बाद पलामू रेंज के तत्कालीन डीआइजी हेमंत सोरेन ने उन्हें फोन करके पूछा था कि मनिका थाना क्षेत्र में कोई मुठभेड़ हुआ है. तब उन्होंने मनिका थाना के प्रभारी से पूछा था. थाना प्रभारी ने किसी तरह का मुठभेड़ होने से इंकार किया था. बाद में सीआऱपीएफ के तत्कालीन आइजी आरके मिश्रा ने उन्हें फोन करके बताया कि मनिका थाना क्षेत्र से सटे पलामू जिला में पुलिस व नक्सलियों के बीत मुठभेड़ हुआ है. इस सूचना पर जब वह पुलिस फोर्स के साथ पहले मनिका और फिर बकोरिया में पहुंचे, तो वहां पर एक जगह पर पलामू एसपी कन्हैया मयूर पटेल बैठे थे. रात के करीब 2.30 बजे जब अजय लिंडा ने पलामू एसपी श्री पटेल से मुठभेड़ के बारे में पूछा, तो श्री पटेल ने किसी मुठभेड़ की जानकारी होने से इंकार किया. यहां उल्लेखनीय है कि तत्कालीन डीआइजी ने भी अपने बयान में कहा है कि आठ जून की रात डीजीपी डीके पांडेय ने उन्हें मुठभेड़ के बारे में पूछा था. जब उन्होंने पलामू एसपी और सतबरवा थाना प्रभारी से पूछा था, तब दोनों ने मुठभेड़ होने की बात से इंकार किया था. 

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मुठभेड़ जैसी गंभीर मामले के आरोपी की लगातार जिलों में पोस्टिंग

बकोरिया में हुए कथित मुठभेड़, जिसमें 11 निर्दोष लोग मारे गए, उसमें एक आरोपी पलामू के तत्कालीन एसपी कन्हैया मयूर पटेल हैं. उन पर सरकार  और पुलिस मुख्यालय की कृपा अब भी भी बनी हुई है. पलामू के बाद उनका तबादला दुमका जिला किया गया. लंबे समय तक दुमका में एसपी रहने के बाद पांच फरवरी को सरकार ने उनका तबादला चाईबासा जिला में किया है. आयरन ओर खादानों के कारण चाईबासा जिला पुलिस और माइनिंग विभाग के अफसरोंं के लिए झारखंड का मलाईदार जिला माना जाता है.

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