पलामू: नव पाषाण और ताम्र पाषाण काल को समेटे कबरा कला में शुरू हुआ खुदाई कार्य, मिल सकते हैं पुरावशेष 

Submitted by NEWSWING on Fri, 01/05/2018 - 14:25

Daltonganj : नवपाषाण काल से लेकर ब्रिटिश काल तक के पुरातात्विक अवशेषों का भंडार कहे जाने वाले कबरा कला में खुदाई कार्य शुरू किया गया. आर्केलऑजिक सर्वे ऑफ इंडिया रांची की टीम यहां पहुंची चुकी है. सोन और उतर कोयल के संगम पर स्थित यह गांव पलामू जिला मुख्यालय से करीब 95 किलोमीटर दूर और हुसैनाबाद अनुमंडल से करीब 15 किलोमीटर दूर है. दूसरी ओर दक्षिण-पश्चिम में बिहार के इतिहास प्रसिद्ध रोहतास किला से लगभग 20 किलोमीटर दूर है.

कबरा कला के गर्भ में नव पाषाण और ताम्र पाषाण काल

जिले के हैदरनगर प्रखंड के परता ग्राम पंचायत अंतर्गत आने वाला कबराकला गांव अपने गर्भ में नव पाषाण और ताम्र पाषाण काल को समेटे हुए है. यह इलाका लौह, बुद्ध, मौर्य, शुंग, गुप्त, पाल, मुगल एवं ब्रिटिश काल तक के पुरातात्विक अवशेषों से भरा पड़ा है. प्राचीन काल में एक मुख्य सड़क मार्ग यहां से गुजरती थी, जो पाटलिपुत्र से कलिंग और उज्जैन होते हुए भड़ौच जाती थी. यहां खेत एवं घरों की बुनियाद की खुदायी के दौरान न केवल पुरावशेष एवं पुरानिधियां मिलीं हैं, बल्कि अनेक स्थलों पर बड़ी-बड़ी पक्की ईंटों से निर्मित चौड़ी-चौड़ी दीवारें और सुरंगें भी मिले हैं.

मिले पाषाण काल के कई औजार

कबरा कला गांव में उच्च पुरापाषाण काल के प्रस्तर निर्मित एक विदरणी प्राप्त हुई है, जिसका उपयोग प्रागैतिहासिक काल में जानवरों के मांस को छोटे-छोटे टुकड़ों में करने के लिए किया जाता था. यहां से नव पाषाण काल के प्रस्तर औजार एवं ताम्र पाषाण काल के मृदभांड के साथ-साथ पूजा के जल पात्र मिले हैं और  लौक काल के पिघले लोहे का अवशिष्ट अंश के साथ-साथ पर्याप्त काला लाल मृदभांड भी मिले हैं. गांव के दक्षिण में स्लेटी रंग के पर्याप्त मृदभांड बिखरे पड़े हैं. सोन घाटी पुरातत्व के अध्यक्ष अंगद किशोर एवं सचिव तापस डे का मानना है कि कबरा कला गांव में उत्खनन से सोन घाटी की सभ्यता का उद्भेदन होगा, जो भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा.   

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कौन-कौन हैं टीम में

टीम में अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. हरिओम शरण, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ.पूनम विंद शामिल हैं. टीम के आने की सूचना मिलने पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनोज कुमार महतो व हैदरनगर के प्रखंड विकास पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार रजक कबरा कलां गांव पहुंचे. उन्होंने टीम के लोगों के साथ विचार विमर्श किया.

तत्काल कुछ भी बता पाना होगी जल्दबाजी : डॉ शरण

टीम के सदस्यों ने पूरे गांव का भ्रमण किया औक खुदायी स्थल का चयन किया. टीम ने ग्रामीणों को मिट्टी से प्राप्त हुए अवशेष का भी अवलोकन किया. टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. हरिओम शरण ने बताया कि उन्हें कबरा कला भेजा गया है. खुदायी की लंबी प्रक्रिया चलेगी. खुदाई का कार्य शुरु होने के बाद उनके उच्च पदाधिकारी भी कबरा कलां आयेंगे. कबरा कलां के इतिहास के संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. आने वाले समय में सबकुछ साफ हो जायेगा.

ग्रामीणों में उत्सुकता

स्थानीय कमेटी के सदस्यों ने टीम को हर संभव सहयोग करने का भी भरोसा दिलाया है. स्थानीय ग्रामीणों ने टीम से पूछा कि यहां से खुदाई में मिले अवशेष को वो क्या करेंगे?  टीम के सदस्यों ने बताया कि वो उसे सूचिबद्ध कर विभाग को सौंप देंगे. वहां अवशेष सुरक्षित रहेगा. सरकार अगर म्युजियम बनाती है तो मिले सामान उसमें रखे जा सकते हैं. डोरंडा कालेज रांची के व्याख्याता डॉ. अभिषेक कुमार गुप्ता स्थानीय होने के नाते टीम को पूरा सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि टीम के सदस्यों के लिए रहने की व्यवस्था उ.म.वि कबरा कला में की गई है.

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