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#Adani पावर प्लांट के लिए संविधान को ताक पर रख गोड्डा में किया गया है भूमि अधिग्रहण: चिंतामणि साह

Pravin Kumar

Godda: “राज्य के सीएम रघुवर दास कई बार कह चुके हैं कि एसपीटी एक्ट, सीएनटी एक्ट से अधिक कड़ा है, इसमें आदिवासी भी आदिवासी की जमीन नहीं ले सकता, तो आखिर कैसे गोड्डा में अडानी पावर प्लांट के लिए किसानों की जमीन ली गयी?”

यह सवाल गोड्डा के किसान चिंतामणि साह ने उठाया है. न्यूजविंग से बातचीत में उन्होंने कहा, “आदिवासियों, दलितों की जमीन रघुवर सरकार के संरक्षण में अडानी पावर प्लांट के लिए किसानों से छीनी गयी है. सीएम गोड्डा के मोतिया गांव में आ कर देखें कैसे किसानों की जमीन लूटी गयी है. यहां अडानी के पावर प्लांट के लिए नियम कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाकर भूमि अधिग्रहण किया गया है.”

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साह ने कहा, “संथाल परगना की जमीन की खरीद-बिक्री एसपीटी एक्ट के तहत प्रतिबंधित है. वर्तमान सरकार ने एसपीटी एक्ट, भूमि अधिग्रहण कानून 2013, पंचायत राज्य विस्तार अधिनियम 1996 में ग्रामसभा के दिये गये अधिकारों का भी उल्लंघन कर कंपनी के लिए जमीन अधिग्रहण किया है.”

चिंतामणि साह से बातचीत का वीडियो नीचे क्लिक कर देखें

चिंतामणि साह द्वारा उठाये गये प्रमुख बिंदू

झारखंड के संथाल परगना इलाके में एसपीटी (Santal Parganas Tenancy) एक्ट लागू है जिसमें स्पष्ट लिखा है कि इलाके की जमीन की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती. एक्ट के सेक्शन 20 के अनुसार, सरकार सिर्फ लोक प्रयोजन के लिए ही जमीन का अधिग्रहण कर सकती है.

लेकिन यहां सरकार द्वारा एक निजी कंपनी के लिए जमीन अधिग्रहण किया गया है. अडानी पावर प्लांट में राज्य सरकार का कोई शेयर नहीं है और इसका लाभ भी राज्य को नहीं मिलने वाला है.

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झारखंड सरकार के एडवोकेट जनरल के मंतव्य को आधार बनाकर लोक प्रयोजन दिखा कर अवैध ढंग से जमीन अधिग्रहण किया गया है.

भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के सेक्शन 10 में लिखा गया है कि बहुफसली और सिंचित भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता, जबकि इलाके की 80 प्रतिशत जमीन (जिसमें अडानी पावर प्लांट बन रहा है वह भी) सिंचित एवं बहुफसली है. इस तरह भाजपा सरकार ने सेक्शन 10 का भी पूरी तरह उल्लंघन किया है.

इन नियमों की भी परवाह नहीं की

सेक्शन-8 का उल्लंघन

चिंतामणि साह कहते हैं, भू-अर्जन कानून के सेक्शन-8 में कहा गया है जिला में अगर पूर्व में किसी परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ हो तो पहले उसका उपयोग किया जाये. साह ने बताया कि 2011 में भूषण स्टील प्लांट लगाने के लिए सुंदरपहाड़ी में 1100 एकड़ जमीन अधिग्रहण किया गया था. उस जमीन का उपयोग आज तक नही हुआ. इसके बाद भी बहुफसली भूमि जबरन तत्कालीन डीसी अधिग्रहित कर ली.

सेक्शन-26

भू-अर्जन कानून 2013 के सेक्शन-26 में फसल के आधार पर मूल्यांकन करने की बात है. साह कहते हैं कि एसपीटी एक्ट के प्रावधान के अनुसार, संथाल परगना की जमीन बिकाऊ नहीं है, तो किस आधार पर मूल्य का निर्धारण सरकार ने किसानों को जबरन मुआवजा दिया.

सेक्शन-5

भू-अधिग्रहण कानून 2013 के सेक्शन-5 में जनसुनवाई का प्रावधान है. साह कहते हैं 6 दिसंबर 2016 को अडानी पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण संबंधी जनसुनवाई लाठी, बंदूक के बल पर और प्रशासन के सहयोग से की गयी. इस तरह सरकार ने जनसुनवाई को भी नौटंकी बना दिया और किसानों का पक्ष सामने नहीं आया.

जहां अडानी प्लांट बन रहा है, वहां के किसानों का क्या है हाल

चिंतामणि साह कहते हैं, “देश में किसान निरीह प्राणी हैं. प्रधानमंत्री मोदी से रघुवर दास तक किसानों की आय वृद्धि और समृद्धि की बात करते हैं. खेती-किसानी को बढ़ावा देने की बात वर्तमान राज्य सरकार करती रही है लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ अलग है.

गोडडा में जहां अडानी पावर प्लांट बन रहा है वहां 80 प्रतिशत किसानों की अजीविका कृषि से चलती थी. किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते थे, लेकिन जबरन किसानों के बैक खातों में आरटीजीएस कर मुआवाजा राशि भेजी गयी.

जब किसान विरोध करते हैं तो कंपनी के लोग कहते हैं- मुआवजा लिये हो, विरोध करोगे तो जेल में डाल देंगे.
अभी तक 550 एकड़ रैयती और 60 से 65 एकड़ सामुदायिक जमीन की घेराबंदी कर प्लांट निर्माण किया जा रहा है. 15 से 20 किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है पर उनकी जमीन को भी अडानी ने कब्जा कर लिया है.

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