कंबल घोटालाः घोटालेबाजों पर कार्रवाई की फाइल को डेढ़ माह से दबाये हुए हैं "बेदाग सरकार" वाले सीएम के प्रधान सचिव सुनील बर्णवाल

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 03/22/2018 - 10:17

- विकास आयुक्त ने 14 फरवरी को दिया था कार्रवाई करने का आदेश

Akshay Kumar Jha
Ranchi:
अभी ठंड पूरी तरह से गयी भी नहीं थी. सरकारी कंबल से गुनगुनी गर्मी ली ही जा रही थी, कि लातेहार जिला के पोखरीतला से कुछ लोग 13 जनवरी को सीएस के कार्यालय में कंबल बनाने को लेकर शिकायत लेकर आ गए. यहीं से 18 करोड़ रुपये के कंबल घोटाले की परत-दर-परत सच सामने आने लगा. शिकायत करने वाले सलाउद्दीन अंसारी, इमामुद्दीन हक, नईमुद्दीन अंसारी और मो. मुस्ताख का कहना था कि लातेहार जिले के पोखरीतला के जिस बुनकर को कंबल बनाने के काम दिया गया है और जिस पैमाने पर दिया गया है, उस काम को करने के लिए उसके पास लुम (करघा) है ही नहीं. सिर्फ कागजों पर दिखा दिया गया है कि बुनकर ने हजारों कंबल बनाए. सीएस कार्यालय से शिकायत की कॉपी विकास आयुक्त कार्यालय भेज दी गयी. विकास आयुक्त ने फौरन मामले की जांच करने के लिए उद्योग विभाग को लिखा. 

उद्योग विभाग ने दबायी फाइल, मिल रहा है घोटालेबाजों को संरक्षण
विकास आयुक्त अमित खरे ने 14 फरवरी को उद्योग विभाग के एमडी और सचिव सुनील बर्णवाल (जो सीएम के प्रधान सचिव भी हैं) को पूरे मामले को लेकर फाइनल प्रपोजल बानने को लिखा. लिखा कि जब जांच में शिकायत सही पायी गयी है, तो कंबल बनाने से लेकर बांटने तक की जांच सही तरीके से की जाए. दोबारा 28 फरवरी को विकास आयुक्त ने फिर से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई करने के लिए सुनील वर्णवाल को पत्र लिखा. पत्र लिखे जाने के करीब डेढ़ माह होने को है, लेकिन अभी तक उद्योग विभाग की तरफ से किसी तरह की कोई ना जांच समिति नहीं बनायी गयी है और ना ही किसी दोषी कर्मी पर कोई कार्रवाई के लिए विभाग की तरफ से अनुसंशा की गयी. उद्योग विभाग की इस चुप्पी के कारण कंबल घोटाले के आरोपियों को संरक्षण भी मिल रहा है.

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जांच में शिकायत सच पायी गयी
एक फरवरी को एमडी उद्योग ने जांच प्रक्रिया शुरू की. जांच के बाद पांच फरवरी को एमडी उद्योग ने जांच रिपोर्ट सौंपी. जांच में शिकायत सच पायी गयी. जिस बुनकर को कंबल बनाने का काम झारक्राफ्ट की तरफ से दिया गया था, उसके पास कंबल बनाने लायक लुम (करघा) ही नहीं था. जांच रिपोर्ट आने के बाद विकास आयुक्त ने बुनकर को दिए जाने वाले किसी भी भुगतान पर रोक लगा दी.

इधर एजी के ऑडिट में भी गड़बड़ी पायी गयी
सखी मंडल व बुनकरों के द्वारा 9 लाख कंबल निर्माण की अॉडिट का काम एजी कार्यालय में चल रहा था.  एजी ने अपने ऑडिट में कंबल बनाने के लेकर कई तरह के सवाल उठाए हैं. एजी ने एक-के-बाद-एक झारक्राफ्ट को सात चिट्ठी लिखी है. एजी ने कंबल बनाने और बांटे जाने तक कई बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं. ट्रांस्पोर्टिंग से लेकर बिना विभागीय अनुमति के टेंडर निकाले जाने पर एजी ने आपत्ति की है. एजी की आपत्तियों पर झारक्राफ्ट ने चुप्पी साध ली.

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बिना किसी अनुमति के एनएचडीसी के बजाय प्राइवेट लोगों को दिया टेंडर
सीएम रघुवर दास की घोषणाओं से एक तरफ सखी मंडल और बुनकर समिति सोच रहे थे कि उन्हें आने वाले दिनों में रोजगार मिलेगा. झारखंड की जनता समझ रही थी राज्य का पैसा राज्य में ही रहेगा. लेकिन दूसरी तरफ झारक्राफ्ट के अधिकारी अपना खेल कर रहे थे. झारक्राफ्ट ने कंबल बनाने को लेकर एनएचडीसी (नेशनल हैंडलूम डेलवपमेंट कॉरपोरेशन) को ऑडर ना देकर प्राइवेट लोगों को काम दे दिया. इसके लिए विभागीय स्तर पर किसी से अनुमति नहीं ली.  बिचौलियों की मदद से ऐसे-ऐसे लोगों को काम दिया गया, जिनके पास कंबल बनाने के लिए किसी तरह की कोई मशिनरी ही नहीं थे. इस बात को लेकर भी ऑडिट में एजी ने आपत्ति जतायी है. विभागीय कार्यवाही के तहत किसी प्राइवेट कंपनी को काम दिए जाने से पहले विभाग के एमडी से मंजूरी लेनी पड़ती है. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. बिना एमडी की मंजूरी के ही प्राइवेट छोटे-छोटे बुनकरों को कागजी तौर से बिचौलियों की मदद से काम दे दिया गया.

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Purchase कमेटी की अनुमति के बिना ही दे दिया ट्रांसपोर्टिंग का काम
कंबल घोटाले में झारक्राफ्ट ने कायदे-कानून का पालन नहीं किया. अधिकारियों ने बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के लिए कई स्तरों पर गड़बड़ी की. कंबल लाने और ले जाने के लिए ट्रांसपोर्ट की जरूरत पड़ी, तो मनमाने तरीके से सारा काम हरियाणा ट्रांसपोर्ट नामक कंपनी को दे दिया. इस काम के लिए पहले परचेज कमेटी से अनुमति लेनी जरुरी थी. लेकिन झारक्राफ्ट ने एेसा नहीं किया. बिना अनुमति के ही ट्रास्पोर्टिंग का काम हरियाणा ट्रास्पोर्ट को दे दिया गया. इसे भी लेकर एजी ने झारक्राफ्ट को चिट्ठी लिखी है. अब झारक्राफ्ट को मामले को लेकर ये नहीं सूझ रहा है कि जवाब क्या दिया जाए. 

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