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#BJP और #AJSU ने Post Alliance के लिए खुला छोड़ा है रास्ता !

Akshay Kumar Jha
Ranchi: झारखंड में चुनावी पारा चरम पर है. पहले और दूसरे चरण के लिए नामांकन कर नेता जी तोड़ प्रचार में जुटे हैं. सभी पार्टी ने स्टार प्रचारकों से प्रचार की शुरुआत भी कर दी है.

एक तरफ चुनाव में जीत हार का गणीत चल रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनाव के बाद सरकार बनाने की रणनीति पर ही खामोशी से काम हो रहा है. बीजेपी और आजसू एक ऐसी रणनीति पर चुनाव लड़ रही है, जिससे चुनाव के बाद सरकार बनाते वक्त एक दूसरे से सरकार बनाने के लिए गठबंधन करना पड़े तो उसमें कोई परेशानी नहीं हो.

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चुनाव प्रचार में भी देखा जा रहा है कि आजसू के नेता सीधा सरकार पर निशाना नहीं साध रहे हैं. तो वहीं बीजेपी भी आजसू को डायरेक्ट हिट नहीं कर रही है. उम्मीदवार उतारने में भी दोनों पार्टियों ने एक ऐसी तरकीब पर काम किया है, जिससे दोनों गठबंधन बनाने के लिए सेफ जोन में हैं.

9 सीटों पर बीजेपी का सरेंडर डमी उम्मीदवार उतारने की तैयारी

अभी तक बीजेपी की तरफ से 71 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे जा चुके हैं. एक सीट हुसैनाबाद पर बीजेपी ने निर्दलीय उम्मीदवार विनोद सिंह को समर्थन देने की बात की है. जबकि हुसैनाबाद में आजसू की तरफ से बसपा से आये शिवपूजन मेहता को उम्मीदवार बनाया है. यहां भी बीजेपी ने एक तरह से सरेंडर किया.

सिल्ली में आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो खुद चुनाव लड़ रहे हैं. यहां भी बीजेपी उम्मीदवार नहीं उतारने जा रही है. पाकुड़ विधानसभा गठबंधन के बाद कांग्रेस के खाते में चली गयी. जिसके बाद जेएमएम के पुराने नेता अखील अख्तर ने आजसू का हाथ थाम लिया. आजसू ने पाकुड़ में उन्हें उम्मीदवार बना लिया है. जिसके बाद बीजेपी ने उस सीट को लेकर खामोशी थाम ली. कहा जा रहा है कि अगर बीजेपी कोई उम्मीदवार उतारेगी भी तो वो एक तरह से डमी उम्मीदवार ही होगा.

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गोमिया से आजसू के उम्मीदवार लंबोदर महतो हैं. उन्हें सांसद सीपी चौधरी का खास माना जाता है. करीब चार साल से वो गोमिया में सक्रिय राजनीति कर रहे हैं. पिछले उपचुनाव में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया था. महज 1300 वोट से वो जेएमएम के उम्मीदवार बबीता देवी से चुनाव हारे थे. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी यहां भी आजसू के सामने सरेंडर मोड में ही है. उम्मीदवार उतरेगा भी तो कोई डमी उम्मीदवार ही होगा.

यही हाल रामगढ़ का है. यहां से सीपी चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी उम्मीदवार हैं. बड़कागांव से सीपी चौधरी के भाई रोशन लाल उम्मीदवार हैं. टुंडी में आजसू से राज किशोर महतो उम्मीदवार हैं, जिनके सामने भी बीजेपी सरेंडर मोड में है.

डुमरी विधानसभा को लेकर ना ही आजसू और ना ही बीजेपी की तरफ से उम्मीदवार फाइनल किया जा रहा है. लोकसभा चुनाव में डुमरी विधानसभा में आजसू ने बेहतर प्रदर्शन किया था. कहा तो यह भी जा है कि सुदेश इस सीट से भी किस्मत आजमा सकते हैं. वहीं कांके पर बीजेपी की चुप्पी राजनीतिक समझ के परे है.

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दोनों पार्टी ने एक-दूसरे के मुखिया के खिलाफ नहीं उतारा उम्मीदवार

राजनीति में दोस्ती भी तुम ही से और तकरार भी तुमसे वाले फॉर्मूले पर आजसू और बीजेपी दोनों काम कर रही है. दोनों पार्टी के आलाकमान के खिलाफ किसी ने उममीदवार नहीं उतारा है. इससे साफ होता है कि प्री एलायंस ना होने के बाद दोनों पार्टी पोस्ट एलायंस की राह पर है.

पूर्वी सिंहभूम जो सरयू राय के निर्दलीय मैदान में उतरने से झारखंड का सबसे हॉट सीट बना हुआ है. वहां भी आजसू ने बीजेपी सरकार के सीएम रघुवर दास के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है. ऐसा कर आजसू ने सिल्ली में सुदेश के खिलाफ बीजेपी का उम्मीदवार ना उतारने के लिए शायद थैंक्यू कहा है.

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