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#AyodhyaVerdict: SC का ऐतिहासिक फैसलाः विवादित जमीन रामलला की, मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन दे सरकार

NewDelhi: देश के सबसे विवादित और संवेदनशील मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामलला का बताया है. इस फैसले में विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का फैसला किया है.

यानी विवादित स्थान पर भगवान राम की मंदिर बनेगी. साथ ही मुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह देने का फैसला सुनाया है.

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राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील अयोध्या विवाद पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की 5 सदस्यीय बेंच ने फैसला सुनाया. और मंदिर निर्माण का काम केंद्र सरकार पर डाला गया है.

विवादित जमीन रामलला की

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर रामलाल विराजमान का मालिकाना हक बताया है. साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को अयोध्या में ही किसी दूसरी जगह पांच एकड़ जमीन मुस्लिम पक्षकार को देने का निर्देश दिया है. जिस पर मस्जिद बनायी जाये.

कोर्ट ने सरकार को तीन महीने में ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण का कार्य करें. सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज किया है. निर्मोही अखाड़ा रामलला जन्मस्थान पर सेवा देना चाहता है. जिसे कोर्ट ने खारिज किया है. जिसके बाद निर्मोही अखाड़े को सेवायत का अधिकार नहीं होगा. कोर्ट ने कहा कि अखाड़े का दावा लिमिटेशन से बाहर है.

शिया और सुन्नी मामले में एक मत फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज किया. और 1946 के फैसले को बरकारार रखा है. शिया बोर्ड ने जमीन अपनी होने का दावा किया था, जिसे कोर्ट ने खारिज किया. शिया बोर्ड जमीन हिंदूओं को देना चाहता था, जिसे भी कोर्ट ने खारिज किया है.

वहीं मुस्लिम पक्षकार इस फैसले से असंतुष्ट दिखे. सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट है.

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2.77 एकड़ जमीन पर था विवाद

अयोध्या में विवादित जमीन कुल 2.77 एकड़ की थी. वहीं इसके पास ही 67 एकड़ जमीन सरकार के पास की है. जबकि विवादित जमीन के पास ही सुन्नी वक्फ बोर्ड की भी जमीन है. राम जन्मभूमि की जमीन कुल 42 एकड़ है. इसके आसपास कई मंदिर भी हैं. लेकिन पूरा विवाद छोटे भूमिखंड को लेकर ही था, जहां बाबरी मस्जिद का गंबुद और राम लला विराजमान हैं. इस भूमिखंड में बाबरी मस्जिद ढांचा, राम लला विराजमान, राम चबूतरा, सिंहद्वार और सीता रसोई है.

क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

अयोध्या विवाद सदियों पुराना है. माना जाता है कि इसकी नींव लगभग 400 साल पहले ही पड़ गई थी. मामले को लेकर 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया गया था. इसमें से एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े को मिला.

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी थी. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपील दाखिल हुई थीं.

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