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जनसंख्या नियंत्रण को लेकर असम सरकार का बड़ा फैसला, 2020 के बाद दो से अधिक बच्चों वाले आवेदक को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी

Guwahati: भारत की बढ़ती जनसंख्या पर सरकार पहले से चिंतित है. वहीं जनसंख्या नियंत्रण को लेकर असम सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. असम की बीजेपी सरकार ने दो से अधिक बच्चे वाले लोग को सरकारी नौकरी नहीं देने का फैसला किया है.

असम मंत्रिमंडल ने सोमवार को फैसला किया कि एक जनवरी 2021 के बाद दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को कोई सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी. सोमवार देर शाम कैबिनेट की हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया.

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मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के जनसंपर्क प्रकोष्ठ द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि छोटे परिवार के मानक के अनुसार एक जनवरी 2021 से दो से अधिक बच्चे वालों को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी.
इसके साथ ही कैबिनेट मीटिंग में नयी भूमि नीति को भी मंजूरी दी गयी जिससे भूमिहीन लोगों को तीन बीघा कृषि भूमि और एक मकान बनाने के लिए आधा बीघा जमीन मिलेगी.

2 से ज्यादा बच्चे तो नहीं मिलेगी नौकरी

सितंबर 2017 में असम विधानसभा ने जनसंख्या और महिला सशक्तिकरण नीति को पास किया था. इस नीति के तहत सरकारी नौकरी के वैसे आवेदक जिनके दो बच्चे हैं, वो ही नौकरी के लिए योग्य होंगे. साथ ही मौजूदा सरकारी कर्मचारियों को भी सख्ती से दो बच्चों की नीति का पालन करना था.

हालांकि सरकार का यह आदेश असम सरकार के वर्तमान कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा. लेकिन सरकारी नौकरी के लिए नए सिरे से आवेदन करने वाले लोग इस नियम के दायरे में आएंगे.

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मजदूरों को तीन बीघा जमीन

इसके साथ ही कैबिनेट ने नई लैंड पॉलिसी को भी मंजूरी दी है. इसके तरत वैसे लोग जो असम के मूल निवासी हैं, लेकिन उनके पास जमीन नहीं है. उन्हें सोनोवाल सरकार की ओर से तीन बीघा जमीन दी जायेगी.

इसके अलावे घर बनाने के लिए भी असम सरकार आधा बीघा जमीन देगी. इस पॉलिसी के मुताबिक इस स्कीम का फायदा उठाने वाला शख्स 15 सालों तक इस जमीन को नहीं बेच पाएंगे. इसके अलावे कैबिनेट की इस बैठक में बसों का किराया भी 25 फीसदी बढ़ाने की घोषणा की गई है.

स्वतंत्रता दिवस पर पीएम ने की थी अपील

उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बढ़ती आबादी पर चिंता जताते हुए देश का ध्यान इस ओर आर्कषित किया था. उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि हमें आने वाली पीढ़ी के लिए सोचना होगा.

इस दौरान पीएम मोदी ने सीमित परिवार से परिवार के साथ देश का भी भला होने की बात कही थी. उन्होंने छोटे परिवार की पैरवी करते हुए कहा था कि छोटा परिवार रखना भी एक तरह से देशभक्ति ही है.

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