जीरो टॉलरेंस वाली सरकार ने नहीं करायी 3000 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाला की विस्तृत जांच

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/10/2018 - 09:41
पकरी-बरवाडीह कोल परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन की स्थिति

Ranchi: दिसंबर 2014 में शपथ लेने के बाद वर्तमान सरकार के मुखिया रघुवर दास ने कहा था कि यह सरकार जीरो टॉलरेंस के तहत काम करेगी. भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों पर तुरंत कार्रवाई होगी. लेकिन अधिकांश मामलों में एेसा नहीं हुआ. हजारीबाग के बड़कागांव में एनटीपीसी के पकरी-बरवाडीह कोल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के मुआवजा घोटाला में सरकार ने रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की. रिटायर आइएएस देवाशीष गुप्ता की रिपोर्ट को सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया. अब यह आशंका जतायी जा रही है कि आगे चल कर यह मामला भ्रष्टाचार और उसमें लिप्त अफसरों को बचाने का भी साबित हो सकता है.

छह माह बाद सचिव ने डीसी को दिया था कार्रवाई का निर्देश

देवाशीष गुप्ता की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने कार्रवाई के नाम पर मई 2017 में सिर्फ एक आदेश जारी किया. भू-राजस्व विभाग के सचिव केके सोन ने हजारीबाग के डीसी को पत्र लिख कर निर्देश दिया कि वह इस मामले के लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करें. किसी तरह की कार्रवाई हुई है, इसकी जानकारी नहीं है.  यहां उल्लेखनीय है कि मुआवजा घोटाले की जांच हजारीबाग के डीसी के स्तर से पहले ही करायी गयी थी. जांच रिपोर्ट आने के बाद डीसी के स्तर से सरकार को इसकी सूचना दी गयी और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या एसआइटी से जांच कराने की अनुशंसा की गयी. सरकार ने एसआइटी से जांच करायी.

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एनटीपीसी परियोजना की फाइल फोटोएसआइटी ने की थी विस्तृत जांच की अनुशंसा

 देवाशीष गुप्ता के नेतृत्व में गठित एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था कि मामले की विस्तृत जांच जरुरी है. क्योंकि जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करके गड़बड़ी की गयी है. एसआइटी की इतनी क्षमता नहीं है कि वह विस्तृत जांच कर सके. देवाशीष गुप्ता की रिपोर्ट पर पहले तो सरकार चुप रही. चूंकि इसे लेकर एक मामला हाई कोर्ट में भी चल रहा है. इसलिए सरकार ने मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने के बजाय मामले को दुबारा हजारीबाग डीसी के पास भेज दिया.

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हजारीबाग का बड़कागांव, जहां कोल परियोजना शुरु की गयीडीसी कैसे करते सीनियर अफसरों पर कार्रवाई

अब सवाल उठता है कि जब रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि पकरी-बरवाडीह कोल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर सरकार के स्तर से समय-समय पर अलग-अलग निर्देश जारी किए गए थे. मतलब जब जांच होगी, तब उन आदेशों-निर्देशों को जारी करने वाले अफसर भी जांच के दायरे में आयेंगे. ऐसी स्थिति में क्या किसी जिला के डीसी के लिए संभव है कि वह सचिवालय में बैठने वाले अपने सीनियर अफसरों से पूछताछ कर सकें.  देवाशीष गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट में जिन सरकारी आदेशों को वापस लेने की अनुशंसा की थी, वह आदेश वापस नहीं लिए गये. जिन अफसरों ने आदेश जारी किए, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं शुरु की गयी.

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