क्या साल 2018 के अंत तक नक्सलवाद-उग्रवाद मुक्त होगा झारखंड, या फिर बढ़ेगी समयसीमा

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 01/13/2018 - 14:40

Manjusha Bhardwaj

Ranchi : झारखंड अलग राज्य बनने के साथ ही उग्रवाद और नक्सलवाद से प्रेरित हिंसाएं इसे विरासत में मिली थीं. तभी से बहुत कोशिशों के बावजूद भी इस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है. झारखंड में समस्याओं की कोई कमी नहीं है. शिक्षा, स्वास्थ्य, भुखमरी, कुपोषण जैसी समस्याएं तो हैं ही लेकिन इन सबसे बड़ी और गंभीर समस्या है- नक्सलवाद. इसने झारखंड राज्य के लिए बड़ी चुनौती पेश की है.

क्या साल 2018 के अंत तक नक्सलवाद-उग्रवाद मुक्त होगा झारखंड

झारखंड के डीजीपी डीके पाण्डेय ने 10 जनवरी को यह दावा किया कि वर्ष 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सल और उग्रवाद मुक्त कर दिया जायेगा. राज्य के डीजीपी पाण्डेय ने यह भी दावा किया कि कुछ सीमावर्ती इलाकों को छोड़कर राज्य से पूरी तरह नक्सलवाद का सफाया कर दिया गया है. वहीं डीजीपी के इस दावे के साथ झारखंड से उग्रवाद के खात्मे की डेडलाईन एक साल और बढ़ गयी है. वर्ष 2017 में राज्य को उग्रवाद से मुक्त कराने का दावा करने वाले राज्य के पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय ने अब दावा किया है कि वर्ष 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सलवाद और उग्रवाद मुक्त कर दिया जायेगा. अगर इस समस्या का सफाया करने के लिये एक और साल की जरूरत थी तो फिर पहले डीजीपी ने 2017 में ही इसे खत्म करने का दावा कैसे कर दिया था. क्या ये दावा महज एक दिखावा था, या फिर यूं कहें कि उनके पास यह अंदाजा ही नहीं था कि इसे खत्म करने के लिये कितने वक्त की जरूरत है. क्योंकि अगर बात एक या दो महीने आगे बढ़ाने की होती तो समझा जा सकता था. लेकिन पूर्व में किये गये दावे को यहां बात एक दो महीने बढ़ाने की नहीं बल्कि एक साल और बढ़ाने की बात की है. तो क्या और एक साल झारखंड के लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ेगा, क्या एक और साल उन्हें खौफ में जीना पड़ेंगा.

इन इलाकों से नक्सलवाद खत्म करने का किया दावा

डीजीपी डीके पाण्डेय ने कहा कि पिछले तीन सालों में राज्य की पुलिस पूरे प्रदेश में सुरक्षा का माहौल देने में सफल रही है. साथ ही पुलिस ने राज्य के 13

Naxalite
Naxalite

नक्सल व उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर साल 2017 के अंत तक वहां से नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया कर दिया है. उन्होंने बताया कि झारखंड में सारण्डा, सरयू, पारसनाथ, चतरा, बानाताल, गिरिडीह-कोडरमा सीमावर्ती क्षेत्र, दुमका-गोड्डा सीमावर्ती क्षेत्र, खूंटी-चाईबासा सीमावर्ती क्षेत्र, खूंटी-सिमडेगा सीमावर्ती क्षेत्र, गढ़वा-लातेहार सीमावर्ती क्षेत्र, झुमरा पहाड़ी, जमशेदपुर, गुडाबंधा, डुमरिया एवं मुसाबनी और पलामू-चतरा सीमावर्ती क्षेत्र में कार्य योजना बनाकर पुलिस और सुरक्षा बलों ने एरिया डॉमिनेशन किया और वहां सुरक्षा बलों के शिविर स्थापित किये गये. इसका यह फायदा हुआ कि इन इलाकों से नक्सली भागने के लिए मजबूर हो गये.

साल 2017 के अंत तक डीजीपी ने नक्लवाद को खत्म करने का किया था दावा

गौरतलब है कि नक्सली उग्रवाद की समस्या को देखते हुये झारखंड के डीजीपी डीके पाण्डेय ने साल 2017 में यह दावा किया था कि 31 दिसंबर 2017 तक राज्य से नक्सलवाद और उग्रवाद जैसी समस्याओं को खत्म कर दिया जायेगा. हालांकि उनके इस दावे के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि राज्य में नक्सलियों की गतिविधियों पर रोक लगेगी. लेकिन फिर भी साल 2017 में कई बार यह देखने को मिला कि यहां के कई जिलों के लोग अब भी नक्सलवाद की वजह से खौफ में जी रहे हैं. यहां के कई जिलों में उग्रवादियों ने जमकर तांडव मचाया. उन्होंने पोस्टरबाजी की, आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया, लोगों की जानें ली. फिर भी डीजीपी यही कहते नजर आये कि 31 दिसंबर तक सब खत्म हो जायेगा. अगर दिसंबर महीने के अंत तक नक्सलवाद खत्म होने वाला था तो फिर उस महीने में लगातार नक्सली घटनायें देखने को कैसे मिली. जबकि वादे के अनुसार तो अंतिम महीने तक कम से कम ऐसी घटनायें होनी चाहिये थी. क्योंकि इसे रोकने के लिये कई अभियान चलाये जा रहे होंगे. फिर भी ये घटनायें घटी. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या नक्सलियों के खिलाफ अभियान सिर्फ वादों, दावों और कागजों तक ही सीमित थे. दिसंबर महीने में घटी कई ऐसी नक्सली घटनायें हैं जो नक्सलवाद के खात्मे पर सवाल खड़ी  करते हैं. साथ ही डीजीपी के उस बयान पर भी सवाल खड़ा करती है जिसमें उन्होंने कहा है कि कुछ इलाकों से नक्सलियों का पूरी तरह से सफाया कर दिया गया है, और सुरक्षा बलों व पुलिस के शिविर लगाने की वजह से नक्सली मजबूर होकर उन इलाकों से भाग खड़े हुये हैं. क्योंकि अगर उनके दावों के अनुसार अगर नक्सली भाग खड़े हुये तो फिर घटनायें कैसे घटीं.

Anti Naxal Operation
Anti Naxal Operation

साल 2017 में हुई कुछ घटनायें

•    23 दिसंबर 2017 को लोहरदगा में भाकपा माओवादी संगठन ने शुक्रवार की आधी रात को सेन्हा थाना क्षेत्र के कोराम्बे पुल के समीप खड़े 9 हाइवा ट्रक में आग लगा दी.
•    19 दिसंबर 2017 को गिरिडीह में माओवादियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी. जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र स्थित बजटो पंचायत के मिर्जाडीह गांव में देर रात मोबाइल टावर में लगी मशीन को माओवादियों द्वारा उड़ाये जाने का मामला सामने आया था.
•    20 दिसंबर 2017 को चतरा जिले में उग्रवादियों ने सदर थाना क्षेत्र से सटे धमनिया व ऊंटा मोड में संचालित विभिन्न क्रशरों में पर्चा फेंककर दहशत फैला दी थी. टीएसपीसी के अमित जी के नाम से फेंके गए पर्चे के माध्यम से क्रशर मालिकों के अलावा क्षेत्र में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में लगे ठेकेदारों को धमकी दी गयी थी. पर्चे के माध्यम से उग्रवादियों ने चेताया था कि धमनिया व ऊंटा मोड में मनमानी क्रशर चलाना बंद किया जाये.
•    08 दिसंबर 2017 को गुमला जिला में लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर उग्रवादी संगठन पीएलएफआई ने अपनी मौजूदगी दर्ज करायी थी. उग्रवादियों ने घाघरा थाना क्षेत्र के नौनी गांव में एक पत्थर क्रशर प्लांट में खड़ी दो पोकलेन मशीन व एक लोडर मशीन को आग के हवाले कर दिया था. दोनों मशीनों को मिलाकर लगभग तीन करोड़ रुपये की सम्पति की क्षति हुई थी. उग्रवादी आगजनी की घटना को अंजाम देकर फरार हो गये साथ ही एक हस्तलिखित पर्चा भी छोड़ा था. पर्चे में लिखा गया था कि जब तक क्रशर मालिक संगठन से बात नहीं कर लेता है तब तक क्रसर में काम नहीं होगा. साथ ही यह भी लिखा था कि कोई भी वाहन मालिक क्रशर प्लांट में काम के लिए अपने वाहन ना दें.
•    06 दिसंबर 2017 को गिरिडीह जिले के अलग-अलग प्रखण्डों में पोस्टर बैनर के माध्यम से लोगों से कई तरह की अपील की जा रही थी. डुमरी, मधुबन, पीरटांड़ आदि इलाकों के बाद मंगलवार को जिले के बगोदर में भाकपा माओवादी के नाम से बैनर, पोस्टर चिपके मिले थे. ये पोस्टर व बैनर थाना क्षेत्र के खेतको में चिपकाये गये थे. पोस्टर में पीएलजीए की 17 वीं वर्षगांठ को दो से आठ दिसंबर तक सफल बनाने, केन्द्रीय कर्तव्य को पूरा करने के लिए लक्ष्य से पीएलजीए में कमीशनों और कमानों को विकसित करने, पुलिसिया-कार्पोरेट नीति को ध्वस्त करने का आह्वान, ऑपरेशन ग्रीनहंट का विरोध किया था. वहीं बैनर में लिखा था कि नक्सलबाड़ी की आग देश के कोने-कोने में जल रही है.
•    10 नवंबर 2017 को लातेहार में सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन के जवान लाटू ग्राम के पास से गुजर रहे थे. रास्ते में घात लगा कर बैठे नक्सलियों ने जवानों पर अंधाधुन्ध फायरिंग शुरु कर दी थी. जवाबी कार्रवाई करते हुए सीआरपीएफ के जवानों ने भी मोरचा लेकर नक्सलियों पर फायरिंग की. करीब दो घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद नक्सली जंगल का लाभ उठा कर भाग निकले थे. जिसके बाद यहां कुछ दिनों तर लगातार ऐसी घटनायें घटती रही.
•    16 नवंबर 2017 को लातेहार व छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़ के निकट पिपराढ़ाब में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की घटना हुई थी. यह इलाका छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में पड़ता है. मुठभेड़ में पुलिस के सात जवान घायल हो गये थे. घायलों में पांच सीआरपीएफ के जवान थे, जबकि एक झारखंड जगुआर के और एक जिला पुलिस का जवान. घायलों में दो की स्थिति गंभीर थी. वहीं पुलिस द्वारा चलाये गये अभियान के बाद भी यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि लातेहार जिला का बूढ़ा पहाड़ नक्सल मुक्त है. क्योंकि लातेहार जिले में आये दिन नक्सली घटनायें होती रहती हैं.

कैंसर की तरह पूरे राज्य में फैलता नक्सलवाद

हालांकि झारखंड बनने के बाद से ही सरकार हमेशा इस प्रयास में रही है कि राज्य से उग्रवादी गतिविधियों को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाये. लेकिन

Jharkhand Police
Jharkhand Police

झारखंड निर्माण के 17 सालों के बाद यहां हजार से भी ज्यादा नक्सली घटनायें घट चुकी हैं. जिससे यह साबित होता है कि झारखंड से इसे खत्म करना कितना मुश्किल है. झारखंड जब अलग राज्य बना था तो यहां के सात जिले ही इससे प्रभावित थे लेकिन धीर-धीरे यह कैंसर की तरह पूरे राज्य में फैलता गया. और आज इसपर लगाम लगाना मुश्किल हो गया है. नक्सलियों-उग्रवादियों  की गतिविधियां वास्तव में घट रही हैं बढ़ रही हैं, यह भी तय करने में कई पेंच हैं. लेकिन यह तो स्पष्ट है कि देश-दुनिया में झारखंड की छवी एक नक्सली हिंसा से पीड़ित राज्य के रूप में बन गयी है. उद्योगपति यहां निवेश करने से डरते हैं. पर्यटक यहां आने से डरते हैं. यहां के लोग नक्सली-पुलिस हिंसा के बीच पिस रहे हैं. आये दिन नक्सली-उग्रवादी संगठन बंदी का आह्वान करते हैं. लोग घरों से निकलने में डरते हैं. ऐसे में जरूरत है कि इसके खिलाफ योजनाबद्ध कार्रवाई की जाये ना कि सिर्फ दावे किये जायें.

7ocean

 

international public school

 

TOP STORY

हजारीबाग डीसी तबादला मामला : देखें कैसे बीजेपी के जिला अध्यक्ष कर रहे हैं कन्फर्म  

न्यूज विंग की खबर का असर :  फर्जी  शिक्षक नियुक्ति मामले में तत्कालीन डीएसई दोषी करार 

बिजली बिल के डिजिटल पेमेंट से मिलता है कैशबैक, JBVNL नहीं शुरू कर पायी है डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था

स्वीकार है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की खुली बहस वाली चुनौती : योगेंद्र प्रताप

लाठी के बल पर जनता की भावनाओं से खेल रही सरकार, पांच को विपक्ष का झारखंड बंद : हेमंत सोरेन   

सुप्रीम कोर्ट का आदेश : नहीं घटायी जायेंगी एमजीएम कॉलेज जमशेदपुर की मेडिकल सीट

मैट्रिक व इंटर में ही हो गये 2 लाख से ज्यादा बच्चे फेल, अभी तो आर्ट्स का रिजल्ट आना बाकी  

बीजेपी के किस एमपी को मिलेगा टिकट, किसका होगा पत्ता साफ? RSS बनायेगा भाजपा सांसदों का रिपोर्ट कार्ड

आतंकियों की आयी शामतः सीजफायर खत्म, ऑपरेशन ऑलआउट में दो आतंकी ढेर- सर्च ऑपरेशन जारी

दिल्ली: अनशन पर बैठे मंत्री सत्येंद्र जैन की बिगड़ी तबियत, आधी रात को अस्पताल में भर्ती

भूमि अधिग्रहण पर आजसू का झामुमो पर बड़ा हमला, मांगा पांच सवालों का जवाब