राज्यसभा के 'रण' का महारथी कौन ? चुनावी गणित का इशारा : फायदे में होकर भी बहुमत से दूर रहेगी बीजेपी

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 03/12/2018 - 12:44

" देश के 16 राज्यों में 58 राज्य सभा सीटों के लिए 23 मार्च को चुनाव होना है. इसके साथ ही ये भी तय होना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद उच्च सदन में विपक्ष अपनी मजबूती बरकरार रख पाता है, या राज्यसभा में पहले से कमजोर रहे एनडीए को मजबूती मिलती है. पर राजनीतिक पंडितों का आकलन और चुनावी समीकरण जो इशारा कर रहा है, उसके मुताबिक बीजेपी को शानदार बढ़त मिलती तो दिख रही है, पर उसके बहुमत से थोड़ा पीछे रहने के आसार भी दिख रहे हैं."

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 23 मार्च को देश के 16 राज्यों में 58 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनाव सत्तारूढ़ एनडीए के लिए केवल महत्वपूर्ण ही नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों का भविष्य तय करने वाला भी माना जा रहा है. उच्च सदन में संख्या बल नहीं होने के कारण ही लोकसभा से पारित कई विधेयकों ने राज्यसभा में आकर या तो दम तोड़ दिया, या फिर उसपर मोदी सरकार को पुनर्विचार के लिए मजबूर होना पड़ा. हालांकि इस बार के हालात कुछ और हैं. कई ऐसे राज्यों में बीजेपी सत्ता तक पहुंचने में कामयाब रही है, जहां उसके लिए कभी खाता खोलना भी मुश्किल था. ऐसे में माना जा रहा है कि संसद के ऊपरी सदन में संख्याबल में विपक्ष से कमजोर एनडीए का इन चुनावों के बाद ताकतवर होना तय है.  इसके बावजूद बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए राज्यसभा में बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें पीछे ही रह सकता है.

क्या कहता है यूपी का समीकरण ?

अब जरा चुनावी गणित को समझने की कोशिश करते हैं. उदाहरण यूपी का लिया जा सकता है. यूपी में विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या 403 है.  राज्य में कुल 10 सीटें खाली हैं. यानि 10+1=11 हुआ.  इसमें विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या 403 में 11 से भाग देंगे तो 36.63 संख्या आती है. अब 36.63+1 करेंगे.  इस तरह यूपी में कुल वोट का औसत करीब 38 विधायकों का होता है. 

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मजबूत होकर भी बहुमत से थोड़ा पीछे रह सकता है एनडीए
बीजेपी ने राज्यसभा के लिए 26 उम्मीदवारों की घोषणा की है. पहली सूची में पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली समेत 8 नामों की घोषणा की गई थी. जबकि  रविवार को जारी दूसरी सूची में 18 नामों की घोषणा की गई . इस तरह इन चुनावों में बीजेपी 26 सीटें जीतने में कामयाब हो सकती है. राज्य सभा के कुल 250 सदस्यों की संख्या में बहुमत का आंकड़ा 126 सीटों का है. राज्य सभा में अभी सदस्यों की कुल संख्या 239 है. अगर बीजेपी और उसके सहयोगी उम्मीद के मुताबिक सीटें जीतते हैं तो वह करीब 100 सीटों के आसपास होगा. ऐसे में एनडीए मौजूदा संख्या के मुकाबले बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह सकता है.

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फाइल फोटो

बीजेपी को 10 सीटों का हो सकता है फायदा
त्रिपुरा में जबर्दस्त जीत दर्ज कर सत्ता तक पहुंचने वाली बीजेपी को अभी से 2019 लोकसभा चुनाव के पहले तक कुल 62 सीटों पर चुनाव लड़ना है.  इनमें चार नॉमिनेटेड सीटें भी शामिल हैं. इन 62 सीटों में अभी बीजेपी के पास कुल 17 सीटें हैं.  23 मार्च को होने वाले चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी को सीटों के मामले में काफी फायदा मिलने वाला है.  अनुमान के मुताबिक बीजेपी और इसके सहयोगी मौजूदा चुनाव में आधी सीटें जीत सकते हैं. 


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कांग्रेस-एसपी को बड़ा नुकसान 
अगर यूपी की बात करें तो वहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की स्थिति अच्छी नहीं है, जिसका सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को मिलेगा. यहां से बीजेपी 7 सीटें जीत सकती है. एसपी यूपी से केवल एक ही उम्मीदवार को राज्यसभा भेज सकती है. अभी तक उनके कुल 6 सांसद थे.  राज्य के 403 विधायकों में एसपी के पास अभी केवल 47 विधायक हैं. पार्टी  ने इस एकमात्र सीट के लिए जया बच्चन को नामांकित किया है.  वहीं, कांग्रेस राज्य में बीएसपी का समर्थन कर रही है और उसके पास केवल 7 विधायक हैं. 

झारखंड में पहली बार किसी दल ने बाहरी को उम्मीदवार नहीं बनाया

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने जा रहे चुनाव को लेकर इस बार एक नयी पहल भी देखने को मिली. ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी भी दल ने किसी बाहरी उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा है. क्योंकि पैराटूपर उम्मीदवारों को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं. बता दें कि पहले परिमल नथवानी, केडी सिंह और एमजे अकबर झारखंड से राज्यसभा  भेजे गए थे. वहीं इस बार झारखंड के स्थानीय उम्मीदवारों को ही राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार बनाया है. साथ ही ये संदेश देने की कोशिश की गई है कि झारखंड के प्रतिनिधि होंगे तो सूबे की चिंता गंभीरतापूर्वक करेंगे. झारखंड में बीजेपी को कम से कम एक सीट मिलने की उम्मीद है. राज्यसभा चुनाव का मौजूदा गणित बीजेपी के बेहतर स्थिति में आने की तो तस्दीक कर रहा है, मगर उसके बहुमत के आंकड़े को छूने पर संशय बरकरार है. हालांकि राज्यसभा चुनाव में समीकरणों के बनने बिगड़ने की गुजाईश आखरी पलों तक रहती है.

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