क्या हजारीबाग पुलिस-प्रशासन एनटीपीसी के पक्ष में और विधायक व ग्रामीणों के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर काम कर रही थी !

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 02/22/2018 - 10:00

- हजारीबाग पुलिस पर उठ रहे सवाल, ट्रायल से पहले डिस्चार्ज हुआ पुलिस का चार्जशीट, धारा 307 व 33 हटाया

- बड़कागांव थाना कांड संख्या 135/16 के मामले में हुई सुनवाई.

- कोर्ट ने केस में धारा 307 ,333 को पर्याप्त नही माना.
-  कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा के बयान पर हुआ था मामला दर्ज. 

- एनटीपीसी के कोयला खनन क्षेत्र चिरुडीह के एक ही घटना पर तीन अलग-अलग मामला दर्ज हुआ था.

Hazaribag:  हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र के चिरुडीह में एनटीपीसी द्वारा कोयला खनन का काम शुरु करने के विरोध में किसानों-रैयतों ने धरना दिया था. धरना के दौरान ग्रामीण और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. जिसके बाद कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा के बयान पर बड़कागांव थाना में कांड संख्या-135/16 दर्ज किया गया था. इस मामले में पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल किया, वह केस का ट्रायल शुरु होने से पहले ही कोर्ट में डिस्चार्ज हो गया. कोर्ट ने केस के महत्वपूर्ण धाराएं हटा दी हैं. एेसे में यह सवाल भी उठने लगा है कि हजारीबाग की पुलिस एनटीपीसी के पक्ष में और विधायक निर्माला देवी व ग्रामीणों के विरोध में पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर काम कर रही थी. यहां उल्लेखनीय है कि विपक्षी पार्टियां लगातार इसी तरह के आरोप लगा रही है. कोर्ट के फैसले के बाद इन आरोपों को बल मिला है.
 

कोर्ट ने धारा 307 व 333 को पर्याप्त नहीं माना
कोर्ट ने धारा 307 व 333 को पर्याप्त नहीं माना

कोर्ट ने धारा 307, 333 को पर्याप्त नहीं माना 
बड़कागांव थाना कांड संख्या 135/16 में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, विधायक निर्मला देवी, मंटू सोनी, डॉ मिथलेश दांगी, मो जाहिद, लखेंदर ठाकुर, राजीव रंजन, धरमू राणा, प्रकाश राणा सहित दर्जनों लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. पुलिस ने कोर्ट में 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी सौंप दी थी. विधायक और एनटीपीसी से जुड़े मामले होने के कारण केस की स्पीडी ट्रायल शुरु कराया गया. सेशन ट्रायल 9/2017, कोर्ट नंबर- 14 में एडिशनल जिला सेशन जज अमित शेखर की अदालत में केस चार्ज होने से पहले अभियुक्तों की तरफ से पुलिस की चार्जशीट के खिलाफ डिस्चार्ज पिटीशन दिया गया. अभियुक्तों की तरफ से अधिवक्ता संजीव कुमार, अनिरुद्ध कुमार ने बहस किया. सरकार और बचाव पक्षों की तरफ से बहस सुनने के बाद कोर्ट ने अभियुक्तों पर पुलिस द्वारा लगायी गयी भारतीय दंड विधान की धारा- 307 और 303 के आरोप को पर्याप्त नही माना. और पुनः केस को सेशन ट्रायल से हटा कर सीजीएम कोर्ट में सुनवाई के लिए भेज दिया.
 

पुलिस की पिटाई से घायल महिला (फाईल फोटो)
पुलिस की पिटाई से घायल महिलाओं के साथ बड़कागांव की विधायक निर्मला देवी (फाईल फोटो)

 

पुलिस की नाकामी हुई उजागर, बढ़ेगी परेशानी
कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कई खामियां सामने आयी जिससे अभियुक्तों को लाभ मिला और पुलिस की नाकामी उजागर हुई. घटना के बाद बड़कागांव थाना में कांड संख्या- 135/16 दर्ज होने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी रामदयाल मुंडा जांच अधिकारी बनाये गये थे.  दर्ज मामले में जिस चालक मो आलम को घायल बताया गया था, उसका चार्जशीट में न तो बयान दर्ज हुआ और न ही उसकी मेडिकल रिपोर्ट जमा की गई. इसके अलावे बाद में खुद जांच अधिकारी रामदयाल मुंडा ने केस में खुद को घायल बताते हुए इंस्पेक्टर अखिलेश सिंह को भी घायल बताते हुए मेडिकल रिपोर्ट जमा कर दी. जबकि इन दोनों के घायल होने की स्थिति में इनका जिक्र सूचक की तरफ से दर्ज शिकायत में नहीं किया गया था. साथ ही केस के जांच अधिकारी रामदयाल मुंडा ने खुद अपना बयान दर्ज किया और जांच भी खुद किया . बहस के दौरान पुलिस की तरफ से यह साबित नहीं किया जा सका कि धारा 307 और 333 के तहत अभियुक्तों पर ट्रायल चलाने के लायक यह मामला है.  
पुलिस की पिटाई से घायल महिला (फाईल फोटो)प्रशासन की बदनामी और मुसीबत बढ़ेगी
हजारीबाग जिला के पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर यह आरोप लगते आ रहे हैं कि वह एनटीपीसी के पक्ष में एकतरफा कार्रवाई कर रही है. इतना ही नहीं एनटीपीसी के पक्ष में आंख बंद कर सभी तरह के काम करने की वजह से बड़कगांव में 3000 करोड़ का भूमि घोटाला हो चुका है. कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब इस आरोप को और बल मिलेगा. इससे आगे चल कर पुलिस की परेशानी भी बढ़ सकती है. क्योंकि 17 मई की एक ही घटना के बाद तीन अलग-अलग झड़पों को दिखाकर तीन केस किया गया था.जबकि ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस ने आठ गांव में घर-घर घुसकर महिला-बुजुर्ग, विकलांग-बच्चे को बेरहमी से पिटाई की थी.

आश्वासन पर नहीं हुई कार्रवाई

महिला, बच्चे  व बुजुर्गों की पिटाई के विरोध में पूर्व विधायक लोकनाथ महतो के अगुवाई में बुद्धिजीवी मंच के बैनर तले चिता सत्याग्रह आंदोलन किया गया था. आंदोलन को तत्कालीन उपायुक्त मुकेश कुमार के लिखित आश्वाशन के बाद खत्म किया गया था. जिसमें एक महीने के अंदर 17 मई की घटना को एसआईटी से जांच करने, 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का पालन करने के साथ वनाधिकार अधिकार कानून पालन करने की बात कही गई थी. इसके बाद तय समय सीमा के भीतर कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद डीसी के पत्र के आलोक में कफन सत्याग्रह शुरू हुआ. कफन सत्याग्रह के दौरान गोलीकांड हुई. जिसमें चार लोगों की मौत हो गयी थी. इन सभी मामलों की जांच और कार्रवाई के लिए उच्च न्यायल में याचिका दायर हुई है. जिसमें पुलिस-प्रशासन की मुश्किलें बढ़ेगी. 
पूर्व डीएसपी कर रहा एनटीपीसी के अधीन कंपनी में नौकरी
स्थानीय प्रशासन का एनटीपीसी के प्रभाव में आकर काम करने एवं अधिकारियों के एकपक्षीय कार्रवाई के आरोप लगते रहे हैं. अधिकारी नियम-कायदे से बाहर जाकर एनटीपीसी की मदद करते हैं. इस बात की पुष्टि के लिए लोग बड़कागांव क्षेत्र में कार्यरत एक पूर्व डीएसपी सत्येंद्र सिंह के रूप में देते हैं कि कंपनी के पक्ष में काम करने का ईनाम उसे इसी क्षेत्र में एनटीपीसी के लिए कार्य कर रही कंपनी त्रिवेणी-सैनिक में एसडी सिंह के नाम पर सुरक्षा सलाहकार के पद पर सुशोभित किया गया है.

7ocean

 

international public school

 

TOP STORY

सरकार जमीन अधिग्रहण करेगी और व्यापक जनहित नाम पर जमीन का उपयोग पूंजीपति करेगें : रश्मि कात्यायन

16 अधिकारियों का तबादला, अनिश गुप्ता बने रांची के एसएसपी, कुलदीप द्विवेदी गए चाईबासा

नोटबंदी के दौरान अमित शाह के बैंक ने देश भर के तमाम जिला सहकारी बैंक के मुकाबले सबसे ज्यादा प्रतिबंधित नोट एकत्र किए: आरटीआई जवाब

एसपी जया राय ने रंजीत मंडल से कहा था – तुम्हें बच्चे की कसम, बदल दो बयान, कह दो महिला सिपाही पिंकी है चोर

बीजेपी पर बरसे यशवंतः कश्मीर मुद्दे से सांप्रदायिकता फैलायेगी भाजपा, वोटों का होगा धुव्रीकरण

अमरनाथ यात्रा पर फिदायीन हमले का खतरा, NSG कमांडो होंगे तैनात

डीबीटी की सोशल ऑडिट रिपोर्ट जारी, नगड़ी में 38 में से 36 ग्राम सभाओं ने डीबीटी को नकारा

इंजीनियर साहब! बताइये शिवलिंग तोड़ रहा कांके डैम साइड की पक्की सड़क या आपके ‘पाप’ से फट रही है धरती

देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद रामो बिरुवा की मौत

मैं नरेंद्र मोदी की पत्नी वो मेरे रामः जशोदाबेन

दुनिया को 'रोग से निरोग' की राह दिखा रहा योग: मोदी