खबरें अदालत की : मनी लॉड्रिंग मामलेे में अभियुक्त मनोज पुनिया की दो कंपनियां आरोपी सूची में शामिल की गयी

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 06/13/2018 - 19:13

Ranchi :    ईडी के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा की अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग के अभियुक्त मनोज पूनिया की दो कंपनियों को आरोपी की सूची में शामिल किया गया. मामले में पुनमिया की जिन दो कंपनियों को आरोपी  की सूची में शामिल किया गया, उनमे मैसर्स बालाजी लाइफस्टाइल रीलेटर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स बालाजी यूनिवर्सल ट्रेड लिंक प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं. दोनों कंपनियां मुंबई के नाम पर दर्ज हैं. दोनों कम्पनियों पर 138.18 करोड़ रुपए की मनी लांड्रिंग का आरोप है. इस मामले में ईडी के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा की अदालत में मामले के अन्य अभियुक्तों के अलावा मामले में अनिल वस्तावड़े को छोड़कर सभी अभियुक्त विशेष अदालत में उपस्थित हुए,  जिसमें पूर्व सीएम मधु कोड़ा, विनोद सिन्हा, विजय जोशी, अरविंद व्यास, विकास सिन्हा, अनिल बस्तावडे और मनोज कुमार बाबूलाल पुनमिया शामिल हैं. मामले में दोनों कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज पुनमिया ही हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी.

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इनकम टैक्स कमिश्नर संतोष शाह को कन्यादान में शामिल होने के लिए मिली एक सप्ताह की अनुमति

 सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने बुधवार को तापस दत्ता मामले के अन्य अभियुक्त इनकम टैक्स कमिश्नर संतोष शाह को बेटी की शादी में कन्यादान करने के लिए जाने की अनुमति  दे दी. अदालत ने संतोष शाह को शादी में शरीक होने के लिए राजस्थान जाने के लिए एक हफ्ते की अनुमति दी है. मामले की अगली सुनवाई 20 जून को होगी.  मालूम हो कि रांची के प्रधान आयकर आयुक्त तापस दत्ता के पास से सीबीआई ने करोड़ों रपये की अवैध संपत्ति बरामद की थी.

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मौनी बाबा पर गोली चलाने के आरोप में सात साल की सजा

 अपर न्यायायुक्त सुनील कुमार सिंह की अदालत ने नागा बाबा खटाल के महंत संत आत्म प्रकाश उर्फ मौनी बाबा पर गोली चलाने के मामले में अभियुक्त सुनील पांडे उर्फ सुनील दास को सात साल की सजा सुनाई है. अदालत ने सुनील पांडेय पर 12 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना की राशि नहीं देने पर अभियुक्त को 6 माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. यह मामला रांची जीआरपी थाना से संबंधित है. दर्ज मामले के अनुसार सुनील पांडे उर्फ सुनील दास छोटू राम का आदमी है.  छोटू राम मठ के बाबा अमरदास का नौकर है. आरोप था कि छोटू ने संपत्ति हड़पने की नीयत से आत्मप्रकाश उर्फ मौनी बाबा पर छह गोलियां चलवाई थी. इसमें तीन गोलियां उनके पीठ में लगी थी और शेष गोलियां कनपट्टी की बगल से गुजर गयी थी. मामले में अभियोजन की ओर से 14 गवाहों की गवाही दर्ज की गयी.  मामले के सूचक संत आत्मप्रकाश थे. 

ट्रिपल मर्डर केस मेें आरोपी दामाद को आजीवन कारावास,  5 साल बाद आया फैसला

जमशेदपुर जिले के चर्चित सिदगोड़ा ट्रिपल मर्डर केस में दोषी दामाद प्रलय दास को एडीजे प्रभाकर कुमार की कोर्ट ने बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है. आरोपी को मंगलवार को कोर्ट ने दोषी करार दिया था. गवाही देने वालों में आरोपी की पत्नी के साथ साथ 12 अन्य लोग के गवाही के बाद फैसला सुनाया गया. विदित हो कि आरोपी प्रलय दास ने 27 नवंबर 2012 की रात प्रॉपर्टी की लालच में सास-ससुर के साथ कॉलेज स्टूडेंट साली की बेरहमी से हत्या कर दी थी.

संपत्ति की लालच में की  सास , ससुर  व  साली  की  हत्या 

आरोपी प्रलय दास ने सितंबर 2012 में रतन की बेटी शिवानी से प्रेम विवाह किया था. जिस कारण रतन के परिवार वाले खुश नहीं थे. आरोपी प्रलय बारीडीह बाजार में फूल का धंधा करता था. वह पूर्व में मारपीट के मामले में जेल भी जा चुका था. आपराधिक प्रवृत्ति का प्रलय फूल बेचकर घर चला रहा था. सास-ससुर-साली की हत्या कर संपत्ति का मालिक बनने के लालच के कारण तलवार से तीनों की हत्या कर दी. आरोपी प्रलय और की पत्नी शिवानी हत्या के बारे में सब कुछ जानती थी. सारा खेल उसी का रचा हुआ था. शिवानी ने आरोपी पति को बचाने के लिए पुलिस को कई दिनो तक गुमराह किया. मर्डर के बाद प्रलय घर पहुंचा और पत्नी शिवानी को हत्या की बात बताई. घर में ही खून से सने कपड़े छुपा दिये थे.

क्या है मामला

28 नवंबर 2012 को बारीडीह स्थित ट्यूब कॉलोनी स्थित पियाली के घर कुछ छात्र ट्यूशन लेने पहुंचे थे. काफी समय तक दरवाजा खटखटाने पर जब जवाब नहीं मिला तो छात्रों ने खिड़की से झांककर देखा. वहां खून पसरा हुआ था. आसपास के लोग मेनगेट का ताला तोड़ अंदर पहुंचे तो देखा कि टाटा स्टील के रिटायर्ड कर्मचारी रतन चटर्जी (55)जमीन पर गिरे थे. पत्नी श्यामली (50) और बेटी पियाली (18) का शव बेड पर पड़ा था. पीछे का दरवाजा खुला था. आसपास के लोगो के अनुसार कोई शोर-शराबा नहीं हुआ था, पुलिस को शुरू से ही किसी रिश्तेदार पर शक था. रतन चटर्जी कंपनी क्वार्टर में भाड़े पर रहते थे. बेटी पियाली ग्रेजुएट कॉलेज में बीसीए फर्स्ट ईयर की छात्रा थी.

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