115 साल पुरानी ट्रेन पर सफर कीजिए, बैलगाड़ी का मजा लीजिए 

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 04/28/2018 - 18:40

Jalaun : बुलेट ट्रेन के जमाने में आज भी एक ट्रेन अपने देश में ऐसी है जो 13 किमी की दूरी चालीस मिनट में तय करती है.  रास्ते में पड़ने वाले दो स्टेशनों के बीच इस ट्रेन के अलावा  कोई और ट्रेन नहीं चलती. लेकिन यह ट्रेन दो कस्बों के लोगों के लिए लाइफ़ लाइन मानी जाती है. यह ट्रेन यूपी के जालौन जिले में चलती हे. कोंच और एट स्टेशनों के बीच चलने वाली यह शटल ट्रेन 115 साल पहले चली थी. इसे यहां अददा ट्रेन कहा जाता है, इस ट्रेन की खासियत है कि शताब्दी पहले जब इस ट्रेन में तीन डिब्बे थे,  आज भी तीन ही डिब्बे हैं. ट्रेन का इंजन भारत में रेलवे के शुरुआती दौर की याद दिलाता है. इस ट्रेन  पर बैठने वालों को कोई जल्दी नहीं रहती.  ट्रेन के चालक और ड्राइवर अपने यात्रियों का पूरा ख्याल रखते हैंं. 

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यात्रियों के हाथ दिखाने पर ड्राइवर ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक देता है

रेलवे ट्रैक के किनारे चल रहे यात्रियों के हाथ दिखाने पर ड्राइवर ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक देता है और फिर गार्ड के हरे सिगनल के बाद ट्रेन आगे बढ़ जाती है. यह करीब चालीस मिनट में इन दो स्टेशनों के बीच की 13 किलोमीटर की दूरी पार करती है. किराया महज पांच रुपये है और इस पर सवारी करने के लिए दूर-दराज से लोग आकर इसके चलने का इंतजार करते हैं. ट्रेन चलाये जाने का कारण यह है कि इन दो कस्बों के बीच कोई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं चलता. छात्र, व्यापारी और दूसरे लोग भी इसी ट्रेन से जाते हैं. तीन डिब्बों की ट्रेन कभी खाली नहीं जाती.  रेलवे के एक अधिकारी बताते हैं कि दोनों स्टेशनों के बीच का किराया पांच रुपये है और हर फेरे में करीब सौ टिकट बिक जाते हैं. अददा ट्रेन दिन भर में दोनों स्टेशनों के बीच पांच चक्कर लगाती है. उनके अनुसार ज्यादातर यात्री बिना टिकट ही इस ट्रेन पर यात्रा करते हैं.  जानकारी के अनुसार अंग्रेजों ने 1902 में तीन डिब्बे वाली इस कोंच-एट शटल की शुरुआत माल ढोने के लिए की थी. बाद में तीन डिब्बे वाली इस शटल की शुरुआत हुई.

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