जो शहीद हो गए, उनके आश्रित को नौकरी कब मिलेगी यह पता नहीं, पर नक्सली को सरेंडर के समय ही नौकरी देने का प्रस्ताव

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/03/2018 - 19:44

Ranchi: पुलिस मुख्यालय ने नक्सल सरेंडर पॉलिसी ने बदलाव लाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है. प्रस्ताव में कहा गया है कि सरेंडर करने वाले नक्सली को सरेंडर करने के तुरंत बाद सरकारी नौकरी मिलेगी. नौकरी पुलिस या होमगार्ड की मिलेगी. प्रस्ताव के मुताबिक नौकरी दिए जाने के बाद यदि सरेंडर करने वाला व्यक्ति किसी नक्सली गतिविधि में शामिल पया जाता है या उसके द्वारा पूर्व में की गयी किसी घटना में अदालत द्वारा सजा सुनायी जाती है, तब इस परिस्थिति में उसकी नौकरी समाप्त (बरखास्त) कर दी जायेगी. पुलिस मुख्यालय का प्रस्ताव अभी सरकार के पास लंबित है. यहां उल्लेखनीय है कि राज्य पुलिस के शहीद पुलिसकर्मियों के 400 से अधिक अाश्रित को अभी तक नौकरी नहीं मिली है. इनमें अधिकांश वैसे पुलिसकर्मी के आश्रित हैं, जो नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में शहीद हो गए. 

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नक्सली घोषित होना जरुरी नहीं

प्रस्ताव में पुलिस मुख्यालय ने उस शर्त को समाप्त करने की भी अनुशंसा कर दी है, जिसमें यह कहा गया है कि नक्सली उसी को माना जायेगा, जिसके खिलाफ 17सीएलए एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी होगी. मतलब यह कि अब वैसे व्यक्ति को भी सरेंडर हो सकता है, जो पहले से घोषित नक्सली नहीं है. यानी खाता न बही, पुलिस जो कहे, वही सही.  

पीएलएफआई के कथित नक्सली, जिन्होंने नया जूता, नया ड्रेस और नया टोपी पहन कर सरेंडर किया था. बाद में इस पर विवाद हुआ था. (फाइल फोटो)
पीएलएफआई के कथित नक्सली, जिन्होंने नया जूता, नया ड्रेस और नया टोपी पहन कर सरेंडर किया था. बाद में इस पर विवाद हुआ था कि वे नक्सली नहीं थे. (फाइल फोटो)

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में चाईबासा पुलिस ने उग्रवादी संगठन पीएलएफआई के कथित नौ उग्रवादियों को सरेंडर कराया था. जिनमें से सिर्फ एक पर प्राथमिकी दर्ज थी. इस मामले में गृह विभाग के तत्कलीन विशेष सचिव ने गंभीर टिप्पणी की थी. तब पुलिस मुख्यालय पर यह भी आरोप लगा था कि आंकड़े बढ़ाने के लिए पुलिस भोले-भाले युवकों और बच्चों को नक्सली बताकर सरेंडर करा रही है. गौर करने वाली बात यह भी है कि झारखंड पुलिस पर 514 युवको को नक्सली बताकर सरेंडर कराने का भी आरोप लग चुका है. जिसके लिए विधानसभा में विपक्षी नेताओं ने डीजीपी डीके पांडेय को जिम्मेदार होने का आरोप भी लगाया है.

 

नियुक्ति से लेकर हर सुविधा अब डीसी के स्तर से ही मिले

प्रस्ताव में इस बात की भी अनुशंसा की गयी है कि नक्सली सरेंडर मामले में नियुक्ति और सभी तरह की सुविधाएं देने का काम जिला के डीसी के स्तर से ही पूरा कर लिया जायेगा. अभी जो नियम है उसमें  नियुक्ति से लेकर सभी तरह की सुविधाएं देने पर सरकार के स्तर से फैसला लिया जाता है.

सरेंडर करने वाले नक्सली के साथ डीजीपी डीके पांडेय (फाइल फोटो)अन्य संसोधन भी हैं प्रस्ताव में

पुलिस मुख्यालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में अन्य शर्तों को बदलने और सुविधाअों को बढ़ाने की अनुशंसा सरकार से की गयी है. सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव में ए श्रेणी के उग्रवादी-नक्सली को अब पांच लाख की जगह छह लाख रुपया का प्रोत्साहन राशि मिलेगा. जबकि बी श्रेणी के नक्सली व उग्रवादी को 2.50 लाख के बदले तीन लाख रुपया मिलेगा. इसी तरह सरेंडर करने वाले नक्सलियों-उग्रवादियों के बच्चों को मिलने वाली शैक्षणिक भत्ता को भी बढ़ाया जायेगा. साथ ही सरेंडर करने वाले नक्सलियों को काम सीखने के लिए अब स्टाइपन के रुप में  प्रति माह छह हजार रुपये दिए जायेंगे. साथ ही अगर कोई नक्सली या उग्रवादी किसी भी तरह का हथियार के साथ सरेंडर करता है, तो उस हथियार के मूल्य के बराबर राशि नक्सली को परिजन को मिलेगा. 

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सरेंडर के वक्त कुंदन पाहन की इस स्टाइल ने सबको चकित किया था. तब पुलिस की खूब आलोचना हुई थी. (फाइल फोटो)
सरेंडर के वक्त कुंदन पाहन की इस स्टाइल ने सबको चकित किया था. तब पुलिस की खूब आलोचना हुई थी. (फाइल फोटो)

कुंदन पाहन को हीरो की तरह सरेंडर कराने पर सरकार हुई थी शर्मसार

नक्सलियों को बहुत अधिक सुविधा देने और सरेंडर करने वाले नक्सलियों को गले लगाने व सरेंडर समारोह आयोजित करने को लेकर पिछले साल झारखंड पुलिस व सरकार की फजीहत हुई थी. पुलिस ने चार साल  पहले संगठन छोड़ चुके नक्सली कुंदन पाहन काे समारोह आयोजित कर सरेंडर कराया था. उसे मीडिया के सामने हीरो की तरह पेश किया गया था. जिसके बाद झारखंड में शहीद हुए पुलिसकर्मियों व पदाधिकारियों के परिजनों ने सरकार की इस नीति के खिलाफ धरना भी दिया था.