ब्लैक होल स्पेस में ऐसा गर्त है, जिसमें फंस कर हम किसी अन्य सृष्टि में पहुंच सकते हैं 

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 04/10/2018 - 17:14

 Nw desk :  ब्लैक होल क्या है. इस पर वैज्ञानिकों में माथापच्ची जारी है. वैज्ञानिक सम्मेलनों में  इस पर चर्चा का कभी अंत नहीं है. इसे लेकर आपके अंदर भी जिज्ञासा उठती होगी कि यह क्या है, कैसा होता है,  क्या इसका रंग काला होता है या फिर इसी तरह के अन्य सवाल. ब्लैक होल ऐसी खगोलीय शक्ति है, जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र काफी शक्तिशाली होता है. इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता, यहां तक कि प्रकाश भी. ब्लैक होल में एकतरफा सतह होती है, जिसे घटना क्षितिज कहा जाता है. इसमें वस्तुएं गिर तो सकती हैं, लेकिन इससे बाहर कुछ भी नहीं आ सकता. यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है और कुछ  रिफ्लेक्ट (प्रतिबिंबित) नहीं करता.  इसके बारे में यहां तक कहा गया कि यह स्पेस में ऐसा गर्त है,  जिसमें फंस कर हम नीचे से किसी अन्य सृष्टि में पहुंच सकते हैं. जब कोई विशाल तारा मरता है,  तो अपने अंदर की ओर वह गिर पड़ता है. गिरते-गिरते यह इतना सिकुड़ जाता है और इतना भारी हो जाता है कि सब कुछ अपने अंदर समेटने लगता है. इसकी ओर जाती गैस तपने लगती है और एक्स किरण छोड़ने लगती है.  बस इसी से वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल के होने का अनुमान लगाया. हालांकि अभी तक उपलब्ध किसी थ्योरी या सिद्धांत से इसे पूरी तरह समझना असंभव रहा है. 

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एम87 नामक ब्लैक होल का  आकार 6.8 अरब सूर्यों के बराबर है

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ब्लैक होल का पता लगाया है,  जो इतना बड़ा है कि हमारे पूरे सोलर सिस्टम को निगल सकता है। एम87 नामक इस ब्लैक होल का  आकार 6.8 अरब सूर्यों के बराबर है.  यह इस तरह की खोजी गयी अब तक की सबसे विशालकाय संरचना है.  ब्लैक होल बहुत छोटे भी हो सकते हैं और बहुत बड़े  भी.  वैज्ञानिकों का मानना है कि छोटे ब्लैक होल्स एक एटम के बराबर भी हो सकते हैं, लेकिन इनका द्रव्यमान एक बड़े पहाड़ इतना होता है.  एक दूसरे प्रकार का ब्लैक होल भी होता है, जिसे स्टेलर कहते हैं.  इसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के 20 गुना होता है.  पृथ्वी की गैलेक्सी में इस तरह के द्रव्यमान वाले ढेर सारे स्टेलर ब्लैक होल्स होते हैं.  पृथ्वी की गैलेक्सी को मिल्की वे कहते हैं.  इस तरह के ब्लैक होल्स को सुपरमैसिव’ कहते हैं.  इन ब्लैक होल्स का द्रव्यमान एक मिलियन सूर्य के द्रव्यमान के बराबर होता है.  वैज्ञानिकों ने इस बात का खुलासा किया है कि प्रत्यके बड़े गैलेक्सी के केंद्र में सुपरमैसिव ब्लैक होल होता है.  मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र में जो सुपरमैसिव ब्लैक होल होता है,  उसे सैगिटेरियस ए कहते हैं.  इसका द्रव्यमान लगभग चार मिलियंस सूर्य के बराबर होता है.    

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हमारे ब्रह्मांड में ब्लैक होल का अस्तित्व मौजूद है
 
इसके  भीतर की आग को देख पाना संभव नहीं है.  यह अन्य पदार्थों के साथ अन्त:क्रिया के माध्यम से अपनी उपस्थिति प्रकट कर सकता है.  इसका पता तारों के उस समूह की गति पर नजर रख कर लगाया जा सकता है,  जो अंतरिक्ष के खाली दिखाई देने वाले एक हिस्से का चक्कर लगाते हैं.  वैकल्पिक रूप से, एक साथी तारे से आप एक अपेक्षाकृत छोटे ब्लैक होल में गैस को गिरते हुए देख सकते हैं.  यह गैस सर्पिल आकार में अंदर की तरफ आती है, बहुत उच्च तापमान तक गर्म हो कर बड़ी मात्रा में विकिरण छोड़ती है,  जिसका पता पृथ्वी पर स्थित या पृथ्वी की कक्षा में घूमती दूरबीनों से लगाया जा सकता है.  इस तरह के अवलोकनों के परिणामस्वरूप यह वैज्ञानिक सर्वसम्मति उभर कर सामने आयी है कि यदि प्रकृति की हमारी समझ पूर्णतया गलत साबित न हो जाये तो,  हमारे ब्रह्मांड में ब्लैक होल का अस्तित्व मौजूद है. 

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पृथ्वी पर जीवन के अंत की शुरुआत  होगी,, पर आठ करोड़ साल बाद 

यह सच है कि कई सितारों का अंत ब्लैक होल के रूप में ही होता है, लेकिन सूर्य के ब्लैक होल में बदलने की संभावना नहीं दिखती, क्योंकि ब्लैक होल में बदलने के लिए तारे का द्रव्यमान बहुत ज्यादा होना चाहिए.  हमारे सूर्य से लाखों गुना ज्यादा.  सूर्य का द्रव्यमान ब्लैक होल में बदलने के लिए काफी नहीं है;  एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स के जानकार मानते हैं कि अगले 5 करोड़ सालों तक सूर्य को कुछ नहीं होने वाला,  लेकिन इसके बाद सूर्य की ऊर्जा कम होने लगेगी और यह बुध और शुक्र को निगल जायेगा.  इससे सूर्य का आकार बढ़ जाएगा.  ऐसा होने पर धरती का तापमान कई गुना बढ़ जायेगा.  महासागर उबलने लगेंगे और जीना मुश्किल हो जाएगा और यही से होगी पृथ्वी पर जीवन के अंत की शुरुआत.  लेकिन यह सब होगा करीब आठ करोड़ साल बाद। क्या पता तब तक इंसान पृथ्वी के विकल्प के रूप में कोई दूसरा ग्रह खोज ले.

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