टंडवा में हर माह होती है 10 करोड़ की अवैध वसूली, जांच के लिए गृह विभाग ने बनाया एसआईटी का प्रस्ताव, पर आदेश नहीं निकला

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/13/2018 - 11:11

Ranchi: चतरा के टंडवा स्थित आम्रपाली और अशोका परियोजना में काम करने वाले कोयला कारोबारियों व ट्रांसपोर्टरों से हर माह 10 करोड़ रुपये की वसूली होती है. यह वसूली टीपीसी के उग्रवादी करते हैं. वसूली का एक बड़ा हिस्सा राज्य के कुछ पुलिस अफसरों , कुछ नेताओं, कुछ पत्रकारों तक को मिलता है. तो कुछ राशि सत्ता शीर्ष तक हस्तक्षेप रखने वालों तक भी हर माह पहुंचता है. यही कारण है कि अवैध वसूली की जांच किसी भी स्तर से नहीं होती. होती है तो सिर्फ जांच के नाम पर फेंका-फेंकी. 

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गृह विभाग ने एसआइटी गठन का प्रस्ताव तैयार किया था
गृह विभाग ने एसआइटी गठन का प्रस्ताव तैयार किया था

दस्तावेज के मुताबिक अवैध वसूली की जांच के नाम पर फेंका-फेंकी का काम पिछले दो  सालों से चल रहा है. राज्य में किसी भी मामले की जांच कराने का आदेश देने की जिम्मेदारी जिन अफसरों पर है, उनमें से किसी भी अफसर ने जांच का आदेश नहीं दिया. सभी ने सिर्फ यह किया कि अपने से उपर या नीचे के अधिकारी के पास अनुशंसा भेज दी. जिसका नतीजा यह निकला कि अब तक जांच शुरु नहीं हुई. एक दस्तावेज के मुताबिक गृह विभाग ने कोयला क्षेत्र बोकारो की अध्यक्षता में एक एसआईटी गठन का भी प्रस्ताव तैयार किया, लेकिन सरकार के स्तर से उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया. 

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जांच को लेकर किस अधिकारी ने कब क्या लिखाः-

30 सितंबर 2015ः पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित तत्कालीन आईजी मुख्यालय आशीष बत्रा ने गृह विभाग को एक पत्र लिखा. जिसमें उन्होंने लिखा कि लोडिंग के नाम पर डीओ होल्डर, ट्रांसपोर्टर, हाईवा आदि से मजदूरों के नाम पर वसूली की जाती है. यही अवैध वसूली का जरिया है. चतरा में स्थापित सीसीएल के सभी प्रोजेक्ट पर टीपीसी के उग्रवादियों का वर्चस्व है. उनके पत्र में इस बात का भी जिक्र था कि 25 अगस्त 2015 को पुलिस मुख्यालय के स्तर से एसआईटी गठन का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है. 

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21 दिसंबर 2015ः तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव गौबा ने गृह सचिव को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि टंडवा के आम्रपाली व पिपरवार कोल प्रोजेक्ट से संचालित लोकल सेल्स संचालन कमेटी द्वारा की जाती है. उक्त कोल प्रोजेक्ट के सेल्स संचालन कमेटी द्वारा प्रत्येक माह करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जाती है. संचालन कमेटी के कुछ सदस्यों द्वारा पूरे कमेटी पर वर्चस्व बनाकर अवैध कमाई से अकूत संपत्ति बनाने की बात प्रकाश में आयी है. इसलिए आपराधिक सांठ-गांठ से भयादोहन कर रुपये वसूली करने वाले के विरुद्ध जांच के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करें. अगर आवश्यकता हो तो आर्थिक अपराध पर नियंत्रण के लिए वरीय पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठन का प्रस्ताव भी दें. 

27 जनवरी 2016ः चतरा के तत्कालीन एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने पुलिस मुख्यालय को एक पत्र  लिखा था. पत्र में उन्होंने कहा था कि आम्रपाली कोल परियोजना में अोवर बर्डन हटाने का काम करने वाली बीजीआर कंपनी के रघुराम रेड्डी का टीपीसी के उग्रवादियों से संबंध है. उन्होंने पुलिस मुख्यालय व झारखंड सरकार के स्तर से पूरे मामले में प्रभावकारी कार्रवाई की अनुशंसा की थी. 

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20 सितंबर 2016ः  जांच की अनुशंसा से संबंधित एक संचिका पर गृह विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव शेखर जमुआर ने अपनी टिप्पणी में लिखा था कि पुलिस मुख्यालय के पत्र के आलोक में चतरा के आम्रपाली व अशोका परियोजना में हो रही अवैध वसूली की जांच के लिए एसआईटी गठन का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है.  संचिका में उन्होंने कोयला क्षेत्र बोकारो के डीआईजी के नेतृत्व में एक एसआईटी के गठन की बात लिखा है. जिसमें खनन विभाग के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी, वन विभाग के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी, वाणिज्य कर विभाग के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी, परिवहन विभाग के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी  एसआईटी के सदस्य होंगे. इस एसआईटी  के गठन पर मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त किया जा सकता है. 

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