पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव : सैकड़ों सीटों पर निर्विरोध जीते टीएमसी प्रत्याशी, नामांकन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की शरण में बीजेपी

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 04/11/2018 - 16:13

Kolkata : पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव ने इस बार मशहूर उपन्यास राग दरबारी की याद दिला दी, जिसमें चुनावी हथकंडों का बारीक चित्रण किया गया था. बंगाल में भी टीएमसी ने सियासी बिसात इस तरह बिछाई कि विरोधी दल चीखते रहे, आरोप लगाते रहे, शिकायत करते रहे, मगर हुआ वही जो टीएमसी को मंजूर था. एक एक करके उसकी झोली में कई सीटें जा गिरी. बीरभूम जिला परिषद की 42 में से 41 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशियों ने निर्विरोध जीत हासिल की है. इसके साथ ही बीरभूम में पंचायत समिति की 19 में से 14 सीटों पर टीएमसी उम्मीदवारों को निर्विरोध विजयी घोषित किया गया है, जबकि मुर्शिदाबाद के किंडी में तृणमूल कांग्रेस के 30 में से 29 उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया. जीत का ये सिलसिला यहीं नहीं थमा, भारतपुर-22 में पार्टी ने पंचायत समिति की सभी सीटें निर्विरोध जीत ली हैं. वहीं, बरवान की सभी 37 पंचायत समिति सीटों पर टीएमसी उम्मीदवारों के सिर पर निर्विरोध जीत का सेहरा बंधा. दूसरी ओर विपक्ष की जुबां पर शिकायतों की एक लंबी फेहरिस्त है.

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विपक्ष ने टीएमसी पर लगाई आरोपों की झड़ी

बीजेपी और वामदलों ने टीएमसी पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है. विपक्षी दलों का कहना है कि दूसरे दलों के उम्मीदवारों को चुनाव में खड़ा ही नहीं होने दिया गया. बीरभूम जिले के भाजपा अध्यक्ष राम कृष्णा रॉय ने कहा, “टीएमसी कार्यकर्ता भाजपा उम्मीदारों को चुनाव नहीं लड़ने के लिए धमकी दे रहे हैं. उन्हें नामांकन दाखिल ही नहीं करने दिया जा रहा है. इसलिए चुनावी परिणाम अप्रत्याशित नहीं हैं. वो निर्विरोध जीतना चाहते थे. यही वजह है कि उन्होंने हमारे उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोक दिया. दूसरी और, सीपीएम विधायक सुजान चक्रवर्ती ने कहा है कि टीएमसी ग्रामीण इलाकों में नहीं जीत पाई, लेकिन उन्होंने बूथ पर कब्जा कर लिया. बता दें कि इससे पहले वाम दलों ने भी चुनाव आयोग से टीएमसी की शिकायत की थी और उसपर विपक्षी उम्मीदवारों को जबरन नामांकन से रोकने का आरोप लगाया था. 

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सुप्रीम कोर्ट की शरण में बीजेपी

इधर, उच्चतम न्यायालय ने भाजपा से आज कहा कि पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों में नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख को लेकर अपनी शिकायत के बारे में वह कल कलकत्ता उच्च न्यायालय जाए. न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल और न्यायमूर्ति ए.एम. सप्रे ने कहा कि उच्च न्यायालय के पास यह मामला लंबित है और उसने नामांकन दाखिल करने का समय एक दिन बढ़ाने का आदेश वापस लेने संबंधी राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले पर कल रोक लगा दी है.पीठ ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि इस मामले में कानून के अनुरूप कल विचार करे. भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने नामांकन की अवधि नौ अप्रैल से एक दिन आगे बढ़ाने और फिर इस आदेश को वापस लेने के आयोग के फैसले के खिलाफ कल शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. भाजपा ने अपनी याचिका में अपने प्रत्याशियों को नामांकन पत्र प्राप्त करने और उन्हें दाखिल करके चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने के अधिकार के संरक्षण का अनुरोध किया है. बता दें कि राज्य में एक, तीन और पांच मई को पंचायत चुनाव होने हैं.

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