सुप्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में, इतिहास हमेंं माफ नहीं करेगाः जस्टिस कुरियन

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 04/12/2018 - 09:30

NEW DELHI

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस कुरियन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में हैं. अगर हम अब भी चुप रहे तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा. जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार की चुप्पी पर कोर्ट कुछ नहीं कर सकता, तो यह सबसे खराब स्थिति होगी. जस्टिस चेलमेश्वर की चिट्ठी के बाद जस्टिस कुरियन की चिट्ठी से एक बार फिर से यह संदेश मिल रहा है कि मौजूदा दौर में देश की न्यायिक व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है. सरकार औऱ सुप्रीम कोर्ट के बीच एक बार फिर से टकराव की स्थिति उत्पन्न होने वाली है. जस्टिस कुरियन सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल थे, जिन्होंने इस साल जनवरी महीने में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस की थी.

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 'पहली बार इस अदालत के इतिहास में ऐसा हुआ है कि किसी सिफारिश पर तीन महीने बाद तक यह पता नहीं चल पा रहा है कि उसका क्या हुआ.'

 

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोलेजियम द्वारा एक जज और एक वरिष्ठ वकील को पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट में लाने की सिफारिश को केंद्र सरकार दबा करके बैठी हुई है. सरकार के इस कदम पर अगर सुप्रीम कोर्ट ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की, तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा. रिपोर्ट के मुताबिक जस्ट‍िस कुरियन कोलेजियम के फरवरी के उस निर्णय का हवाला दे रहे हैं जिसमें वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा और उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्ट‍िस के.एम. जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की गई है. जस्टिस कुरियन ने अपने पत्र में कहा है कि 'पहली बार इस अदालत के इतिहास में ऐसा हुआ है कि किसी सिफारिश पर तीन महीने बाद तक यह पता नहीं चल पा रहा है कि उसका क्या हुआ.' उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि इस मसले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सात वरिष्ठ जजों की बेंच के द्वारा सुनवाई की जाए.

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अगर मुख्य न्यायाधीश के द्वारा जस्टिस कुरियन की मांग को मान ली जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट सात जजों की पीठ सरकार को कोलेजियम की लंबित सिफारिशों पर तत्काल निर्णय लेने का आदेश दे सकती है. इसके बाद भी सरकार अगर ऐसा नहीं करती तो उसे न्यायिक अवमानना मानी जाएगी. जस्ट‍िस कुरियन ने इस लेटर की कॉपी सुप्रीम कोर्ट के 22 अन्य जजों को भी भेजी है.  

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