जिद्दी टीनएजर्स के साथ ऐसे करें डील

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 03/14/2018 - 11:35

Ranchi : क्या आपके घर में ऐसे टीनएजर्स हैं, जो आपकी बात बिल्कुल नहीं सुनते. अक्सर वे अपनी जिद मनवाने की हर संभव कोशिश करते हैं. उनकी बात न सुने जाने पर वे बाहरी लोगों के सामने बदतमीजी से पेश आने से भी गुरेज नहीं करते? आप अपने जिद्दी टीनएजर के लिए तरह-तरह की तरकीबें अपना चुकी हैं. इसके बावजूद बच्चों में कोई सुधार नहीं है. ये कहानी सिर्फ एक या दो पैरेंट्स की नहीं है वरन ज्यादातर पैरेंट्स इसी तरह की समस्या से बावस्ता हैं. टीनएजर्स का व्यवहार ज्यादातर पैरेंट्स के लिए परेशानी का सबब है. अगर आप भी इस समस्या से डील करना चाहते हैं, तो यहां मौजूद टिप्स को फालो करें.

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बच्चों की सुनें और समझें

माता-पिता अक्सर यही सोचते हैं कि उनका टीनएजर जो जिद कर रहा है, वह गलत है या वह जो बात कर रहा है, उसका कोई तुक नहीं है. जबकि हमेशा ऐसा नहीं होता. मां-बाप को चाहिये कि वे अपने टीनएज बच्चों की बातों को गौर से सुनें, उन्हें समझने की कोशिश करें. दरअसल टीनएज में बच्चों का लिविंग स्टाइल बिल्कुल अलग होता है, जो ज्यादा पैरेंट्स को पसंद नहीं आता. लेकिन ऐसा करने की बजाय आप कोशिश करें कि अपने बच्चों को सुनें और समझें. वे जो कर रहे हैं या कह रहे हैं, उसके पीछे छिपे वजह को जानने की कोशिश करें.

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बच्चों की सुनें और समझें

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गुस्सैल और जिद्दी हो रहे हैं बच्चे

टीनएजर्स किसी भी उम्रवर्ग के बच्चों से ज्यादा अटेंशन सीकर होते हैं. उन्हें हर पल मां-बाप की जरूरत होती है. वे अपनी तमाम तरह की बातों को मां-बाप से साझा करना चाहते हैं. लेकिन पैरेंट्स उनकी बातें सुनने की बजाय अनसुना कर देते हैं. नतीजतन उनके टीनएज गुस्सैल और जिद्दी हो जाते हैं. इतना ही नहीं वे अपने पैरेंट्स की बाहर के लोगों के सामने इंसल्ट तक करने लगते हैं. अतः पैरेंट्स को चाहिए कि वे अपने किशोरवय बच्चों को महत्व दें और उन्हें जताएं कि उनकी हर बात उनके लिए महत्व रखती है.

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गुस्सैल और जिद्दी हो रहे हैं बच्चे

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हर छोटी-छोटी बात पर झगड़ने को  तैयार रहते है टीनएजर्स

पैरेंट्स यही सोचते हैं कि उनके टीनएजर्स हर छोटी-छोटी बात पर झगड़े के बहाने तलाश लेते हैं. जबकि मां-बाप और किशोरवय बच्चों में ज्यादातर झगड़े इसलिए होते हैं, क्योंकि वे किसी भी बात पर एकमत नहीं होते. पैरेंट्स हर चीज को अपने नजरिए से देखते हैं. लेकिन उन्हें अपने नहीं टीनएजर की नजर से उनकी दुनिया को देखना और समझना होगा. तभी जाकर उनके आपसी झगड़े कम होंगे. अगर आप अपने किशोरवय बच्चों की किसी बात से असहमत हैं, तो उस पर अपनी बात मनवाने की जबरन कोशिश न करें. उसे तार्किक ढंग से अपनी बात को समझाएं और खुद भी उसकी बात को समझने की कोशिश करें.

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बच्चे झगड़े के तलाश करते है बहाना

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सिर्फ बच्चों के नकारात्मक चीजों पर ना करें फोकस

अगर आप अपने टीनएज को उसकी गलतियों पर डांटती हैं तो उसके अच्छे बिहेवियर पर उसे एन्करेज भी करें. ऐसा करने आपके किशोरवय बच्चों को लगेगा कि आप हमेशा उसकी नकारात्मक चीजों पर ही फोकस नहीं रहतीं. उसकी अच्छी चीजों पर भी गौर करती हैं. असल में ज्यादातर टीनएजर्स को यही शिकायत रहती है कि उनके मां-बाप सिर्फ और सिर्फ उनकी गलत चीजों को प्वाइंट आउट करते हैं. हमेशा डांटने के बहाने तलाशते हैं. आप अपने किशोरवय बच्चों के मन में इस तरह की बातों को बैठने न दें.

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सिर्फ बच्चों के नकारात्मक चीजों पर ना करें फोकस​​​​​​

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